प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने खेती और स्वास्थ्य को एक साथ जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौज़ूदगी में “सेहत मिशन” लॉन्च किया गया। यह मिशन ICAR और ICMR की साझेदारी से शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य खेती, पोषण और स्वास्थ्य को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़कर “हेल्दी इंडिया” की मज़बूत नींव तैयार करना है।
इलाज नहीं, रोकथाम पर जोर
दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि “सेहत मिशन” भारत की नीति-निर्माण प्रक्रिया में एक बड़े बदलाव का संकेत है। उन्होंने कहा कि अब सरकार केवल इलाज तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि रोकथाम, समय पर पहचान और निरंतर देखभाल पर जोर दे रही है।

उन्होंने कहा कि लंबे समय तक कृषि और स्वास्थ्य संस्थान अलग-अलग दिशा में काम करते रहे, लेकिन अब ICAR और ICMR का साथ आना विज्ञान-आधारित समाधान की नई शुरुआत है। उनके मुताबिक यह मिशन कुपोषण के साथ-साथ तेजी से बढ़ रही नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज जैसे डायबिटीज, हाइपरटेंशन और कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।
स्वदेशी और वैज्ञानिक समाधान पर फ़ोकस
नड्डा ने कहा कि भारत को अब अपने अनुभव, शोध और वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर स्वदेशी समाधान विकसित करने होंगे। उन्होंने लो-कॉस्ट और हाई-क्वालिटी हेल्थ मॉडल को देश के लिए सबसे उपयोगी बताया।

खेती, पोषण और स्वास्थ्य को जोड़ने की पहल
कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि “सेहत मिशन” भारत के लिए एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व पहल है, जो खेती, पोषण और स्वास्थ्य को एक साथ जोड़कर स्वस्थ भारत के निर्माण की दिशा तय करेगी। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा में स्वस्थ शरीर को सबसे बड़ा सुख माना गया है और अच्छा स्वास्थ्य सही भोजन से आता है। शिवराज ने कहा कि अब देश को केवल अधिक उत्पादन नहीं, बल्कि ऐसा उत्पादन चाहिए जो पोषण दे, रोगों से बचाए और लोगों को बेहतर जीवन प्रदान करे।
“हितभुक, मितभुक और ऋतुभुक” का संदेश
उन्होंने “हितभुक, मितभुक और ऋतुभुक” के भारतीय जीवन-दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि शरीर के लिए हितकारी, संतुलित और मौसम के अनुसार भोजन ही वास्तविक स्वास्थ्य का आधार है।
“क्या उगाएं” पर भी गंभीरता से काम जरूरी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि “क्या खाएं” के साथ-साथ “क्या उगाएं” पर भी गंभीरता से काम किया जाए। इसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए ICAR और ICMR ने मिलकर “सेहत मिशन” शुरू किया है, जो खेती से थाली और थाली से स्वास्थ्य तक एक वैज्ञानिक कड़ी तैयार करेगा।
बायो-फोर्टिफाइड फसलों और पोषणयुक्त आहार पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मिशन का फ़ोकस बायो-फोर्टिफाइड फसलों, पोषणयुक्त खाद्य पदार्थों, एकीकृत कृषि प्रणाली, किसानों के स्वास्थ्य-सुरक्षा उपायों और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के लिए उपयुक्त आहार पर रहेगा।
शिवराज सिंह ने जिंक, आयरन और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने की बात कही। इसके साथ ही उन्होंने कोदो, कुटकी, ज्वार, रागी और बाजरा जैसे पारंपरिक अनाजों को भविष्य के स्वास्थ्य सुरक्षा मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

एकीकृत खेती से पोषण और आय दोनों मज़बूत
शिवराज सिंह ने कहा कि एकीकृत खेती केवल किसानों की आय बढ़ाने का साधन नहीं, बल्कि परिवार के पोषण को मजबूत करने का भी रास्ता है। अनाज के साथ फल, सब्जियां, पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियां ग्रामीण परिवारों को संतुलित भोजन और बेहतर स्वास्थ्य से जोड़ सकती हैं।
किसानों की स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी ध्यान
केंद्रीय मंत्री ने किसानों और खेतिहर मजदूरों के स्वास्थ्य को भी मिशन का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि कीटनाशकों और रसायनों के असंतुलित उपयोग से होने वाले खतरों को कम करने के लिए वैज्ञानिक उपाय और सुरक्षित खेती पद्धतियां बेहद जरूरी हैं।
क्या है “सेहत मिशन”?
“सेहत” यानी Science Excellence for Health through Agricultural Transformation ICAR और ICMR का संयुक्त राष्ट्रीय मिशन है। इसका उद्देश्य खेती को बेहतर पोषण, रोग-निवारण, किसान कल्याण और विज्ञान-आधारित नीति-निर्माण से जोड़ना है।
मिशन का लक्ष्य
मिशन के जरिए पोषण गुणवत्ता में सुधार, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को कम करने, गैर-संचारी रोगों की रोकथाम, किसान स्वास्थ्य-सुरक्षा और टिकाऊ खाद्य प्रणाली को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल आने वाले समय में भारत के स्वास्थ्य और कृषि मॉडल को नई दिशा दे सकती है।
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