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इमेजिन कि आपके गांव का गोबर, खेत का ठूंठ और रसोई का कचरा अब आपकी गाड़ी को दौड़ाएगा, घर में रोशनी देगा और आपकी जेब भी भरेगा। ये ख़्वाब अब हकीकत बनने जा रहा है। केंद्र सरकार ने 23,731 करोड़ रुपये की ‘गोबरधन’ (GOBARdhan) योजना को मंजू़री दे दी है, जो भारत की स्वच्छ ऊर्जा और किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
‘गोबरधन’ क्या है और क्यों है ख़ास?
GOBARdhan यानी ‘Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan’। साल 2018 में शुरू हुई इस योजना को अब एक नया और बड़ा रूप दिया गया है। इस स्कीम के तहत, गांवों में पशुओं का गोबर, फसलों के अवशेष, गन्ने का छिलका (प्रेस मड) और शहरों का जैविक कचरा अब कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और जैविक खाद में बदलेगा। सरकार का टारगेट अगले 10 सालों में CBG के प्रोडक्शन को करीब 10 गुना बढ़ाना है।
किसानों को कैसे होगा फायदा?
ये योजना किसानों और पशुपालकों के लिए वरदान साबित होगी। जो गोबर और फसल का कचरा पहले बेकार समझा जाता था या जलाकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता था, अब वो आमदनी का सोर्स बनेग। सरकार ने CBG की खरीद के लिए 2,110 रुपये प्रति MMBTU की गारंटीशुदा कीमत तय की है। साथ ही, CBG बनाने वाले Projects को 2 करोड़ रुपये प्रति टन प्रतिदिन (TPD) की पूंजीगत मदद भी दी जाएगी। इससे किसानों को न सिर्फ एक्स्ट्रा कमाई होगी, बल्कि Biogas plants से निकलने वाली जैविक खाद से खेती की लागत भी कम होगी और मिट्टी की सेहत सुधरेगी।
क्यों है ये योजना देश के लिए ज़रूरी?
ये स्कीम भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। फिलहाल देश में प्राकृतिक गैस की जितनी ज़रूरत है, उसका 50 फीसदी हिस्सा विदेशों से आयात किया जाता है। CBG रासायनिक रूप से प्राकृतिक गैस के बराबर होती है और इसे मौजूदा गैस पाइपलाइन में आसानी से मिलाया जा सकता है। इस योजना से विदेशी ईंधन पर निर्भरता घटेगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश ‘आत्मनिर्भर’ बनेगा ।
सरकार ने क्या-क्या सुविधाएं दी हैं?
सरकार ने इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए 6 स्तंभों (Growth Engines) पर काम करने का ऐलान किया है :
1.असुरक्षित खरीद: सरकार ने CNG और PNG में CBG को मिलाने की अनिवार्यता (Blending Obligation) तय की है। 3 फीसदी (2026-27), 4 फीसदी (2027-28) और 5 फीसदी (2028-29 से)।
2.स्थिर मूल्य: CBG के लिए 10 साल के लिए 2,110 रुपये प्रति MMBTU की स्थिर कीमत तय की गई है।
3.पूंजी मदद : नए प्लांटों के लिए प्रति टन क्षमता पर 2 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी।
4.पाइपलाइन कनेक्टिविटी: CBG प्लांटों को मुख्य गैस पाइपलाइन से जोड़ने के लिए बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा।
5.आसान कर्ज: MSME परियोजनाओं के लिए क्रेडिट गारंटी की व्यवस्था, जिससे बिना ज्यादा गारंटी के लोन मिल सके।
6.चुनौती कोष: जिला स्तर पर फीडस्टॉक मैपिंग और सप्लाई चेन मजबूत करने के लिए ‘CBG इकोसिस्टम चैलेंज फंड’।
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।
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