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भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र को और मज़बूत बनाने की दिशा में MoFAH&D लगातार काम कर रहा है। इसी क्रम में भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लखी ने आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में स्थित MPEDA-RCCA ब्रूड मल्टीप्लिकेशन सेंटर और ICAR-CMFRI मरीन फिश ब्रूडस्टॉक एवं हैचरी केंद्र का दौरा किया। इस दौरान MoFAH&D की ओर से जलीय कृषि क्षेत्र में गुणवत्ता वाले ब्रूडस्टॉक और उच्च गुणवत्ता वाले सीड उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों की समीक्षा की गई।
इस दौरे का उद्देश्य भारत के झींगा पालन और समुद्री मत्स्य क्षेत्र को अधिक आत्मनिर्भर, उत्पादक और निर्यात प्रतिस्पर्धी बनाना है।
वैज्ञानिकों और किसानों से किया संवाद
दौरे के दौरान डॉ. अभिलक्ष लखी ने वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों, किसानों और केंद्र के कर्मचारियों के साथ बातचीत की। MoFAH&D ने चल रहे अनुसंधान कार्यों, ब्रूडस्टॉक विकास कार्यक्रमों और झींगा पालन क्षेत्र को मज़बूत बनाने वाली गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की।
इस दौरान कई चुनौतियां भी सामने आईं। इनमें बाज़ार से जुड़ाव की कमी, उत्पादन लागत में वृद्धि, बिजली खर्च और किसानों के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता प्रमुख रही। इन मुद्दों को देखते हुए MoFAH&D ने अधिकारियों को राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) और राज्य सरकार के साथ मिलकर प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए।
झींगा पालन क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ
विशाखापट्टनम में स्थापित ब्रूड मल्टीप्लिकेशन सेंटर को भारत के झींगा पालन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। MoFAH&D के अनुसार यह केंद्र उच्च गुणवत्ता वाले Specific Pathogen Free (SPF) ब्लैक टाइगर श्रिम्प ब्रूडस्टॉक के उत्पादन और आपूर्ति में मदद करेगा।
इससे आयातित ब्रूडस्टॉक पर निर्भरता कम होगी और जैव सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही झींगा उत्पादन की गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार होगा। MoFAH&D का मानना है कि यह पहल जलीय कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद करेगी।
समुद्री उत्पाद निर्यात में नया रिकॉर्ड
भारत के समुद्री उत्पादों का निर्यात लगातार बढ़ रहा है। MoFAH&D द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2025-26 में समुद्री उत्पादों का निर्यात 73,890.46 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह लगभग 8.45 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर है।
इसी अवधि में निर्यात मात्रा 19.72 लाख मीट्रिक टन दर्ज की गई। यह उपलब्धि भारतीय समुद्री उत्पादों की वैश्विक मांग में लगातार हो रही वृद्धि को दर्शाती है। MoFAH&D का मानना है कि गुणवत्ता सुधार और आधुनिक तकनीकों के उपयोग ने इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
MPEDA और अनुसंधान संस्थानों की अहम भूमिका
समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) देश के समुद्री निर्यात को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। MoFAH&D के अनुसार MPEDA गुणवत्ता वाले सीड और ब्रूडस्टॉक विकास, ट्रेसबिलिटी सिस्टम, प्रमाणन और बुनियादी ढांचे के विकास पर लगातार काम कर रहा है।
वहीं ICAR-CMFRI का क्षेत्रीय केंद्र समुद्री मत्स्य अनुसंधान, जैव विविधता संरक्षण और मरिकल्चर तकनीकों के विकास में योगदान दे रहा है। यहां आधुनिक हैचरी, केज फार्मिंग सिस्टम और लाइव फीड प्रयोगशालाओं जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। MoFAH&D का उद्देश्य इन संस्थानों के माध्यम से किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाना है।
आंध्र प्रदेश बना मत्स्य क्षेत्र का प्रमुख केंद्र
आंध्र प्रदेश वर्तमान में देश का सबसे बड़ा मछली उत्पादक और समुद्री उत्पाद निर्यातक राज्य है। वर्ष 2025-26 में राज्य का कुल मत्स्य उत्पादन 55.39 लाख टन दर्ज किया गया। MoFAH&D के अनुसार राज्य में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत 2,324.17 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा आधुनिक फिश लैंडिंग सेंटर, फिशिंग हार्बर और इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क जैसी परियोजनाओं पर भी बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है।
राज्य में मत्स्य अवसंरचना को मज़बूत बनाने के लिए कुल 1,352 करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट लागू किए जा रहे हैं। वहीं मत्स्य एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (FIDF) के तहत भी कई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी मत्स्य क्षेत्र की दिशा में कदम
MoFAH&D का यह दौरा केवल परियोजनाओं की समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे भविष्य की रणनीति को भी दिशा मिली। इस दौरान जलीय कृषि में प्रजातियों के विविधीकरण, उच्च गुणवत्ता वाले सीड उत्पादन और किसानों की समस्याओं के समाधान पर विशेष ध्यान दिया गया।
सरकार का लक्ष्य भारत को समुद्री उत्पादों के क्षेत्र में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है। MoFAH&D का मानना है कि अनुसंधान, आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और मज़बूत अवसंरचना के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा की जा सकती हैं।
आगे की राह
विशाखापट्टनम का यह दौरा दर्शाता है कि MoFAH&D मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र को मज़बूत बनाने के लिए गंभीरता से काम कर रहा है। गुणवत्ता वाले ब्रूडस्टॉक, बेहतर सीड उत्पादन, आधुनिक अनुसंधान और निर्यात वृद्धि के जरिए भारत वैश्विक समुद्री बाज़ार में अपनी स्थिति को और मज़बूत कर सकता है।
आने वाले समय में ऐसी पहलें न केवल किसानों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने में मदद करेंगी, बल्कि देश के समुद्री उत्पाद निर्यात को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगी।
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