UPCAR ने मौसम की चुनौतियों को देखते हुए किसानों के हित में दिये दूरदर्शी सुझाव, Toll-Free हेल्पलाइन नंबर भी जारी

UPCAR ने मौसम की चुनौतियों को देखते हुए किसानों के हित में दूरदर्शी सुझाव दिए हैं। बारिश कम होने पर घबराने की जरूरत नहीं, बल्कि सही फसल और सही तकनीक अपनाकर भरपूर पैदावार ली जा सकती है।

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh ) के किसानों के लिए एक अहम ख़बर है। उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (Uttar Pradesh Council of Agricultural Research) यानि UPCAR के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह की अध्यक्षता में Crop Weather Watch Group की साल 2026-27 की तीसरी बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में मौसम के मिजाज़ को भांपते हुए किसानों के लिए अगले दो हफ्तों के लिए ख़ास सुझाव जारी किए गए हैं।

क्या कहता है मौसम का हाल?

मौसम विभाग के मुताबिक, केरल में मानसून ने दस्तक दे दी है, लेकिन उत्तर प्रदेश में 18 जून तक बारिश सामान्य से कम रहेगी। सबसे बड़ी चिंता का विषय ये है कि उत्तर-पूर्वी मैदानी इलाकों में पारा सामान्य से 4 से 6 डिग्री सेल्सियस ऊपर जा सकता है। यानी लू चलने की आशंका है, जिससे फसलों को नुकसान हो सकता है।

धान छोड़ो, ये फसलें अपनाओ

डॉ. संजय सिंह ने साफ निर्देश दिए हैं कि जो किसान बारिश पर निर्भर खेती करते हैं, वे धान की बजाय श्री अन्न (मोटे अनाज), मक्का, उर्द, मूंग और तिल की बुआई को प्राथमिकता दें। ये फसलें कम पानी में भी तैयार हो जाती हैं और गर्मी सहन करने की क्षमता रखती हैं।

धान की नर्सरी का ख़ास ध्यान

सुझाव दिया गया है कि  धान की नर्सरी में पानी का ठहराव न होने दें। सिंचाई केवल शाम के समय करें, जिससे पानी जल्दी वाष्पित न हो। खाली पड़े खेतों में मिट्टी पलट हल से गहरी जुताई करें। इससे खरपतवार और कीट नष्ट होंगे और मिट्टी की सेहत सुधरेगी।

आम और लीची के बागों के लिए टिप्स

गर्मी से फलों को बचाने के लिए बागों में नमी बनाए रखना ज़रूरी है। आम को सुरक्षित रूप से पकाने के लिए इथरेल का प्रयोग बताया गया है। इससे 4-6 दिनों में आम आकर्षक रूप से पक जाते हैं। वहीं, फलमक्खी नामक कीट से बचाव के लिए मिथाइल यूजिनाल वाले क्यूल्योर ट्रैप लगाएं और नीम का अर्क छिड़कें।

मछली पालकों और पशुपालकों के लिए ज़रूरी सलाह

तालाबों में जलस्तर 1.50 मीटर बनाए रखें, क्योंकि गर्मी में पानी सूखने से मछलियां मर सकती हैं। पशुपालकों के लिए National Animal Disease Control Programme के तहत एचएस (Hemorrhagic Septicemia) का टीका सभी जिलों में मुफ्त लगाया जा रहा है।

सबसे अहम बात: ज्वार या सूडान घास के चारे में नमी कम न होने दें, वरना उसमें साइनाइड (एचसीएन) बढ़ जाता है, जो पशुओं के लिए जहर के समान है। चारे में पानी जरूर डालें।

ये नंबर बचा सकते हैं आपकी फसल

किसी भी समस्या के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1962 और 18001805141 जारी किए गए हैं। किसान सीधे विशेषज्ञों से सलाह ले सकते हैं।

35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य

प्रदेश में 35 करोड़ पौधरोपण के लक्ष्य के तहत वन विभाग की पौधशालाओं से निःशुल्क पौधे दिए जा रहे हैं। किसान और ग्रामीण अधिक से अधिक पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकते हैं।

UPCAR ने मौसम की चुनौतियों को देखते हुए किसानों के हित में दूरदर्शी सुझाव दिए हैं। बारिश कम होने पर घबराने की जरूरत नहीं, बल्कि सही फसल और सही तकनीक अपनाकर भरपूर पैदावार ली जा सकती है। सभी किसान हेल्पलाइन नंबर जरूर नोट कर लें और समय पर सलाह लें।

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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