Horticulture Data: देश का बागवानी बूम! फ़ल-सब्ज़ियों की पैदावार ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

अब भारत की असली ताकत बागवानी (Horticulture) बन चुकी है। फ़ल हो, सब्ज़ी हो, मसाला हो या फूल,हर तरफ हरियाली ही हरियाली है।

अगर आपको लगता है कि भारत सिर्फ गेहूं-धान का देश है, तो यह ख़बर आपकी सोच बदल देगी। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Union Minister Shivraj Singh Chauhan) की मंज़ूरी के बाद कृषि विभाग से जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने साफ कर दिया है कि अब भारत की असली ताकत बागवानी (Horticulture) बन चुकी है। फ़ल हो, सब्ज़ी हो, मसाला हो या फूल,हर तरफ हरियाली ही हरियाली है।

कहानी नंबरों की ज़ुबानी

आंकड़े अक्सर बोरिंग होते हैं, लेकिन ये आंकड़े जश्न मनाने वाले हैं। साल 2023-24 की तुलना में साल 2024-25 में देश का बागवानी क्षेत्रफल सिर्फ एक साल में 10.50 लाख हेक्टेयर बढ़ गया। यानी 3.61 प्रतिशत की उछाल, लेकिन असली कमाल प्रोडक्शन में है। पिछले साल जहां 3,547 लाख टन बागवानी फसलें हुई थीं, वहीं इस साल ये आंकड़ा बढ़कर 3,707 लाख टन तक पहुंच गया। यानी किसानों ने एक साल में 159.94 लाख टन अतिरिक्त फल-सब्जियां उगा डालीं।

किसान के खेत से लेकर आम आदमी की रसोई तक

ये बढ़ोतरी सिर्फ नंबरों का खेल नहीं है, बल्कि ये आपकी रसोई की थाली को सीधे प्रभावित करती है।

  • फलों की बहार: केला, आम, अमरूद और पपीता की पैदावार ने रफ्तार पकड़ी है। फलों का कुल उत्पादन 1,176 लाख टन के पार चला गया, जो पिछले साल से 46 लाख टन ज्यादा है। यानी अब फल सिर्फ सीजन में नहीं, बल्कि भरपूर मात्रा में मिलेंगे।
  • सब्जियों में नंबर वन : सब्जियों के मामले में तो कमाल ही हो गया। प्याज, आलू, फूलगोभी, भिंडी, लौकी, हर सब्जी की पैदावार ने नए रिकॉर्ड बनाए। सब्जियों का कुल उत्पादन 2,177 लाख टन तक पहुंच गया। ये पिछले साल से पूरे 106 लाख टन ज्यादा है।

प्याज का मसाला, आलू का तड़का

आम आदमी के लिए सबसे राहत की बात ये है कि प्याज और आलू की फसल ने उछाल मारी है। प्याज की खेती का रकबा 27.74 फीसदी उछलकर 19.68 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। नतीजा? प्याज का उत्पादन 307 लाख टन हो गया, जो पिछले साल से 65 लाख टन ज़्यादा है। यानी अब प्याज़ के दामों की टेंशन कम होने की उम्मीद है। वहीं आलू ने भी 585 लाख टन के साथ नई ऊंचाई छुई है।

टमाटर की ट्रेजेडी से रिकवरी

याद कीजिए जब टमाटर ने 100 रुपये किलो का आंकड़ा पार कर लिया था? उस दर्द से अब राहत मिलने वाली है। अगले साल 2025-26 के लिए जो पहला अनुमान लगाया गया है, उसके मुताबिक टमाटर का उत्पादन 227 लाख टन तक पहुंच सकता है। ये इस साल के मुकाबले करीब 21 लाख टन ज्यादा है। यानी आने वाले समय में टमाटर का स्वाद फिर से मीठा होगा, तीखा नहीं।

फूलों से महकी अर्थव्यवस्था, मसालों से तीख़ा उत्पादन

बागवानी का ये बूम सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है। फूलों की खेती में 25 फीसदी की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। गेंदा हो या गुलाब, किसान अब फूलों की खेती से मालामाल हो रहे हैं। वहीं मसालों के मामले में भी धमाल है। जीरा, अदरक, हल्दी और लहसुन की पैदावार ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

सिर्फ उत्पादन नहीं, बल्कि सोच में बदलाव

ये उछाल कोई मैजिक नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों और किसानों की मेहनत का नतीजा है। बेहतर सिंचाई सुविधाएं, उन्नत बीज, और कोल्ड स्टोरेज की बेहतर व्यवस्था ने इस सपने को साकार किया है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Union Minister Shivraj Singh Chauhan) का कहना है कि तकनीक और वैल्यू चेन (Technology and Value Chain) को मजबूत करके ही ये मुकाम हासिल हुआ है।

 

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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