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कई लोग अच्छी नौकरी पाने का सपना देखते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपने मन की सुनते हैं और जीवन में अलग रास्ता चुनते हैं। हिमाचल प्रदेश के निरमंड विकास खंड के प्रेमपाल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद वे एक IT कंपनी में नौकरी कर रहे थे, लेकिन उनका मन हमेशा अपने गांव और खेतों में लगा रहता था। आखिरकार उन्होंने नौकरी छोड़कर खेती को अपनाया और आज प्राकृतिक खेती के ज़रिए एक सफल किसान और बागवान के रूप में पहचान बना चुके हैं।
नौकरी के साथ भी खेती से जुड़ा रहा मन
प्रेमपाल जब IT कंपनी में काम कर रहे थे, तब भी उनके मन में गांव लौटकर खेती करने का विचार बार-बार आता था। हालांकि परिवार की चिंताओं और जिम्मेदारियों को देखते हुए वे तुरंत ये फैसला नहीं ले सके।
छुट्टियों में जब भी वे गांव आते, खेतों में समय बिताते और खेती में कुछ नया करने की कोशिश करते। खेती के प्रति उनका लगाव लगातार बढ़ता गया और वे इस क्षेत्र में बेहतर संभावनाएं तलाशने लगे।
महाराष्ट्र में मिली नई सोच
नौकरी के दौरान प्रेमपाल को पहली बार प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी महाराष्ट्र में मिली। वहां उन्होंने देखा कि कई किसान देसी गाय आधारित खेती पद्धति अपनाकर अच्छे परिणाम ले रहे हैं।
जब वे घर लौटे तो उन्होंने भी देसी गाय के गोबर और गौमूत्र का उपयोग अपने खेतों में करना शुरू किया। शुरुआती प्रयोगों में उन्हें सकारात्मक परिणाम मिले। फ़सलों की स्थिति बेहतर दिखी और मिट्टी की सेहत में भी सुधार नजर आया। इन अनुभवों ने उन्हें खेती को गंभीरता से अपनाने के लिए प्रेरित किया।
प्रशिक्षण ने बढ़ाया आत्मविश्वास
साल 2019 में प्रेमपाल ने नौणी में आयोजित प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण में हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें इस खेती पद्धति के वैज्ञानिक पहलुओं और व्यवहारिक तरीकों को समझने का मौका मिला।
प्राकृतिक खेती के जनक पद्मश्री सुभाष पालेकर के विचारों से वे काफ़ी प्रभावित हुए। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्होंने तय कर लिया कि अब खेती को ही अपना भविष्य बनाएंगे। घर लौटकर उन्होंने 5 बीघा ज़मीन में प्राकृतिक खेती की शुरुआत की।
धान की खेती में मिला शानदार परिणाम
प्रेमपाल ने सबसे पहले अपने खेत में धान की फ़सल लगाई और उसमें जीवामृत का उपयोग किया। परिणाम उम्मीद से कहीं बेहतर रहे। उन्होंने बताया कि जहां पानी की कमी के कारण आसपास के किसानों को 5 बीघा क्षेत्र से लगभग 3 क्विंटल धान की पैदावार मिली, वहीं उन्हें उसी क्षेत्र से क़रीब 6 क्विंटल धान प्राप्त हुआ।
इस सफलता ने उनका विश्वास और मज़बूत कर दिया और उन्होंने दूसरी फ़सलों में भी प्राकृतिक खेती को अपनाना शुरू कर दिया।
सब्ज़ियों और बागवानी में भी मिला लाभ
आज प्रेमपाल प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उनके खेतों में शिमला मिर्च, खीरा, बीन्स, धान, मक्की, गेहूं और सेब जैसी फ़सलें उगाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती के ज़रिए उन्होंने 370 ग्राम तक की शिमला मिर्च उगाई, जो उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि रही।
इसके अलावा एक्सोटिक सब्ज़ियों में भी उन्हें अच्छे परिणाम मिले। इससे उनकी आय बढ़ी और बाजार में उनकी पहचान मज़बूत हुई।
सेब बागवानी में भी दिखा असर
प्रेमपाल केवल फ़सलों तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने सेब के बागानों में भी प्राकृतिक खेती के इनपुट्स का उपयोग शुरू किया। आज वे लगभग 250 सेब के पौधों पर इस पद्धति का प्रयोग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे फलों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और पौधों की सेहत पहले से बेहतर हुई है।
उन्होंने ये भी देखा कि जिन समस्याओं पर रासायनिक और जैविक तरीके पूरी तरह प्रभावी नहीं थे, वहां प्राकृतिक उपाय अच्छे परिणाम दे रहे हैं।
रोग प्रबंधन में भी मिला फ़ायदा
उनके क्षेत्र में स्कैब और वूली एफिड जैसी समस्याएं आम हैं। प्रेमपाल बताते हैं कि प्राकृतिक खेती में जीवामृत और दशपर्णी अर्क जैसे इनपुट्स के उपयोग से इन समस्याओं पर काफ़ी हद तक नियंत्रण मिला है।
इससे फ़सलों की सुरक्षा बेहतर हुई और रसायनों पर निर्भरता कम हुई।
किसानों को भी दे रहे मार्गदर्शन
आज प्रेमपाल केवल अपने खेत तक सीमित नहीं हैं। उनकी सफलता देखकर आसपास के किसान भी उनसे सलाह लेने पहुंचते हैं। वे नए किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं और उन्हें सही मार्गदर्शन भी देते हैं। गांव के युवाओं को खेती से जोड़ने के लिए भी वे लगातार प्रयास कर रहे हैं।
उनका मानना है कि खेती को आधुनिक सोच और स्थानीय संसाधनों के साथ जोड़कर युवाओं के लिए रोज़गार का मज़बूत साधन बनाया जा सकता है।
भविष्य के लिए बना रहे मॉडल फ़ार्म
प्रेमपाल जी ने सब्ज़ियों की खेती के लिए 17 बीघा ज़मीन लीज पर ली है। यहां भी वे प्राकृतिक खेती के आधार पर खेती करने की योजना बना रहे हैं। साथ ही वे अपने भाई के साथ मिलकर एक पंचतत्व आधारित उन्नत प्राकृतिक कृषि मॉडल विकसित करने पर भी काम कर रहे हैं। उनका उद्देश्य ऐसा मॉडल तैयार करना है, जिससे दूसरे किसान भी सीख सकें और अपने खेतों में अपनाकर लाभ उठा सकें।
बदलाव की राह पर बढ़ता एक किसान
प्रेमपाल की कहानी ये साबित करती है कि अगर किसान नई सोच के साथ खेती करे, तो खेती केवल आजीविका का साधन नहीं बल्कि सम्मानजनक और लाभकारी व्यवसाय भी बन सकती है। IT कंपनी की नौकरी से लेकर प्राकृतिक खेती के सफल किसान बनने तक का उनका सफर कई युवाओं के लिए प्रेरणा है। उन्होंने दिखाया है कि सही जानकारी, प्रशिक्षण और मेहनत के साथ खेती में नई संभावनाएं बनाई जा सकती हैं।
आज प्रेमपाल न केवल अपनी खेती को आगे बढ़ा रहे हैं, बल्कि अपने क्षेत्र में रसायनमुक्त और टिकाऊ खेती की सोच को भी मज़बूत कर रहे हैं।
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