IMD ने लॉन्च किया ‘Hyper Local Forecast System’, ब्लॉक स्तर पर मिलेगी सटीक मौसम की जानकारी

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित नया ‘Hyper Local Forecast System’ शुरू किया है, जिसके जरिए किसानों को ब्लॉक स्तर पर 10 दिन पहले तक बारिश और मौसम की जानकारी मिल सकेगी।

मॉनसून से पहले किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। अब खेती से जुड़े फैसले अनुमान नहीं, बल्कि सटीक मौसम जानकारी के आधार पर लिए जा सकेंगे। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित नया ‘Hyper Local Forecast System’ शुरू किया है, जिसके जरिए किसानों को ब्लॉक स्तर पर 10 दिन पहले तक बारिश और मौसम की जानकारी मिल सकेगी। इससे बुवाई, सिंचाई और फसल प्रबंधन में किसानों को बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।

मॉनसून से पहले किसानों को बड़ी राहत

मॉनसून से पहले किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। अब खेती से जुड़े फैसले अनुमान नहीं, बल्कि सटीक मौसम जानकारी के आधार पर लिए जा सकेंगे। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित नया ‘हाइपर लोकल फोरकास्ट सिस्टम’ शुरू किया है, जिसके जरिए किसानों को ब्लॉक स्तर पर 10 दिन पहले तक बारिश और मौसम की जानकारी मिल सकेगी। इससे बुवाई, सिंचाई और फसल प्रबंधन में किसानों को बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।

क्या है ‘हाइपर लोकल फोरकास्ट सिस्टम’?

अब तक किसान मॉनसून की सामान्य तारीखों के आधार पर तैयारी करते थे, लेकिन कई बार राज्य में मॉनसून पहुंचने के बावजूद जिलों, ब्लॉकों या गांवों में बारिश नहीं होती थी। ऐसे में खेती प्रभावित होती थी और किसानों को नुकसान झेलना पड़ता था। इसी चुनौती से निपटने के लिए IMD ने AI तकनीक पर आधारित ‘हाइपर लोकल फोरकास्ट सिस्टम’ लॉन्च किया है।

यह नया सिस्टम ब्लॉक स्तर पर मौसम का सटीक पूर्वानुमान देगा। इसके जरिए किसान समय रहते बुवाई, सिंचाई और दूसरी कृषि गतिविधियों की बेहतर योजना बना सकेंगे। IMD के मुताबिक, मॉनसून की शुरुआत केरल से ट्रैक की जाएगी और उसी आधार पर पूरे देश के लिए पूर्वानुमान जारी होगा। इसमें ग्लोबल फोरकास्ट एजेंसियों के डेटा का भी इस्तेमाल किया जाएगा।

15 राज्यों के 3,196 ब्लॉकों में लागू

फिलहाल यह सिस्टम 15 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 3,196 ब्लॉकों में लागू किया गया है। IMD का कहना है कि इसके दो ट्रायल रन सफ़लतापूर्वक पूरे हो चुके हैं। जिन राज्यों में इसे लागू किया गया है, वे मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर हैं और दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के प्रति संवेदनशील माने जाते हैं।

अल नीनो के बीच होगी असली परीक्षा

इस साल इस सिस्टम की असली परीक्षा भी होगी, क्योंकि मौसम विशेषज्ञ ‘अल नीनो’ के प्रभाव के चलते सामान्य से कम बारिश की आशंका जता रहे हैं। आमतौर पर अल नीनो के दौरान भारत में मॉनसून कमजोर पड़ जाता है।

यूपी के लिए लॉन्च हुआ खास मॉडल

इसी बीच IMD ने उत्तर प्रदेश के लिए एक खास मॉडल भी लॉन्च किया है, जो 1 किलोमीटर के दायरे में मौसम की जानकारी देगा। यह पूर्वानुमान 10 दिनों तक मान्य रहेगा। यूपी को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसलिए चुना गया है क्योंकि यहां ऑटोमैटिक वेदर स्टेशनों का बड़ा नेटवर्क मौजूद है।

इसे भी पढ़िए:  फ्रूट होराइजन 2026 में शिवराज सिंह चौहान ने फल निर्यात बढ़ाने पर दिया ज़ोर

WINDS प्रोजेक्ट पर भी तेजी से काम

इसके अलावा ‘WINDS’ (Weather Information Network and Data System) प्रोजेक्ट पर भी काम जारी है, जिसका मकसद मौसम से जुड़े जोखिमों की सटीक जानकारी देना है। फिलहाल देश में करीब 10,600 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और 9,500 ऑटोमैटिक रेन गेज काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नई तकनीक किसानों को मौसम की अनिश्चितता से राहत देने और खेती को ज्यादा सुरक्षित और योजनाबद्ध बनाने में मददगार साबित होगी।

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top