भारत में पशुपालन और डेयरी खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मज़बूत रीढ़ मानी जाती है। पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और अधिक दूध उत्पादन के लिए पौष्टिक हरे चारे की ज़रूरत हमेशा बनी रहती है। इसी ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए ICAR-Indian Grassland and Fodder Research Institute (IGFRI), झांसी ने रिजका यानी Lucerne की एक नई उन्नत किस्म IGFRI-DL-2 (AWCL-2) विकसित की है। ये किस्म ख़ासतौर पर उत्तर भारत के किसानों और पशुपालकों के लिए फ़ायदेमंद मानी जा रही है।
क्या है रिजका (Lucerne)?
रिजका, जिसे कई जगहों पर अल्फाल्फा (Alfalfa) भी कहा जाता है, एक बहुवर्षीय हरा चारा फ़सल है। इसे “Queen of Forage Crops” यानी चारा फ़सलों की रानी भी कहा जाता है। इसमें प्रोटीन, विटामिन और खनिज तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो पशुओं के पोषण के लिए बेहद ज़रूरी हैं।
IGFRI-DL-2 क्यों है ख़ास?
IGFRI द्वारा विकसित ये नई किस्म कई आधुनिक ख़ूबियों से भरपूर है। इसका सबसे बड़ा फ़ायदा इसका अधिक हरा चारा उत्पादन है। ये किस्म लगभग 85 से 90 टन प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष तक हरा चारा देने की क्षमता रखती है। इससे किसानों को कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन मिल सकता है।
इसके अलावा, इस किस्म में 16 से 18 प्रतिशत तक उच्च प्रोटीन पाया जाता है, जो पशुओं के लिए बेहद पौष्टिक है। बेहतर पोषण मिलने से पशुओं का स्वास्थ्य सुधरता है और दूध उत्पादन में भी सकारात्मक बढ़ोतरी देखने को मिलती है।
रोग और कीटों के प्रति बेहतर प्रतिरोध
खेती में सबसे बड़ी चुनौती फ़सलों में लगने वाले रोग और कीट होते हैं। IGFRI-DL-2 किस्म को इस तरह विकसित किया गया है कि ये जंग और पत्ती सुंगरी जैसे प्रमुख रोगों के प्रति बेहतर प्रतिरोध क्षमता रखती है। इससे किसानों को दवाओं पर कम ख़र्च करना पड़ सकता है और फ़सल नुकसान की संभावना भी घटती है।
डेयरी और पशुपालन को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों के अनुसार, हरे और पौष्टिक चारे की उपलब्धता सीधे तौर पर दूध उत्पादन से जुड़ी होती है। IGFRI-DL-2 का नियमित उपयोग पशुओं की पाचन क्षमता और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। इससे दूध की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार संभव है। यही कारण है कि इसे डेयरी किसानों के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
मधुमक्खी पालन में भी उपयोगी
ये किस्म केवल पशुपालन तक सीमित नहीं है। इसके फूल मधुमक्खियों को आकर्षित करते हैं, जिससे मधुमक्खी पालन को भी बढ़ावा मिल सकता है। यानी किसान चारा उत्पादन के साथ-साथ शहद उत्पादन से अतिरिक्त आय का स्रोत भी विकसित कर सकते हैं।
किसानों के लिए नई उम्मीद
जलवायु परिवर्तन, बढ़ती लागत और पशुओं के लिए चारे की कमी जैसी चुनौतियों के बीच IGFRI-DL-2 जैसी उन्नत किस्म किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। बेहतर चारा, स्वस्थ पशु और अधिक दूध उत्पादन के ज़रिए ये किस्म किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ऐसी उन्नत चारा फ़सलें भारत के पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को और मज़बूत बनाने में अहम योगदान देंगी।
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुंचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

