Table of Contents
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के किसान संगत राम पिछले चार दशकों से खेती और बागवानी से जुड़े हुए हैं। लंबे अनुभव के बाद उनका मानना है कि खेती में बढ़ती लागत और बाज़ार की अनिश्चितता से बचने के लिए प्राकृतिक खेती (Natural Farming) एक बेहतर रास्ता बन सकती है।
उन्होंने कुछ साल पहले प्राकृतिक खेती की शुरुआत की और आज उन्हें इसके अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। उनके खेत अब आसपास के किसानों के लिए सीखने का केंद्र बन चुके हैं।
बाज़ार की समस्या ने बदल दी सोच
संगत राम बताते हैं कि कई बार बाज़ार में एक साथ सब्ज़ियां और फल पहुंच जाते हैं, जिससे कीमतें अचानक गिर जाती हैं। ऐसी स्थिति में किसानों को मेहनत के बावजूद नुक़सान उठाना पड़ता है।
लेकिन उन्होंने महसूस किया कि प्राकृतिक खेती (Natural Farming) से तैयार फ़सल ज़्यादा टिकाऊ होती है। इससे फलों और सब्जियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और तुरंत बेचने का दबाव कम हो जाता है। यही सोच उन्हें प्राकृतिक खेती की ओर लेकर गई।
प्राकृतिक खेती से शुरू किया नया सफर
संगत राम ने क़रीब कुछ साल पहले अपने खेतों में प्राकृतिक खेती (Natural Farming) अपनाई। शुरुआत में उन्होंने सीमित क्षेत्र में इसका प्रयोग किया और पहले ही सीजन में उन्हें अच्छे परिणाम देखने को मिले।
इससे उनका भरोसा और मज़बूत हो गया और उन्होंने धीरे-धीरे खेती का दायरा बढ़ाना शुरू कर दिया।
9 बीघा में से 5 बीघा में प्राकृतिक खेती
आज संगत राम अपनी 9 बीघा ज़मीन में से 5 बीघा क्षेत्र में प्राकृतिक खेती (Natural Farming) कर रहे हैं। वे मक्की, गेहूं, राजमाह, माश, बीन्स, सेब, नाशपाती, अनार और प्लम जैसी फ़सलें उगा रहे हैं। उनका कहना है कि आने वाले समय में वे अपनी पूरी ज़मीन को प्राकृतिक खेती के तहत लाना चाहते हैं।
लागत में आई बड़ी कमी
पहले संगत राम रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर 75 हज़ार रुपये से ज़्यादा ख़र्च करते थे। लेकिन प्राकृतिक खेती (Natural Farming) अपनाने के बाद उनका ख़र्च घटकर क़रीब 15 हज़ार रुपये रह गया है।
कम लागत के कारण अब खेती पहले से ज़्यादा लाभकारी लगने लगी है। उनका मानना है कि अगर किसान स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग करें, तो खेती में ख़र्च काफ़ी कम किया जा सकता है।
फ़सल की गुणवत्ता में हुआ सुधार
संगत राम बताते हैं कि प्राकृतिक खेती (Natural Farming) से फ़सलों की गुणवत्ता पहले से बेहतर हुई है। फल और सब्ज़ियां ज़्यादा टिकाऊ हो गई हैं और उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
इससे बाज़ार में सही समय पर फ़सल बेचने का मौका मिलता है और किसानों को नुक़सान कम होता है।
गांव के किसान भी हो रहे प्रभावित
संगत राम की सफलता देखकर अब उनके गांव के दूसरे किसान भी प्राकृतिक खेती (Natural Farming) की ओर बढ़ रहे हैं। उनके अनुसार गांव के क़रीब 8 किसानों ने इस पद्धति को अपनाना शुरू कर दिया है।
ये बदलाव दिखाता है कि जब किसान अपने आसपास अच्छे परिणाम देखते हैं, तो उनका भरोसा भी बढ़ने लगता है।
संसाधन केंद्र बनाकर कर रहे मदद
संगत राम को योजना के तहत संसाधन भंडार खोलने के लिए अनुदान भी मिला है। इसकी मदद से वे प्राकृतिक खेती (Natural Farming) में उपयोग होने वाले इनपुट तैयार कर रहे हैं और दूसरे किसानों को भी उपलब्ध करा रहे हैं।
इस पहल से गांव के किसानों को काफ़ी सहायता मिल रही है और उन्हें बाहर से महंगे उत्पाद खरीदने की ज़रूरत नहीं पड़ रही।
खेत देखने दूर-दूर से पहुंच रहे लोग
आज संगत राम के खेतों को देखने के लिए कई किसान और बागवान पहुंच रहे हैं। उनकी खड़ी फ़सल और फल देखकर लोग प्रभावित हो रहे हैं और प्राकृतिक खेती (Natural Farming) अपनाने के लिए तैयार हो रहे हैं।
वे किसानों को सलाह देते हैं कि अगर खेती को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है, तो मिट्टी और पौधों की सेहत पर ध्यान देना जरूरी है।
फ़सलों की शेल्फ लाइफ भी बढ़ी
संगत राम का अनुभव है कि प्राकृतिक खेती (Natural Farming) से फ़सलों की शेल्फ लाइफ बढ़ती है। इससे किसानों को फ़सल प्रबंधन के लिए अलग से ज़्यादा ख़र्च नहीं करना पड़ता। कम लागत और बेहतर गुणवत्ता ने उनकी खेती को पहले से ज़्यादा मज़बूत बना दिया है।
खेती में बदलाव की नई मिसाल
संगत राम की कहानी ये दिखाती है कि खेती में बदलाव धीरे-धीरे ही सही, लेकिन मज़बूत परिणाम लेकर आता है। उन्होंने प्राकृतिक खेती (Natural Farming) अपनाकर ये साबित किया है कि कम ख़र्च में भी अच्छी खेती की जा सकती है।
आज उनका खेत सिर्फ़ उत्पादन का स्थान नहीं, बल्कि सीखने का एक मॉडल बन चुका है। उनकी पहल कई किसानों को ये भरोसा दे रही है कि प्राकृतिक खेती आने वाले समय में खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाने का मज़बूत रास्ता बन सकती है।
ये भी पढ़ें : प्राकृतिक खेती अपनाकर ओम प्रकाश ने एग्रो टूरिज्म का सफल मॉडल तैयार किया
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुंचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

