Lohri, Pongal, Bihu, Makar Sankranti: जानिए कैसे भारत में कृषि और त्योहार का है अनूठा रिश्ता!

लोहड़ी, बसंत, पोंगल या बिहू (Lohri, Basant, Pongal or Bihu), ये सिर्फ मनाने के लिए नहीं, बल्कि धरती मां और अन्नदाता को शुक्रिया कहने का दिन होता है। 

Lohri, Pongal, Bihu, Makar Sankranti: जानिए कैसे भारत में कृषि और त्योहार का है अनूठा रिश्ता!

भारत की मिट्टी सिर्फ फसलों से ही नहीं, बल्कि उत्सवों की सुगंध (Indian Festivals) से भी महकती है। यहां हर पर्व, हर त्योहार गहराई से खेती-किसानी और ऋतुचक्र से जुड़ा हुआ है। लोहड़ी, बसंत, पोंगल या बिहू (Lohri, Basant, Pongal or Bihu), ये सिर्फ मनाने के लिए नहीं, बल्कि धरती मां और अन्नदाता को शुक्रिया कहने का दिन होता है। 

उत्तर भारत में : लोहड़ी और मकर संक्रांति

पंजाब की धरती पर लोहड़ी (Lohri in Punjab) सर्दियों की फसल (रबी) की कटाई का प्रतीक है। ये त्योहार तिल, गुड़, मूंगफली और रेवड़ियों (Sesame seeds, jaggery, peanuts, and revadi (a type of sweet) के बिना पूरा नहीं होता। ये सभी चीज़ें सर्दियों की फसलों से ही मिलती हैं। आग के चारों ओर नाचना सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि ठंड से फसलों की रक्षा और नई ऊर्जा का संकेत भी है। लोहड़ी के ठीक बाद मकर संक्रांति पूरे उत्तर भारत में मनाई जाती है, जो सूरज के उत्तरायण होने और नई फसल के आगमन का प्रतीक है।

दक्षिण में: पोंगल

तमिलनाडु का पोंगल (Pongal of Tamil Nadu) चार दिनों तक चलने वाला एक कृषि उत्सव है। पहले दिन भोगी में पुराने सामान जलाकर, दूसरे दिन सूर्य पोंगल में नई चावल की फसल को दूध में उबालकर सूर्य देवता को धन्यवाद दिया जाता है। तीसरा दिन मट्टू पोंगल पशुओं के सम्मान का है, जो किसान की सबसे बड़ी ताकत हैं। यह त्योहार फसल चक्र और प्रकृति के साथ सामंजस्य का शानदार उदाहरण है।

Lohri, Pongal, Bihu, Makar Sankranti: जानिए कैसे भारत में कृषि और त्योहार का है अनूठा रिश्ता!

पूर्व में: बिहू और नुआखाई

असम में बिहू (Bihu in Assam) तीन रूपों में आता है। बोहाग बिहू (अप्रैल) बुआई का पर्व है, काटी बिहू (अक्टूबर) फसल कटाई का, और माघ बिहू (जनवरी) स्टोरेज का। यहां के डांस और गाने धान की खेती के हर चरण को दिखाते हैं। ओडिशा में नुईखाई पर्व नई धान चखने का त्योहार है, जहां पहली फसल सबसे पहले भूमि और इष्टदेव को अर्पित की जाती है।

पश्चिम में: मकर संक्रांति और विशु

गुजरात में मकर संक्रांति (Makar Sankranti in Gujarat) उत्तरायण के रूप में पतंग उड़ाने और तिल के लड्डू बांटने का त्योहार है। केरल में विशु (अप्रैल) नए साल और वसंत फसल के आगमन का निशान है। विशुकणी-एक तैयार की गई सजावट में धान, फल, सब्ज़ियां और कुमकुम रखा जाता है, जो समृद्धि और अच्छी फसल की कामना करता है।

मध्य भारत: हरेली और नवान्न

छत्तीसगढ़ (Hareli festival in Chhattisgarh), जिसे ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है, में हरेली त्योहार बुआई के मौसम की शुरुआत में मनाया जाता है। इस दिन किसान अपने हल, बैल और औज़ारों की पूजा करते हैं। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में नवान्न (नया अन्न) का त्योहार मनाया जाता है, जहां नई फसल के अन्न से बना भोजन प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।

 भारतीय सभ्यता की जड़ें खेतों में

ये सभी त्योहार दिखाते हैं कि भारतीय सभ्यता की जड़ें खेतों में हैं। ये केवल रीति-रिवाज नहीं, बल्कि पर्यावरणीय ज्ञान, खगोल विज्ञान और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक भी हैं। आज जब कृषि संकटों से जूझ रही है, तो ये त्योहार हमें प्रकृति के साथ सहअस्तित्व, संरक्षण का पाठ पढ़ाते हैं।  

 

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