Potato processing: आलू के किसानों को सीधे बाज़ार में बिक्री करने पर उतनी अच्छी कीमत शायद न मिले जितनी की किसी कंपनी को बेचने पर मिलती है। दरअसल, कई कंपनियां आलू की प्रोसेसिंग के ज़रिए विभिन्न तरह के उत्पाद तैयार करती है और ऐसी कंपनियां सीधे किसानों से आलू खरीदती है। ऐसी ही एक कंपनी है HyFun जिसका मुख्यालय गुजरात के मेहसाणा में है। यहीं कंपनी की एक बड़ी प्रोसेसिंग यूनिट भी है। ये कंपनी कॉन्ट्रैक्ट फ़ार्मिंग के तहत किसानों को अच्छी गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराती है और उनसे ही बढ़िया आलू खरीदती है। इससे किसानों को न तो बीज खरीदने की चिंता होती है और न ही आलू बेचने की। HyFun किस तरह से करती है आलू की प्रोसेसिंग ये जानने के लिए किसान ऑफ़ इंडिया के संवाददाता सर्वेश बुंदेली ने कंपनी के प्रोसेसिंग प्लांट का दौरा किया और कंपनी के अधिकारी रविंद्र से बातचीत की।
Potato processing में अग्रणी है HyFun
HyFun कंपनी प्रोसेसिंग के ज़रिए आलू से कई तरह के उत्पाद तैयार करती है और इसे सिर्फ़ देश ही नहीं विदेशों में भी बेच रही है। 1500 करोड़ टर्नओवर वाली इस कंपनी की शुरुआत 2015 में हरेश करमचंदानी ने की थी और सिर्फ़ 10 सालों में ये कंपनी एक बड़ा ब्रांड बन गई। यही नहीं इससे जुड़े हज़ारों किसानों को भी कंपनी की तरक्की से फ़ायदा हो रहा है। आलू किसानों के लिए ये कंपनी कमाई का बेहतरीन विकल्प है क्योंकि फसल तैयार होने के पहले ही किसानों को खरीददार मिल चुका होता है और उन्हें बीज के लिए भी दर-दर भटकने की ज़रूरत नहीं पड़ती है। आलू की प्रोसेसिंग के ज़रिए ब्रांड बनने वाली HyFun कंपनी के प्रोसेसिंग प्लांट गुजरात के मेहसाणा में है जहां कई बार क्वालिटी चेक के बाद प्रोसेस्ड उत्पाद तैयार होते हैं। मेहसाणा में बड़े पैमाने पर आलू की खेती हो रही है, क्योंकि यहां की जलवायु आलू की खेती के लिए उपयुक्त है।
पहले होता है क्वालिटी चेक
कंपनी से एक एक अधिकारी रविंद्र बताते हैं कि किसानों से सीधा आलू खरीदने के बाद जब वो प्लांट में आता है तो अंदर जाने से पहले ही एक बार उसका क्वालिटी चेक किया जाता है। फिर प्लांट के अंदर आगे कि प्रक्रिया के लिए ले जाया जाता है। प्लांट में कई तरह की मशीने लगी हुई है। आलू के आने के बाद उसे एक मशीन में अच्छी तरह से धोया जाता है। फिर दूसरे चरण में इन्हें छीला जाता है, फिर एक मशीन के अंदर से आलू गुजरता है और मैनुअली जो आलू थोड़े खराब होते हैं उन्हें हटा दिया जाता है। फिर दूसरे मशीन में इन्हें भेजा जाता है, जहां उनकी कटिंग की जाती है। कंटिग के बाद एक साइज़ के टुकड़ों को अलग किया जात है और छोटे टुकड़े मशीन में लगी जाली से नीचे गिर जाते हैं। ये कंपनी के लिए वेस्ट होते हैं, इनका कोई इस्तेमाल नहीं होता है।

ऑटोमैटिक मशीनों से होता है काम
