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नई दिल्ली में आयोजित भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच (India-Japan Joint Economic Forum) ने दोनों देशों की विशेष रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई दी है। प्रधानमंत्री मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची (PM Modi and Japan’s Prime Minister Sanae Takaichi) की मौजूदगी में भारत-जापान सहकारी सीबीजी पहल (India–Japan Cooperative Biogas for Growth Initiative) का शुभारंभ हुआ, जो क्लीन एनर्जी और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगी।
क्या है ये पहल?
इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत भारत में 1,000 सीबीजी (Compressed Biogas) और जैविक खाद संयंत्र (Organic fertilizer plant) स्थापित किए जाएंगे। ये परियोजना डेयरी सहकारी समितियों के विशाल नेटवर्क का लाभ उठाएगी, जहां गोबर और कृषि अपशिष्ट (Cow dung and agricultural waste) को ऊर्जा और खाद में बदला जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस पहल से गोबर्धन योजना को और मजबूती मिलेगी और भारत के गांवों में स्थिरता, समृद्धि और आजीविका को नई ताकत मिलेगी।
क्यों है ये क्रांतिकारी?
गोबर अब कचरा नहीं, संपत्ति है। यही इस पहल का मूल मंत्र है। जापानी प्रधानमंत्री ताकाइची ने भारत के Vast biomass resources पर प्रकाश डाला और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का सहकारी संस्थाओं के ज़रीये से ग्रामीण संसाधनों को स्वच्छ ऊर्जा में बदलने की पहुंच और ग्रामीण विकास और ऊर्जा सुरक्षा का भविष्य खोल सकता है।
गौरतलब है कि ग्वालियर की लालटीपारा गौशाला में स्थापित देश का पहला आधुनिक सीबीजी संयंत्र इस दिशा में एक उदाहरण है। यहां 100 टन गोबर से प्रतिदिन 2 टन बायो-सीएनजी और 10-15 टन जैविक खाद का उत्पादन होता है।
गहन शोध और संभावनाएं
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने बताया कि डेयरी सहकारी समितियों को बायोगैस अर्थव्यवस्था के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। NDDB पहले ही 15 राज्यों में 26 से अधिक दुग्ध संघों के साथ समझौता कर चुका है, जिससे 10,000 बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जाएंगे।
सरकार का लक्ष्य 2030 तक 5,000 सीबीजी संयंत्र स्थापित करना है, जिससे 15 मिलियन टन सीबीजी का वार्षिक उत्पादन होगा। वर्तमान में देशभर में 122 सीबीजी संयंत्र काम कर रहे हैं।
आर्थिक और पर्यावरणीय फायदे
ये पहल न सिर्फ पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने का भी ज़रिया है। सरकार सीबीजी उत्पादकों को 564.75 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। इससे 2.5 मिलियन सीएनजी वाहनों के लिए ईंधन उपलब्ध होगा।
एक स्वच्छ और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ओर
NDDB इस पहल को क्रियान्वित करने के लिए प्रतिबद्ध है। डेयरी सहकारी समितियों की ताकत का उपयोग करके गोबर और कृषि बायोमास को स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खाद और डेयरी किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसरों में बदला जाएगा। गुजरात में मुजकुवा गांव की महिला-नेतृत्व वाली खाद सहकारी समिति इसका जीवंत उदाहरण है, जहां गोबर से बायोगैस और उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद बनाई जा रही है।
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