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अगर आप पारंपरिक खेती से जूझ रहे हैं और आमदनी बढ़ाने के नए रास्ते तलाश रहे हैं, तो गेंदा फूल की खेती आपकी किस्मत बदल सकती है। बिहार सरकार ने गेंदा फूलों की खेती (Marigold cultivation) को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है, जिसमें किसानों को मोटा अनुदान मिलेगा।
क्या है यह योजना?
बिहार के उद्यान निदेशालय ने Marigold Flower Production and Processing Scheme शुरू की है। इसका मकसद है क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा देना, जिससे किसानों को संगठित रूप में खेती करने का फायदा मिले। इस योजना के तहत एक क्लस्टर का क्षेत्रफल 25 हेक्टेयर होगा, जिसमें रबी और खरीफ दोनों मौसम में गेंदा फूल की खेती कराई जाएगी।
कितना मिलेगा अनुदान?
यही नहीं, सरकार किसानों की जेब पर बोझ डाले बिना उन्हें आत्मनिर्भर बनाना चाहती है। योजना के तहत गेंदा फूल की खेती (Marigold cultivation) के लिए 80 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की इकाई लागत तय की गई है। इसमें सरकार 50 फीसदी यानी 40 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक अनुदान देगी। एक किसान न्यूनतम 0.1 हेक्टेयर से लेकर अधिकतम 2 हेक्टेयर तक का लाभ उठा सकता है।
क्लस्टर बनाने का तरीका
स्कीम का फायदा लेने के लिए किसान को निर्धारित क्लस्टर में ही अप्लाई करना होगा। एक क्लस्टर एक पंचायत या दो समीपवर्ती पंचायतों के आधार पर बनेगा। किसान के पास गेंदा फूल की खेती के लिए भूमि होना जरूरी है। जिनके पास अपनी ज़मीन नहीं है, वे एकरारनामा के आधार पर योजना का लाभ ले सकते हैं।
परिवहन पर भी मिलेगा अनुदान
गेंदा फूल की खेती के साथ-साथ सरकार परिवहन को भी सहारा दे रही है। फूलों की ढुलाई के लिए मालवाहक वाहन खरीदने पर भी अनुदान मिलेगा। वाहन की अधिकतम लागत 3.25 लाख रुपये मानी जाएगी, जिस पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। ये फायदा सिर्फ गेंदा फूल उगाने वाले किसानों को ही मिलेगा।
अप्लाई करने की डेट
योजना के लिए आवेदन 15 सितंबर से शुरू हो चुके हैं, जो 31 दिसंबर 2026 तक किए जा सकते हैं। वाहन अनुदान के लिए आवेदन करते समय वाहन का कोटेशन, जमीन के कागजात और एकरारनामा एक साथ अपलोड करना होगा।
क्यों खास है गेंदा फूल की खेती?
गेंदा एक ऐसा फूल है जिसकी मांग सालभर बनी रहती है। शादी-विवाह, त्योहार, धार्मिक अनुष्ठान और सजावट में इसका जमकर यूज होता है। ख़ास बात ये है कि ये फसल कम समय में तैयार हो जाती है और एक ही खेत से साल में कई बार फूल मिल सकते हैं। ऐसे में यह किसानों के लिए आमदनी का एक्स्ट्रा सोर्स बन सकती है।
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