प्राकृतिक खेती अपनाकर ओम प्रकाश ने एग्रो टूरिज्म का सफल मॉडल तैयार किया

प्राकृतिक खेती अपनाकर ओम प्रकाश ने एग्रो टूरिज्म से खेती को जोड़ा और किसानों के लिए नया मॉडल तैयार किया।

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में अब खेती केवल फ़सल उगाने तक सीमित नहीं रही। यहां कई किसान खेती को नए तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं। इन्हीं किसानों में एक नाम है ओम प्रकाश का, जिन्होंने प्राकृतिक खेती और एग्रो टूरिज्म को जोड़कर एक अनोखा मॉडल तैयार किया है।

सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने गांव लौटकर खेती को अपनाया और आज वे अपने सफल मॉडल से दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।

सेना से लौटकर खेती की ओर बढ़े कदम

ओम प्रकाश बताते हैं कि सेना में सेवा के दौरान उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने का मौका मिला। इसी दौरान उन्होंने दक्षिण भारत के राज्यों में बढ़ते एग्रो टूरिज्म मॉडल को क़रीब से देखा।

सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सोचा कि क्यों न अपने गांव में भी खेती और पर्यटन को एक साथ जोड़ा जाए। इसी सोच ने उन्हें प्राकृतिक खेती की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

प्रशिक्षण से मिली नई दिशा

साल 2019 में ओम प्रकाश ने प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लिया। इस प्रशिक्षण में उन्हें प्राकृतिक इनपुट्स तैयार करने और खेती में उनके उपयोग की व्यवहारिक जानकारी मिली। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अपने खेत में प्रयोग शुरू किए और धीरे-धीरे पूरी खेती को इसी पद्धति में बदल दिया।

प्राकृतिक खेती अपनाकर ओम प्रकाश ने एग्रो टूरिज्म का सफल मॉडल तैयार किया

राजमाह और मक्की में मिले शानदार परिणाम

ओम प्रकाश बताते हैं कि प्राकृतिक खेती का सबसे अच्छा असर उन्हें राजमाह और मक्की की फ़सल में देखने को मिला। फ़सल की गुणवत्ता और आकार पहले से काफी बेहतर हो गया। 

उनकी खेती देखकर पड़ोसी और रिश्तेदार भी प्रभावित होने लगे। धीरे-धीरे आसपास के किसान भी इस पद्धति के बारे में जानने लगे।

3 बीघा में तैयार किया विविध खेती मॉडल

आज ओम प्रकाश लगभग 3 बीघा ज़मीन में प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उनके खेत में सेब, जापानी फल, अनार, मटर, राजमाह, गेंदा, मक्की और कोदा जैसी फ़सलें उगाई जा रही हैं।

विविध फ़सलों के कारण उनकी आय के कई स्रोत बने हैं और खेत की जैविक संतुलन भी बेहतर बना हुआ है।

कोरोना काल में भी बनी रही मांग

कोरोना महामारी के दौरान जहां कई किसानों को बाज़ार की दिक्कतों का सामना करना पड़ा, वहीं ओम प्रकाश की प्राकृतिक खेती से तैयार मक्की की काफी मांग रही। दूर-दूर से लोग उनकी फ़सल खरीदने पहुंचे।

इससे उन्हें यह भरोसा मिला कि लोग अब रसायनमुक्त और स्वस्थ उत्पादों की ओर तेज़ी से बढ़ रहे हैं।

रोगों पर भी मिला बेहतर नियंत्रण

पिछले साल क्षेत्र के कई बागानों में अचानक पत्तझड़ रोग देखने को मिला। लेकिन ओम प्रकाश के बागान में प्राकृतिक खेती के इनपुट्स के कारण इसका असर काफी कम रहा। इस अनुभव ने उनका भरोसा और मज़बूत कर दिया कि यह खेती पद्धति फ़सलों को मज़बूत बनाने में मदद करती है।

एग्रो टूरिज्म से बढ़ रही नई पहचान

ओम प्रकाश अब अपने खेत को एग्रो टूरिज्म से भी जोड़ चुके हैं। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक उनके खेतों में पहुंचते हैं और गांव की जीवन शैली को क़रीब से देखते हैं।

वे पर्यटकों को प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी देते हैं और बताते हैं कि बिना रसायनों के भी अच्छी खेती की जा सकती है। उनका मानना है कि हिमाचल जैसे पर्यटन क्षेत्र में एग्रो टूरिज्म किसानों की आय बढ़ाने का मज़बूत ज़रिया बन सकता है।

प्राकृतिक खेती अपनाकर ओम प्रकाश ने एग्रो टूरिज्म का सफल मॉडल तैयार किया

किचन गार्डन मॉडल से बढ़ा प्रचार

ओम प्रकाश कहते हैं कि प्राकृतिक खेती को गांव-गांव तक पहुंचाने में किचन गार्डन मॉडल बहुत मददगार साबित हो रहा है। उनके गांव की महिलाएं घरों में किचन गार्डन तैयार कर रही हैं और अच्छे परिणाम मिलने के बाद खेतों में भी इस पद्धति को अपना रही हैं।

इससे गांव में धीरे-धीरे रसायनमुक्त खेती की सोच मज़बूत हो रही है।

दूसरे किसानों की भी कर रहे मदद

ओम प्रकाश केवल खुद तक सीमित नहीं हैं। वे नए किसानों को देसी गाय के गोबर और गौमूत्र के साथ अन्य प्राकृतिक इनपुट्स भी मुफ़्त में उपलब्ध करवाते हैं। उनका मानना है कि अगर किसान शुरुआत में सही सहयोग पा जाए, तो वह आसानी से प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ सकता है।

गौ सेवा को भी बनाया जीवन का हिस्सा

ओम प्रकाश खेती के साथ गौ सेवा का काम भी कर रहे हैं। उन्होंने रास्ते पर मिली एक लावारिस गाय को अपने पास रखा है, जिसकी एक टांग नहीं है। हालांकि वह गाय दूध नहीं देती, लेकिन ओम प्रकाश उसकी पूरी देखभाल करते हैं।

वे कहते हैं कि गाय केवल दूध देने के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं होती। उससे मिलने वाला गोबर और गौमूत्र प्राकृतिक खेती के लिए बेहद उपयोगी है और यही चीज उनकी खेती की ताकत भी बन चुकी है।

खेती और पर्यटन का मिल रहा नया रास्ता

ओम प्रकाश का मानना है कि खेती को अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहिए। अगर किसान एग्रो टूरिज्म को खेती से जोड़ें, तो गांवों में रोज़गार और आय दोनों बढ़ सकते हैं।

वे कहते हैं कि लोग आज गांवों की सादगी, शुद्ध भोजन और प्रकृति के क़रीब रहने का अनुभव लेना चाहते हैं। ऐसे में प्राकृतिक खेती और एग्रो टूरिज्म मिलकर किसानों के लिए नई संभावनाएं तैयार कर सकते हैं।

एक किसान की सोच से आ रहा बदलाव

ओम प्रकाश की कहानी यह दिखाती है कि खेती में बदलाव केवल नई तकनीक से नहीं, बल्कि नई सोच से आता है। उन्होंने प्राकृतिक खेती को अपनाकर खेती की लागत कम की और एग्रो टूरिज्म के जरिए आय का नया रास्ता भी बनाया।

आज उनका खेत केवल फ़सल उत्पादन की जगह नहीं, बल्कि सीखने और प्रेरणा का केंद्र बन चुका है, जहां से कई किसान नई दिशा लेकर लौट रहे हैं।

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