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उत्तर प्रदेश के बलरामपुर ज़िले की मिट्टी से जुड़े किसान राम प्रकाश पांडे ने खेती को केवल आजीविका नहीं, बल्कि एक आंदोलन का रूप दिया है। किसानों को संगठित करने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की उनकी सोच ने उन्हें हज़ारों किसानों के लिए प्रेरणा बना दिया है। खेती के क्षेत्र में क़रीब 20 वर्षों के अनुभव के दौरान राम प्रकाश जी ने यह समझा कि अकेला किसान बाज़ार में कमज़ोर होता है, लेकिन जब किसान संगठित होते हैं तो उनकी सामूहिक शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। इसी विचार ने आगे चलकर एक सशक्त किसान संगठन, यानी FPO (Farmer Producer Organization), की नींव रखी। आइए जानते हैं उनकी पूरी जर्नी।
बलरामपुर से FPO की शुरुआत
राम प्रकाश पांडे उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र के बलरामपुर ज़िले से आते हैं। वर्ष 2018 में लखनऊ में आयोजित एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम ने उनके जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया। इस प्रशिक्षण के दौरान जैव ऊर्जा विकास बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी पी. एस. ओझा जी ने किसानों को FPO (Farmer Producer Organization) के महत्व और उसकी स्थापना के लिए प्रेरित किया।
देश के लगभग 75 जिलों से आए किसानों के साथ हुए इस प्रशिक्षण ने राम प्रकाश जी की सोच को नई दिशा दी। निरंतर मार्गदर्शन और आवश्यक जानकारियां प्राप्त करते हुए उन्होंने वर्ष 2020 में सावित्री देवी जैव ऊर्जा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की स्थापना की, जो आज किसानों के सशक्तिकरण की दिशा में एक मज़बूत कदम है।
2000 से ज़्यादा किसानों का मज़बूत संगठन
आज इस FPO से 2000 से अधिक किसान जुड़े हुए हैं। खास बात यह है कि इनमें क़रीब 50 प्रतिशत महिलाएं किसान हैं, जो खेती और फैसलों में बराबर की भागीदारी निभा रही हैं। FPO के अंतर्गत किसान अलग-अलग फ़सलों का उत्पादन करते हैं। सभी किसानों को क्लस्टर में बांटा गया है, ताकि तकनीक, जानकारी और बाज़ार तक पहुंच आसान हो सके। इस संगठन का मुख्य फोकस प्राकृतिक खेती और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना है।
प्राकृतिक खेती को क्यों दी प्राथमिकता?
राम प्रकाश जी मानते हैं कि आज खेती में बढ़ती लागत और रसायनों के दुष्प्रभाव किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं। इसी वजह से FPO के माध्यम से प्राकृतिक खेती को प्राथमिकता दी गई। वर्तमान में FPO से जुड़े 600 से ज़्यादा किसान प्राकृतिक खेती और जैविक खेती कर रहे हैं। इनमें से 633 किसान सरकार की प्राकृतिक खेती योजना में रजिस्टर्ड हैं और उन्हें प्रमाण पत्र भी मिला है।
जैविक खेती और प्राकृतिक खेती में फ़र्क़
राम प्रकाश जी साफ़ तौर पर बताते हैं कि जैविक खेती और प्राकृतिक खेती को अक्सर एक जैसा समझ लिया जाता है, जबकि दोनों में बड़ा अंतर है। जैविक खेती में जहां बड़ी मात्रा में गोबर खाद और अन्य इनपुट्स की आवश्यकता होती है, जिससे लागत काफी बढ़ जाती है, वहीं प्राकृतिक खेती बहुत कम संसाधनों में संभव होती है। इसी कारण प्राकृतिक खेती छोटे और सीमांत किसानों के लिए अधिक व्यवहारिक और लाभकारी विकल्प के रूप में उभर रही है।
प्राकृतिक खेती की आसान विधि
