मटर का सीज़न तो सर्दियों में होता है, लेकिन पूरे साल मार्केट में फ्रोज़न मटर मिलता है। क्या आप जानते हैं कि मटर की कौन सी वैरायटी फ्रोज़न मटर के लिए इस्तेमाल होती है? उत्तराखंड के नैनीताल जिले के धर्मपुर गांव के किसान अल्ताफ हुसैन लगभग 100 बीघा क्षेत्र में मटर की उन्नत खेती कर रहे हैं। जिसमें वो बड़े पैमाने पर उन किस्मों को उगा रहे हैं जिनका इस्तेमाल फ्रोजन मटर के लिए किया जाता है। अल्ताफ अपनी ज़मीन के साथ-साथ लीज़ पर ज़मीन लेकर भी मटर का उत्पादन कर रहे हैं। अच्छी पैदावार के लिए उन्न्त किस्म के बीजों के साथ ही वो स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति का इस्तेमाल करते हैं। कैसे करते हैं वो मटर की खेती और कौन सी है मटर की उन्नत किस्में इस बारे में किसान ऑफ इंडिया के संवाददाता सर्वेश बुंदेली ने बात की अल्ताफ हुसैन से।
मटर की बुवाई का सही समय?
अल्ताफ बताते हैं मटर की बुवाई अगर अक्टूबर के पहले हफ्ते में की जाती है तो फसल 50 दिनों में ही तैयार हो जाती है। लेकिन अक्टूबर मध्य या नवंबर में अगर बुवाई की जाती है तो फसल को तैयार होने में 80 से 90 दिन का समय लगता है। उदय काशी, P3, अर्किल जैसी किस्मों की बुवाई अक्टूबर के पहले हफ्ते में की जाती है। अल्ताफ बहुत सालों से मटर की खेती कर रहे हैं और इस साल उन्होंने बहुत बड़े पैमाने पर मटर लगाया है।

कैसे करते हैं बुवाई?
अल्ताफ का कहना है कि अच्छी जुताई के बाद पलेवा करके ही मटर की बुवाई करनी चाहिए। वो सीड ड्रिल मशीन से बुवाई करते हैं और एक एकड़ में लगभग 85 से 90 किलोग्राम बीज डालते हैं। जिससे 35 से 40 क्विंटल मटर का उत्पादन होता है।
स्प्रिंकलर से सिंचाई
अल्ताफ खेत में सिंचाई के लिए खुले पानी की बजाय स्प्रिंकलर तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए उन्होंने 20 फुट के दो पाइप को जोड़कर फव्वारा लगाया हुआ है ताकि एक साथ बड़े एरिया में सिंचाई हो सके। उनका कहना है कि इस तकनीक से पानी की बचत तो होती ही है, साथ ही मटर की फसल को पर्याप्त पानी मिलता है जिससे उत्पादन अच्छा होता है।

रोग व कीट
जहां तक मटर में लगने वाले रोग और कीट का सवाल है तो मटर की फसल को सबसे ज़्यादा खतरा माहू कीट का होता है। इससे बचाव के लिए वो कीटनाशक का स्प्रे करते हैं। अल्ताफ बताते हैं कि खेत में खाद का इस्तेमाल सिर्फ़ एक बार ही करते हैं।
फ्रोज़न प्लांट को बेचते हैं मटर
अल्ताफ बताते हैं कि मंडी के साथ ही वो उनके इलाके में लगे फ्रोजन प्लांट को भी वो बड़ी मात्रा में मटर की सप्लाई करते हैं। इसके लिए मटर की उदय काशी, N7, P3, PSM3, G10 किस्में अच्छी होती है। जहां तक मुनाफे़ का सवाल है तो वो कहते हैं कि कभी अच्छी कीमत मिल जाती है, तो कभी मौसम की विपरीत परिस्थितियों की वजह से उन्हें नुकसान भी उठाना पड़ता है। हालांकि वो मानते हैं कि समय पर बुवाई, सिंचाई की उचित व्यवस्था और उन्नत किस्म के बीजों के चुनाव से मटर की खेती से अच्छा मुनाफ़ा कमाया जा सकता है।
इसे भी पढ़िए: फ्रूट होराइजन 2026 में शिवराज सिंह चौहान ने फल निर्यात बढ़ाने पर दिया ज़ोर
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

