उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए खुशख़बरी: जून में तीन बड़े कार्यक्रम, बदलते मौसम में भी होगी किसानों की आमदनी दोगुनी

उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में 14, 15 और 16 जून को भव्य कृषि मेला और आरोग्य मेला (Agriculture Fair and Health Fair) आयोजित किया जाएगा। यह मेला किसानों के लिए वरदान साबित होगा।

उत्तर प्रदेश सरकार (Government of Uttar Pradesh) ने बदलते मौसम और खेती की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए जून महीने के लिए एक कारगर योजना तैयार की है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही (Agriculture Minister Surya Pratap Shahi) ने विभागीय अधिकारियों के साथ अहम बैठक कर किसानों तक हर योजना को प्रभावी ढंग से पहुंचाने के निर्देश दिए। इस बैठक में खेती को मौसम के अनुकूल बनाने, फसल विविधीकरण बढ़ाने और किसानों की आय मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

14 से 16 जून: कृषि मेला और आरोग्य मेला  

प्रदेश के सभी जिलों में 14, 15 और 16 जून को भव्य कृषि मेला और आरोग्य मेला (Agriculture Fair and Health Fair) आयोजित किया जाएगा। यह मेला किसानों के लिए वरदान साबित होगा। यहां उन्हें नई तकनीक, उन्नत बीज, कृषि यंत्रों की जानकारी के साथ-साथ स्वास्थ्य जांच की भी सुविधा मिलेगी।

17-18 जून: प्राकृतिक खेती पर दो दिवसीय कार्यशाला  

इसके बाद 17 और 18 जून को प्राकृतिक खेती पर विशेष कार्यशाला होगी। इसमें किसानों को बिना रसायन के खेती करने के तरीके सिखाए जाएंगे, ताकि जमीन की उर्वरा शक्ति बनी रहे और उत्पादन भी बढ़े।

21 जून: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 

अब खेतों में भी योग होगा। 21 जून को कृषि फार्मों और विभागीय कार्यालयों में योग दिवस मनाया जाएगा। इससे किसानों को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने का संदेश दिया जाएगा।

अल नीनो की चुनौती: कम बारिश के लिए पहले से तैयार रहें किसान

बैठक में अल नीनो के संभावित प्रभाव और कम बारिश की आशंका को गंभीरता से लिया गया। कृषि मंत्री ने सीधे किसानों से अपील की – खेतों की मेड़ों पर पेड़ लगाएं और अरहर जैसी कम पानी वाली फसलों को अपनाएं। इससे जल संरक्षण होगा और अतिरिक्त आय भी मिलेगी। सरकार अब खेती को मौसम के जोखिमों के हिसाब से ढालने की रणनीति पर काम कर रही है।

दलहन और तिलहन पर जोर: बदल रहा है प्रदेश का खेती का पैटर्न

इस साल उड़द, मूंग, सोयाबीन और तिल जैसी दलहन-तिलहन फसलों के रकबे में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। सरकार चाहती है कि कम पानी में अधिक उपज देने वाली इन फसलों को और अधिक किसान अपनाएं। यह बदलते समय की जरूरत है।

गन्ने के साथ मूंगफली, उड़द, सरसों  

कृषि मंत्री ने गन्ना आधारित सह-फसली खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। अब गन्ने के साथ मूंगफली, उड़द, मूंग, लोबिया, सरसों और भिंडी जैसी फसलें उगाई जाएंगी। इसके प्रदर्शन प्लॉट भी तैयार किए जा रहे हैं। इससे किसानों को एक ही खेत से दो फसलों का लाभ मिलेगा।

उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए खुशखबरी! जून में तीन बड़े कार्यक्रम, बदलते मौसम में भी होगी किसानों की आय दोगुनी

अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि कृषि यंत्रों की बुकिंग दोबारा शुरू की जाए, बीज वितरण के भुगतान जल्द से जल्द करें और विभागीय कामों में तेजी लाएं। सरकार का साफ संदेश है – अब किसानों तक योजनाएं बिना किसी रुकावट के पहुंचनी चाहिए।

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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