Hybrid Paddy Seeds: हाइब्रिड धान के बीजों पर क्या कहा गया, क्यों उठी Denotification की मांग?

पंजाब सरकार का मानना है कि जब धान की गुणवत्ता भारतीय खाद्य निगम यानी Food Corporation of India (FCI) के मानकों के अनुरूप नहीं होती, तब किसानों की फसल की खरीद और उठान में परेशानी आती है।

पंजाब में एक बार फिर खेती और धान की फसल को लेकर बहस तेज हो गई है। इस बार मुद्दा है हाइब्रिड धान के बीजों का। पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने केंद्र सरकार से कुछ हाइब्रिड धान बीजों को “डीनोटिफाई” यानी उनकी सरकारी मान्यता खत्म करने की मांग की है। उनका कहना है कि इन बीजों से पैदा होने वाले धान की गुणवत्ता ऐसी नहीं है, जो सरकारी खरीद के तय मानकों पर खरी उतर सके।

पंजाब में क्यों बढ़ा हाइब्रिड बीजों का इस्तेमाल?

दरअसल, पंजाब देश के सबसे बड़े धान और गेहूं उत्पादक राज्यों में गिना जाता है। यहां का किसान लंबे समय से गेहूं-धान चक्र पर निर्भर है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हाइब्रिड धान के बीजों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इन बीजों को अधिक उत्पादन देने वाला माना जाता है, लेकिन अब इनके दुष्प्रभावों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने क्या आपत्ति जताई?

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan से मुलाकात के दौरान कहा कि कुछ हाइब्रिड किस्मों में चावल की मिलिंग के समय दानों के टूटने की मात्रा ज्यादा पाई जा रही है। इसके अलावा “हेड राइस रिकवरी” यानी साबुत चावल की मात्रा भी कम निकल रही है। इससे सरकारी एजेंसियों को खरीद में दिक्कत आती है और सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को झेलना पड़ता है।

किसानों और सरकारी खरीद पर क्या असर पड़ रहा है?

पंजाब सरकार का मानना है कि जब धान की गुणवत्ता भारतीय खाद्य निगम यानी Food Corporation of India (FCI) के मानकों के अनुरूप नहीं होती, तब किसानों की फसल की खरीद और उठान में परेशानी आती है। कई बार किसानों को कम कीमत मिलती है या फिर उनकी उपज देर तक मंडियों में पड़ी रहती है। यही कारण है कि राज्य सरकार ने आगामी खरीफ सीजन से पहले कुछ विवादित हाइब्रिड बीजों पर रोक लगाने की मांग की है।

क्या सभी हाइब्रिड बीज खराब हैं?

हालांकि, यह मामला इतना सरल भी नहीं है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि सभी हाइब्रिड बीज खराब नहीं होते। कई किस्में उत्पादन बढ़ाने में मदद करती हैं और किसानों की आमदनी भी बढ़ा सकती हैं। वहीं दूसरी ओर, कृषि वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि केवल ज्यादा पैदावार ही पर्याप्त नहीं है, गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। अगर चावल टूटे हुए निकलेंगे, तो निर्यात और सरकारी खरीद दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

जल संकट भी बना बड़ी चिंता

इस पूरे विवाद के पीछे पंजाब का जल संकट भी एक बड़ा कारण है। राज्य में लगातार गिरते भूजल स्तर ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। पंजाब सरकार के अनुसार राज्य के 150 में से 117 ब्लॉक “डार्क ज़ोन” में पहुंच चुके हैं, जहां भूजल का स्तर बेहद नीचे चला गया है। ऐसे में सरकार अब फसल विविधीकरण यानी धान-गेहूं के बजाय दूसरी फसलों को बढ़ावा देने की बात कर रही है।

वैकल्पिक फसलों पर MSP की मांग

मुख्यमंत्री मान ने केंद्र से यह भी मांग की कि मक्का, दालें, तिलहन और बाजरा जैसी वैकल्पिक फसलों पर भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को प्रभावी बनाया जाए, ताकि किसान धान की खेती से धीरे-धीरे बाहर निकल सकें। उनका तर्क है कि जब तक किसानों को दूसरी फसलों में आर्थिक सुरक्षा नहीं मिलेगी, तब तक वे धान छोड़ने के लिए तैयार नहीं होंगे।

बीज नीति और Seed Bill 2025 पर भी उठे सवाल

बैठक के दौरान पंजाब सरकार ने बीज नीति से जुड़े मुद्दे भी उठाए। राज्य ने प्रस्तावित Seed Bill 2025 के तहत केंद्रीय बीज समिति में पंजाब को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की मांग की। साथ ही यह भी कहा गया कि राज्य स्तरीय बीज समितियों के अधिकारों में कटौती नहीं होनी चाहिए।

केंद्र सरकार की ओर से फिलहाल यह आश्वासन दिया गया है कि इस पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष समिति बनाई जाएगी। यह समिति हाइब्रिड धान बीजों की गुणवत्ता, खरीद व्यवस्था और किसानों पर पड़ने वाले असर का अध्ययन करेगी।

केवल बीज नहीं, खेती के भविष्य का सवाल

स्पष्ट है कि यह विवाद केवल बीजों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे खेती का भविष्य, किसानों की आय, सरकारी खरीद व्यवस्था और पंजाब का पर्यावरण- सब कुछ जुड़ा हुआ है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकारें उत्पादन और गुणवत्ता के बीच संतुलन कैसे बनाती हैं, ताकि किसान भी सुरक्षित रहें और देश की खाद्य व्यवस्था भी मजबूत बनी रहे।

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुंचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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