मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य कैबिनेट ने खेती को नई ताकत देने के लिए अलग-अलग योजनाओं के तहत 13 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि को मंजूरी दी है। ये राशि न सिर्फ सिंचाई बल्कि ऊर्जा और ग्रामीण विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।
सिंचाई परियोजनाओं को मिली हरी झंडी
इस बैठक में सबसे ज्यादा ध्यान सिंचाई परियोजनाओं पर दिया गया। कैबिनेट ने तीन बड़ी सिंचाई परियोजनाओं के लिए 4 हजार करोड़ रुपये से अधिक की मंज़ूरी दी है। इन परियोजनाओं से राज्य के 88 हजार हेक्टेयर खेती को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा, जिससे किसानों को दोगुनी फसल और बेहतर उत्पादन का सीधा फायदा होगा।
1.नीमच की जावद-नीमच दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना: ये परियोजना सबसे बड़ी है। अगले पांच साल (2026-2031) के लिए इसके लिए 4,197 करोड़ 58 लाख रुपये मंज़ूर किए गए हैं। ये एक Modern ‘Pressurized Micro-Irrigation’ Scheme है, जिसमें पाइप के जरिए सीधे खेतों तक पानी पहुंचाया जाएगा। इससे पानी की भारी बचत होगी और सूखे इलाकों में भी हरियाली लाई जा सकेगी।
2.राजगढ़ की सुठालिया सिंचाई परियोजना: इस परियोजना के लिए 262 करोड़ 63 लाख रुपये की मंज़ूरी दी गई है। इसका टारगेट राजगढ़ जिले के 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में Micro-irrigation system को बढ़ावा देना है। यह किसानों के लिए बहुत ज़रूरी है क्योंकि इससे बागवानी और औषधीय फसलों को भी पानी मिल सकेगा।
3.राजगढ़ की पार्वती रिन्सी सिंचाई परियोजना: इस परियोजना के लिए 507 करोड़ 23 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके तहत बांध बनाकर 48 हजार हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई क्षमता बढ़ाई जाएगी। इस परियोजना की ख़ास बात यह है कि इसके तहत बनने वाले बांध से कई नहरें निकलेंगी जो पुराने जलस्रोतों को भी जीवन देंगी।
बिजली संकट का स्थायी समाधान
किसानों की सिंचाई के साथ-साथ राज्य सरकार ने भविष्य की बिजली जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट ने 2800 मेगावॉट thermal power खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
मुख्यमंत्री का विज़न
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ किया है कि राज्य सरकार कृषि विकास के तहत उत्पादन बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रही है। इस बड़े निवेश से राज्य के ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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