भारत में दूध, दही, घी और मट्ठा (Milk, Yogurt, Ghee, and Buttermilk) को हमेशा से ‘गांव का खाना’ समझा जाता रहा है। एक समय था जब शहरी लोग मलाईदार दूध के लिए गांवों के चक्कर लगाते थे। लेकिन तस्वीर अब पूरी तरह बदल चुकी है। हाल ही में संसद में पेश की गई National Sample Survey Office (NSSO) की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट बताती है कि आज शहरों में लोग गांवों की तुलना में अधिक दूध और दुग्ध उत्पादों (Milk and dairy products) का सेवन (milk consumption in India) कर रहे हैं।
क्या कहते हैं आंकड़े?
देश के 30 राज्यों में शहरी क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति दूध (Milk) की खपत ग्रामीण क्षेत्रों से आगे निकल गई है। ये सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारत की खान-पान की आदतों में आए बड़े बदलाव की कहानी है। हैरानी की बात ये है कि जिन राज्यों में ग्रामीण क्षेत्र अब भी आगे हैं, वहां शहर और गांव के बीच का अंतर बेहद कम हो गया है। Dairy Experts का मानना है कि अगले 1-2 सालों में ये अंतर पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
130 ग्राम से 485 ग्राम तक का सफ़र
Union Ministry of Animal Husbandry and Dairying के आंकड़े बताते हैं कि साल 1950-51 में एक भारतीय के हिस्से में महज़ 130 ग्राम दूध आता था। आजादी के बाद के उस दौर में दूध विलासिता की वस्तु थी। लेकिन ‘Operation Flood’ यानी ‘श्वेत क्रांति’ ने भारत को दूध की कमी वाले देश से दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना दिया। साल 2024-25 में ये आंकड़ा बढ़कर 485 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन हो गया है। वहीं, उत्पादन के मोर्चे पर भारत ने 25 करोड़ टन दूध उत्पादन का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया है, जो पिछले साल से 3.58 फीसदी अधिक है।
शहरों में दूध की बढ़ती मांग के पीछे क्या है वजह?
डेयरी एक्सपर्ट डॉ. आर.एस. सोढ़ी (पूर्व एमडी, अमूल) के अनुसार, इस बदलाव की चार बड़ी वजहें हैं-
1.बढ़ती आमदनी और बदलती लाइफ स्टाइल: शहरी मध्यम वर्ग की purchasing power बढ़ी है। लोग पोषण पर खर्च करने को तैयार हैं।
2.जागरूकता: फिटनेस और हेल्थ के प्रति बढ़ते क्रेज ने लोगों को प्रोटीन और कैल्शियम के लिए डेयरी प्रोडक्ट्स अपनाने के लिए प्रेरित किया है।
3.बेहतर उपलब्धता: पैकेज्ड दूध, दही, पनीर और फ्लेवर्ड मिल्क की आसान उपलब्धता ने शहरों में खपत बढ़ा दी है।
4.कीमतों में स्थिरता: अन्य खाद्य पदार्थों की तुलना में दूध की कीमतों में comparatively कम उछाल आया है।
गांवों में खपत क्यों घट रही है?
गांवों में दूध की खपत घटने की सबसे बड़ी वजह किसानों का बदलता नजरिया है। पहले किसान घर की जरूरत पूरी करने के बाद बचा हुआ दूध बेचता था। अब वो इसे एक कमोडिटी के रूप में देखता है। बेहतर कमाई के लिए वह अधिक से अधिक दूध डेयरी और सहकारी समितियों को बेच रहा है। यानी, गांव वाला अब पैसे कमाने के लिए दूध बेच रहा है और शहर वाला सेहत के लिए उसे ख़रीद रहा है।

