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देश में मौसम पूर्वानुमान को और ज़्यादा सटीक और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अब AI आधारित नई मौसम प्रणाली शुरू की है, जिसके जरिए लोगों को हाइपर-लोकल मौसम जानकारी मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में दो आधुनिक मौसम पूर्वानुमान सेवाओं का शुभारंभ किया। इन नई सेवाओं का उद्देश्य किसानों, प्रशासन और आम लोगों को पहले से ज़्यादा सटीक मौसम जानकारी देना है।
AI आधारित मॉनसून सिस्टम की शुरुआत
नई प्रणाली के तहत भारत मौसम विज्ञान विभाग ने पहली बार AI आधारित “Forecast of Monsoon Advance” सिस्टम लॉन्च किया है। ये सिस्टम देश के अलग-अलग हिस्सों में मानसून की प्रगति का पूर्वानुमान देगा। ख़ास बात ये है कि ये जानकारी चार सप्ताह पहले तक उपलब्ध कराई जाएगी।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार ये सेवा 16 राज्यों और 3000 से ज़्यादा उप-जिलों के किसानों के लिए उपयोगी साबित होगी।
उत्तर प्रदेश के लिए 1 किलोमीटर रिजॉल्यूशन बारिश पूर्वानुमान
नई सेवाओं में दूसरा बड़ा प्रोडक्ट उत्तर प्रदेश के लिए हाई स्पेशियल रिजॉल्यूशन रेनफॉल फोरकास्ट है। इस पायलट प्रोजेक्ट के जरिए भारत मौसम विज्ञान विभाग अब 1 किलोमीटर रिजॉल्यूशन पर बारिश का पूर्वानुमान देगा। ये जानकारी 10 दिन पहले तक उपलब्ध होगी।
इस तकनीक में AI आधारित डाउनस्केलिंग मॉडल, डॉपलर वेदर रडार, सैटेलाइट डेटा और ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन का इस्तेमाल किया गया है।
किसानों को मिलेगा बड़ा फ़ायदा
नई मौसम सेवाओं का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिलने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग का कहना है कि अब किसान बुवाई, सिंचाई, फ़सल सुरक्षा और कटाई जैसे फैसले ज़्यादा सटीक तरीके से ले सकेंगे।
लोकल स्तर पर मौसम की जानकारी मिलने से फ़सलों को नुक़सान कम होगा और खेती की योजना बेहतर तरीके से बनाई जा सकेगी।
मौसम पूर्वानुमान में बड़ा बदलाव
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत मौसम विज्ञान विभाग की क्षमता में काफ़ी सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि पहले देश में केवल 16 से 17 डॉपलर वेदर रडार थे, जबकि अब इनकी संख्या करीब 50 हो चुकी है।
मिशन मौसम के तहत 50 और रडार लगाए जाएंगे। इससे मौसम की निगरानी और चेतावनी प्रणाली पहले से ज़्यादा मज़बूत हुई है।
आपदा प्रबंधन में भी मिलेगी मदद
नई AI आधारित प्रणाली केवल किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन और प्रशासन के लिए भी काफ़ी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक इससे बाढ़, भारी बारिश और अन्य मौसम संबंधी खतरों के बारे में पहले चेतावनी देना आसान होगा। ये सिस्टम रियल टाइम फैसले लेने में भी मदद करेगा।
मोबाइल और डिजिटल प्लेटफॉर्म से पहुंचेगी जानकारी
सरकार मौसम से जुड़ी जानकारी को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाने पर भी जोर दे रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग अब मोबाइल ऐप, SMS, व्हाट्सऐप, किसान पोर्टल और टीवी जैसे माध्यमों से मौसम अपडेट भेज रहा है।
इसका उद्देश्य ये सुनिश्चित करना है कि गांवों तक भी समय पर मौसम की जानकारी पहुंच सके।
मौसम पूर्वानुमान की सटीकता में सुधार
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में गंभीर मौसम घटनाओं के पूर्वानुमान की सटीकता में करीब 40 प्रतिशत सुधार हुआ है। इसके अलावा चक्रवात की दिशा और लैंडफॉल की भविष्यवाणी में भी 30 से 35 प्रतिशत तक सुधार दर्ज किया गया है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग लगातार नई तकनीकों का उपयोग करके मौसम सेवाओं को और बेहतर बनाने पर काम कर रहा है।
जलवायु बदलाव के दौर में नई पहल अहम
बदलते मौसम और लगातार बढ़ती चरम मौसम घटनाओं के बीच सटीक मौसम जानकारी की ज़रूरत पहले से ज़्यादा बढ़ गई है। ऐसे समय में भारत मौसम विज्ञान विभाग की ये नई AI आधारित पहल काफ़ी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित मौसम सेवाएं देश को जलवायु चुनौतियों से निपटने में मदद करेंगी।
आगे की तैयारी
फिलहाल उत्तर प्रदेश में शुरू की गई हाई रिजॉल्यूशन बारिश पूर्वानुमान सेवा को आगे दूसरे राज्यों में भी बढ़ाने की योजना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग का कहना है कि जैसे-जैसे मौसम संबंधी इंफ्रास्ट्रक्चर मज़बूत होगा, वैसे-वैसे ऐसी सेवाओं का विस्तार पूरे देश में किया जाएगा।
ये पहल भारत को तकनीक आधारित और नागरिक केंद्रित मौसम सेवा प्रणाली की ओर आगे बढ़ाने वाला बड़ा कदम मानी जा रही है।
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