प्राकृतिक खेती शुरू करने के लिए राम प्रकाश जी बहुत सरल तरीक़ा बताते हैं।
एक 200 लीटर के ड्रम में क़रीब 180 लीटर पानी लें। उसमें
- 10 किलो गोमूत्र
- 10 किलो ताजा गोबर
- 1 से 1.5 किलो गुड़
- 1 से 1.5 किलो बेसन
डालकर घड़ी की उल्टी दिशा में घोल तैयार किया जाता है। इसे 5–7 दिन में तैयार कर लिया जाता है और एक फ़सल में 3–4 बार छिड़काव किया जाता है।
इस विधि से फ़सल की ग्रोथ अच्छी होती है, मिट्टी जीवित रहती है और लागत बेहद कम आती है। यही कारण है कि प्राकृतिक खेती को “शून्य बजट खेती” भी कहा जाता है।
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा
राम प्रकाश पांडे पिछले कई वर्षों से पूरी तरह प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। उनका अनुभव है कि इस खेती में
- लागत बहुत कम होती है
- पैदावार बेहतर होती है
- मुनाफ़ा बढ़ता है
- मिट्टी और पर्यावरण सुरक्षित रहते हैं
इसी वजह से FPO ने तय किया है कि आगे भी प्राकृतिक खेती ही उसकी मुख्य पहचान रहेगी।
FPO कैसे किसानों को देता है फ़ायदा?
FPO एक कंपनी की तरह काम करता है, लेकिन इसका मकसद मुनाफ़ा नहीं बल्कि किसानों का फ़ायदा है। बीज, खाद या अन्य इनपुट्स थोक में खरीदे जाते हैं, जिससे किसानों को कम क़ीमत पर सामग्री मिलती है। सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि किसान सीधे बाज़ार से जुड़ते हैं और बिचौलियों से बच जाते हैं। इससे उन्हें अपनी उपज का बेहतर दाम मिलता है।
सम्मान और पहचान की उपलब्धियां
राम प्रकाश पांडे और उनकी FPO को कई बड़े मंचों पर सम्मान मिला है। प्रसार भारती दूरदर्शन, लखनऊ द्वारा उन्हें कृषि दर्शन कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया, जहां FPO और किसान हितों पर चर्चा हुई। इसके अलावा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा, नई दिल्ली द्वारा उन्हें जनपद का प्रथम पुरस्कार भी प्रदान किया गया। कई केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौज़ूदगी में यह सम्मान मिला।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय पुष्प कृषि एवं सुगंध उद्योग सम्मेलन में देश भर से केवल दो FPO को आमंत्रित किया गया, जिनमें सावित्री देवी जैव ऊर्जा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी भी शामिल थी। इस सम्मेलन में कमल पुष्प की खेती पर चर्चा हुई और बलरामपुर ज़िले को इसके लिए चुना गया। यह FPO के लिए बड़ी उपलब्धि रही।
किसानों के लिए उनका संदेश
राम प्रकाश पांडे का साफ़ संदेश है कि यदि किसान संगठित होकर समूह में काम करें, प्राकृतिक खेती को अपनाएं और बाज़ार से सीधे जुड़ें, तो खेती को एक बार फिर लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। उनका दृढ़ विश्वास है कि खेती का भविष्य रासायनिक निर्भरता में नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलन और सामंजस्य बनाए रखने में निहित है।
निष्कर्ष
बलरामपुर के किसान से लेकर हज़ारों किसानों के संगठन तक का सफ़र तय करने वाले राम प्रकाश पांडे यह साबित करते हैं कि सही सोच, सही मार्गदर्शन और प्राकृतिक खेती के ज़रिए खेती को नई दिशा दी जा सकती है। आज उनकी FPO न सिर्फ़ किसानों की आमदनी बढ़ा रही है, बल्कि मिट्टी, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों को भी सुरक्षित कर रही है।
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