Natural Farming: रोशन लाल ने प्राकृतिक खेती से दिखाया गांव में भी है बेहतर भविष्य

प्राकृतिक खेती अपनाकर रोशन लाल ने खेती का ख़र्च घटाया, अच्छी फ़सल ली और गांव के युवाओं के लिए नई मिसाल बने।

आज भी बहुत से युवा बेहतर नौकरी की तलाश में गांव छोड़कर बड़े शहरों का रुख़ करते हैं। लेकिन कुल्लू जिले के नगर पंचायत के किसान रोशन लाल ने इसके उलट रास्ता चुना। कई साल तक दूसरे राज्यों में निजी कंपनियों में काम करने के बाद उन्होंने गांव लौटकर खेती को ही अपना भविष्य बनाया। आज वे प्राकृतिक खेती के जरिए अच्छी कमाई कर रहे हैं और आसपास के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।

नौकरी छोड़ने का फैसला आसान नहीं था

रोशन लाल कई साल तक निजी कंपनियों में नौकरी करते रहे। लेकिन उन्हें हमेशा लगता था कि अगर खेती को सही तरीके से किया जाए तो गांव में रहकर भी अच्छी आय कमाई जा सकती है।

उन्होंने खेती की बढ़ती लागत और रसायनों पर बढ़ती निर्भरता को क़रीब से देखा था। इसी वजह से उन्होंने ऐसा तरीक़ा अपनाने का फैसला किया, जिसमें ख़र्च कम हो और फ़सल की गुणवत्ता भी बेहतर रहे। इसी तलाश ने उन्हें प्राकृतिक खेती तक पहुंचाया।

प्रशिक्षण के बाद बदली सोच

साल 2018 में रोशन लाल ने कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में आयोजित सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लिया। छह दिन के इस प्रशिक्षण में उन्होंने प्राकृतिक इनपुट तैयार करने और उनके सही उपयोग की जानकारी हासिल की।

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्होंने घर लौटते ही अपनी 7 बीघा ज़मीन में से 3 बीघा पर प्राकृतिक खेती शुरू कर दी। शुरुआत छोटे स्तर से की, ताकि पहले खुद परिणाम देख सकें।

Natural Farming: रोशन लाल ने प्राकृतिक खेती से दिखाया गांव में भी है बेहतर भविष्य

सेब और सब्जियों में मिला अच्छा फ़ायदा

रोशन लाल ने अपने खेत में सेब के साथ-साथ गोभी, मूली, सरसों, गेहूं और दूसरी फ़सलें भी प्राकृतिक खेती से उगानी शुरू कीं।

उन्होंने जीवामृत, घनजीवामृत, खट्टी लस्सी, सप्तधान्यांकुर अर्क और सौंठ अर्क जैसे प्राकृतिक इनपुट का इस्तेमाल किया। उनका कहना है कि इससे फ़सलों की बढ़वार अच्छी हुई और उत्पादन की गुणवत्ता भी पहले से बेहतर हुई।

मिट्टी और पौधों में दिखा बदलाव

रोशन लाल बताते हैं कि प्राकृतिक खेती में आच्छादन करने के बाद खेत की मिट्टी में केंचुए साफ़ दिखाई देने लगे। मिट्टी पहले की तुलना में ज़्यादा भुरभुरी और जीवंत हो गई।

उनका मानना है कि स्वस्थ मिट्टी ही अच्छी फ़सल की सबसे बड़ी ताकत होती है। जब मिट्टी मज़बूत होती है तो पौधे भी बेहतर तरीके से बढ़ते हैं।

सेब बागवानी में भी मिला फ़ायदा

रोशन लाल के अनुसार सेब के बागानों में सप्तधान्यांकुर अर्क के उपयोग से फ्रूट सेटिंग बेहतर हुई। इससे सेब का आकार, रंग और चमक भी अच्छी रही।

वे दूसरे बागवानों को भी सलाह देते हैं कि अगर सही तरीके से प्राकृतिक खेती अपनाई जाए तो सेब की गुणवत्ता में अच्छा सुधार देखा जा सकता है।

ख़र्च हुआ कम, बचत बढ़ी

पहले रोशन लाल सेब के पौधों और दूसरी फ़सलों को सुरक्षित रखने के लिए हर साल क़रीब 25 हज़ार रुपये की दवाइयां और खाद खरीदते थे।

लेकिन प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद उन्होंने बाज़ार से रासायनिक खाद और दवाइयां खरीदना लगभग बंद कर दिया। अब वे खेत और घर में उपलब्ध संसाधनों से ही प्राकृतिक इनपुट तैयार करते हैं।

पहले उनकी खेती में लगभग 45 हज़ार रुपये ख़र्च होते थे। अब ये ख़र्च घटकर क़रीब 16 हज़ार रुपये रह गया है। लागत कम होने से खेती पहले की तुलना में ज़्यादा फ़ायदेमंद हो गई है।

युवाओं के लिए बने मिसाल

रोशन लाल का कहना है कि आज वे निजी कंपनी की नौकरी से ज़्यादा संतुष्ट खेती में हैं। उनका मानना है कि अगर युवा आधुनिक सोच के साथ प्राकृतिक खेती अपनाएं, तो उन्हें रोजगार के लिए गांव छोड़ने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

वे ख़ास तौर पर सेब बागवानी और एक्सोटिक सब्जियों की खेती को युवाओं के लिए बेहतर अवसर मानते हैं। उनका कहना है कि इन फ़सलों में अच्छी कमाई की संभावना है और प्राकृतिक खेती से इनकी लागत भी काफी कम हो जाती है।

Natural Farming: रोशन लाल ने प्राकृतिक खेती से दिखाया गांव में भी है बेहतर भविष्य

दूसरे किसान भी अपना रहे तरीक़ा

रोशन लाल की सफलता देखकर आसपास के कई किसान भी प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। लोग उनके खेत देखने आते हैं और उनसे प्राकृतिक इनपुट तैयार करने का तरीक़ा सीखते हैं।

उनका मानना है कि खेती में बदलाव तभी आएगा, जब किसान खुद अच्छे परिणाम देखकर इस पद्धति पर भरोसा करेंगे।

गांव में रहकर भी बन सकता है बेहतर भविष्य

रोशन लाल की कहानी ये बताती है कि खेती को अगर नई सोच और सही तकनीक के साथ किया जाए, तो ये केवल गुजारे का साधन नहीं बल्कि सम्मानजनक और लाभदायक पेशा बन सकती है।

उन्होंने ये साबित किया है कि प्राकृतिक खेती से खेती की लागत कम की जा सकती है, मिट्टी की सेहत सुधारी जा सकती है और अच्छी गुणवत्ता वाली फ़सल भी उगाई जा सकती है।

आज वे सिर्फ़ एक सफल किसान नहीं हैं, बल्कि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा हैं जो गांव में रहकर अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। उनकी सफलता ये भरोसा दिलाती है कि प्राकृतिक खेती आने वाले समय में खेती को और मज़बूत बनाने का एक प्रभावी रास्ता बन सकती है।

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