रविंद्र बताते हैं कि प्लांट में Automatic defect removal machine है जो डिफेक्टिव पीस को हटा देती है, फिर तैयार फ्रेंच फ्राइज़ की ब्लांचिग की जाती है। उसके बाद इसे ड्राई किया जाता है और ये ड्राई किए हुए फ्राइज़ को बड़े-बड़े ऑयल कंटेनर में फ्राय किया जाता है। फ्राई होने के बाद इसे सेफ रखने के लिए फ्रीज़ किया जाता है। फ्रिज़ का तापमान -10 डिग्री से -12 डिग्री तक होता है। अब उत्पाद की पैकेजिंग की जाती है। एक मशीन में फ्रीज़ हुए फ्राइस को ज़रूरत के हिसाब से अलग-अलग वज़न के हिसाब से पैक किया जाता है। फिर बाहर भेजने के लिए इसे कार्टन में भरा जाता है। रविंद्र बताते हैं कि हर उत्पादन जो भी कंपनी बनाती है उसकी अच्छी तरह से जांच की जाती है, उसके बाद ही सामान बाहर भेजा जाता है। क्वालिटी चेक उत्पाद बनने के दौरान तो होता ही है, साथ ही उत्पाद बनने के बाद भी क्वालिटी चेक किया जाता है। ताकि ग्राहकों को बेहतरीन उत्पाद मिले। शुरू से अंत तक सारा काम ऑटोमैटिक मशीनों से ही होता है।
बड़ी-बड़ी कंपनियों को करते हैं सप्लाई
कंपनी के अधिकारी रविंद्र बताते हैं कि HyFun आलू से फ्रेंच फ्राइज़, पोटैटो वेजेस, आलू टिक्की, बर्गर टिक्की आदि बनाती है और इसे मैकडॉनल्ड और बर्गर किंग जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियों को भी सप्लाई करती है। उनका कहना है कि उनके प्रोडक्ट में ज़ीरो प्रिज़रवेटिव है और इसकी स्टोर करने की क्षमता 1.5 से 2 साल है।
फूड प्रोसेसिंग बिज़नेस की चुनौतियां
युवाओं के लिए फूड प्रोसेसिंग एक अच्छा बिज़नेस विकल्प हो सकता है। HyFun कंपनी ने जिस तरह से आलू की प्रोसेसिंग की, उसी तरह से दूसरे फल व सब्ज़ियों की प्रोसेसिंग से भी विभिन्न उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। प्रोसेस्ड उत्पादों की कीमत हमेशा ज़्यादा होती है, इसलिए इसमें अच्छा मुनाफ़ा होता है, मगर फूड प्रोसेसिंग बिज़नेस में कुछ चुनौतियां भी हैं। अगर आपको इसमें लंबे समय तक टिके रहना है और सफ़ल होना है तो उत्पाद बनने के दौरान हाइजीन और फूड सेफ्टी नियमों का पालन करना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि जब ग्राहकों को अच्छी गुणवत्ता का उत्पाद मिलेगा तभी वो दोबारा इसे खरीदेंगे।

किसानों के लिए फ़ायदेमंद हो सकती है कॉन्ट्रैक्ट फ़ार्मिंग
HyFun कंपनी किसानों से कॉन्ट्रैक्ट फ़ार्मिंग के तरत ही फसल प्राप्त करती है। मगर आज भी बहुत से किसानों में इसे लेकर गलत धारणा है। हालांकि जानकार इसे छोटे किसानों के लिए फायदेमंद मानते हैं, क्योंकि इसमें कंपनी और किसान के बीज एक अनुबंध होता है जिसमें फसल की बुवाई से पहले ही उसकी कीमत तय हो जाती है। इसके फ़ायदा ये होता है कि बाज़ार में उतार-चढ़ाव का किसानों पर असर नहीं होता है। इतना ही नहीं कंपनियां किसानों को तकनीकी ज्ञान, बीज, खाद के साथ ही सही मार्गदर्शन भी देती है, जिससे उत्पाद की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार होता है। यही नहीं किसान सीधे कंपनी को फसल बेचते हैं, तो बिचौलियों की समस्या भी खत्म हो जाती है। कॉन्ट्रैक्ट फ़ार्मिंग से छोटे किसानों को सुनिश्चित आमदनी होती है। बस ज़रूरत ये है कि किसान अनुबंध के नियम व शर्तों को ध्यान से पढ़ लें। जहां तक HyFun कंपनी का सवाल है तो ये किसानों न सिर्फ़ खेती में मदद करती है, बल्कि उन्हें जागरुक भी करती है और खेती की नई तकनीक भी सिखा रही है।
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