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उत्तराखंड के देहरादून में किसानों के लिए एक नई और आधुनिक पहल की शुरुआत की गई है। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने नाबार्ड पॉलीहाउस योजना के तहत अनुदान वितरण की प्रक्रिया को अब डिजिटल बना दिया है। इस नई व्यवस्था में Central Bank Digital Currency के माध्यम से किसानों को सीधे भुगतान किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और सुविधा दोनों बढ़ेंगी।
इस पहल को किसानों की आय बढ़ाने और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
Central Bank Digital Currency से शुरू हुई नई व्यवस्था
इस कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री ने किसानों के खातों में प्रतीकात्मक डिजिटल भुगतान कर नई प्रणाली की शुरुआत की। अब नाबार्ड पॉलीहाउस योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी Central Bank Digital Currency के जरिए सीधे डिजिटल वॉलेट में पहुंचेगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि राशि सही व्यक्ति तक पहुंचे और उसका सही उपयोग हो।
नई प्रणाली से भुगतान प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी, जिससे किसानों को समय पर लाभ मिल सकेगा।
ऑनलाइन आवेदन और पूरी प्रक्रिया डिजिटल
किसानों को इस योजना का लाभ लेने के लिए “अपुणि सरकार” पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। नाबार्ड पॉलीहाउस योजना में आवेदन के बाद संबंधित विभाग द्वारा जांच और स्थल सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद पात्र किसानों को Central Bank Digital Currency वाउचर जारी किए जाएंगे।
यह वाउचर पॉलीहाउस निर्माण पूरा होने और सत्यापन होने तक लॉक्ड स्थिति में रहेंगे। जब सभी प्रक्रियाएं पूरी हो जाएंगी, तब भुगतान सीधे संबंधित कंपनी या फर्म के खाते में किया जाएगा।
छोटे पॉलीहाउस पर 80 प्रतिशत तक अनुदान
कृषि मंत्री ने बताया कि इस योजना के तहत 50 से 100 वर्गमीटर के छोटे पॉलीहाउस के लिए किसानों को 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। नाबार्ड पॉलीहाउस योजना के लिए कुल 304.43 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
यह राशि तीन किस्तों में Central Bank Digital Currency वाउचर के जरिए वितरित की जाएगी। इससे छोटे और सीमांत किसानों को भी आधुनिक खेती अपनाने का अवसर मिलेगा।
पंजीकृत कंपनियों के माध्यम से होगा निर्माण
इस योजना को लागू करने के लिए 25 फर्मों और कंपनियों का पंजीकरण किया गया है। किसान अपनी सुविधा के अनुसार इनमें से किसी भी फर्म का चयन कर सकते हैं। नाबार्ड पॉलीहाउस योजना के तहत पॉलीहाउस निर्माण का पूरा काम इन पंजीकृत कंपनियों द्वारा किया जाएगा, जिससे गुणवत्ता और पारदर्शिता बनी रहेगी।
डिजिटल वॉलेट के जरिए सब्सिडी मिलने से किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना भी कम हो जाएगी।
पारदर्शिता और समयबद्धता पर जोर
कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कृषि और उद्यान विभाग की अन्य योजनाओं का भुगतान भी Central Bank Digital Currency के माध्यम से किया जाए। इससे सभी योजनाओं में पारदर्शिता और समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा सकेगा।
नाबार्ड पॉलीहाउस योजना में यह बदलाव दिखाता है कि सरकार तकनीक के इस्तेमाल से किसानों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए प्रयास कर रही है।
किसानों के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान
इस योजना को सफल बनाने के लिए ब्लॉक स्तर तक प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान चलाने की बात भी कही गई है। नाबार्ड पॉलीहाउस योजना का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचे, इसके लिए उन्हें नई प्रणाली के बारे में जानकारी देना ज़रूरी है।
इससे किसान आसानी से आवेदन कर सकेंगे और योजना का पूरा फ़ायदा उठा पाएंगे।
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में कदम
इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और उन्हें आधुनिक खेती की ओर बढ़ाना है। पॉलीहाउस तकनीक के जरिए किसान कम जगह में अधिक उत्पादन कर सकते हैं और मौसम के प्रभाव से भी फ़सल को बचा सकते हैं।
नाबार्ड पॉलीहाउस योजना के जरिए किसानों को यह सुविधा सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उनकी आमदनी में सुधार हो सकता है।
निष्कर्ष
देहरादून में शुरू की गई यह पहल आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। नाबार्ड पॉलीहाउस योजना में Central Bank Digital Currency के उपयोग से यह साफ है कि सरकार डिजिटल तकनीक को खेती से जोड़ने पर जोर दे रही है।
इससे न केवल किसानों को सीधा लाभ मिलेगा, बल्कि पूरी प्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी, जो कृषि क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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