ICAR की डेवलप 25 फसलों की 184 नई उन्नत किस्मों को भारत सरकार ने राष्ट्र को किया समर्पित, जानें विस्तार से

ICAR द्वारा विकसित 25 फसलों की 184 उन्नत किस्मों (184 advanced varieties) को देश को समर्पित किया। ये किस्में न सिर्फ अधिक उपज देंगी, बल्कि बदलती जलवायु के थपेड़ों को झेलने की क्षमता भी रखेंगी।

ICAR की डेवलप 25 फसलों की 184 नई उन्नत किस्मों को भारत सरकार ने राष्ट्र को किया समर्पित, जानें विस्तार से

देश के किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Union Minister of Agriculture and Farmers Welfare, Shivraj Singh Chouhan) ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research) यानि ICAR द्वारा विकसित 25 फसलों की 184 उन्नत किस्मों (184 advanced varieties) को देश को समर्पित किया। ये किस्में न सिर्फ अधिक उपज देंगी, बल्कि बदलती जलवायु के थपेड़ों को झेलने की क्षमता भी रखेंगी।

किसानों को मिलेगा दोहरा फायदा

इन नई किस्मों को विकसित करते समय वैज्ञानिकों ने दो बड़ी चुनौतियों पर ध्यान दिया है। पहला, जलवायु परिवर्तन (Climate change) और दूसरा, पोषण की कमी (Nutritional deficiencies)। इनमें ऐसी किस्में शामिल हैं जो सूखा, बाढ़ और मिट्टी में बढ़ती लवणता को भी सहन कर सकती हैं। साथ ही, इनमें पोषण का स्तर भी ज्यादा है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है और देश के लोगों को सेहतमंद अनाज।

ICAR की डेवलप 25 फसलों की 184 नई उन्नत किस्मों को भारत सरकार ने राष्ट्र को किया समर्पित, जानें विस्तार से

मोदी काल में तेज हुई रफ्तार: कृषि मंत्री 

केंद्रीय मंत्री चौहान ने एक दिलचस्प facts शेयर किया। देश में बीजों की Gazette notification process 1969 में शुरू हुई। 1969 से 2014 तक के 45 सालों में कुल 3969 फसल प्रजातियों को मंजूरी मिली। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले पिछले 11-12 सालों में ही 3236 नई प्रजातियों को मंजूरी मिल चुकी है। यानी, पिछले एक दशक में बीज विकास की रफ्तार लगभग दोगुनी हो गई है।

तीन साल में खेत तक पहुंचेंगे बीज

सरकार ने इन 184 नई किस्मों को अगले तीन सालों के भीतर देश के किसानों के खेत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। यह ‘लैब से लैंड’ (‘From lab to land’) का सफर का एक सफल मॉडल है। इन किस्मों के विकास में ICAR की संस्थाओं, राज्य व केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयों और निजी बीज कंपनियों ने मिलकर काम किया है।

कौन-सी फसलों की कितनी किस्में?

इस बार जारी किस्मों में अनाज की फसलों पर सबसे ज्यादा फोकस है:

धान: 60 नई किस्में

मक्का: 50 नई किस्में

ज्वार, बाजरा, रागी समेत अन्य मोटे अनाजों की कई किस्में

इसके अलावा-

  • दलहन (अरहर, मूंग, उड़द): 6 किस्में (प्रोटीन सुरक्षा के लिए)
  • तिलहन (सरसों, मूंगफली आदि): 13 किस्में
  • कपास: 24 किस्में (इनमें से 22 बीटी कपास हैं)
  • गन्ना: 6 किस्में
  • चारा फसलें: 11 किस्में (पशुपालक किसानों के लिए खुशखबरी)

भारत बना ‘अन्नदाता’ देश

शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने कहा कि भारत अब सिर्फ खाद्य सुरक्षा ही हासिल नहीं कर चुका, बल्कि दुनिया को अनाज देने वाला ‘अन्नदाता’ देश बन गया है। उन्होंने बताया कि चावल उत्पादन में भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया है और 150 मिलियन टन से ज्यादा का उत्पादन कर नया रिकॉर्ड बनाया है। अब देश का लक्ष्य सिर्फ अन्न उत्पादन नहीं, बल्कि पोषण से भरपूर अन्न का उत्पादन करना है।

कृषि बनेगी ‘विकसित भारत’ की नींव

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण में कृषि क्षेत्र की अहम भूमिका है। उन्होंने नई योजनाओं जैसे ‘विकसित भारत जी-राम-जी’ के साथ कृषि योजनाओं का समन्वय बढ़ाने, जल संरक्षण, कृषि वानिकी और पशुपालन (Water conservation, agroforestry and animal husbandry) को बढ़ावा देने की बात कही। दलहन और तिलहन के उत्पादन को बढ़ाने और उनकी प्रोसेसिंग पर भी जोर दिया गया।


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