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चाय प्रेमियों और चाय उद्योग (Tea lovers and the tea industry) से जुड़े लाखों लोगों के लिए एक बड़ी ख़बर है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने चाय में इस्तेमाल होने वाले दो कीटनाशकों एसिटामिप्रिड और इमिडाक्लोप्रिड (Pesticides acetamiprid and imidacloprid) के अवशेषों की अधिकतम सीमा (MRL) तय करने का प्रस्ताव दिया है। सबसे ख़ास बात ये है कि एसिटामिप्रिड के लिए प्रस्तावित भारतीय सीमा जापान और अमेरिका जैसे देशों से भी कम है,जो खाद्य सुरक्षा के प्रति भारत की गंभीरता को दिखाता है।
क्या हैं प्रस्तावित सीमाएं?
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, खाद्य सुरक्षा और मानक (Contaminants, toxic substances, and residues) संशोधन विनियम, 2026 के मसौदे में चाय के लिए दो क्लियर लाइन तय करने की बात कही गई है। एसिटामिप्रिड (Acetamiprid) के लिए 20 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम (20 ppm) और इमिडाक्लोप्रिड (Imidacloprid) के लिए 50 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम (50 ppm) की अधिकतम अनुमत मात्रा प्रस्तावित की गई है। एमआरएल का सीधा सा मतलब है कि किसी खाद्य पदार्थ में कीटनाशक के अवशेष की वो मात्रा जिसे कानूनी तौर पर सुरक्षित माना जाता है।
भारत का रुख़ दूसरों से स़ख्त क्यों?
ये समझना दिलचस्प है कि भारत ने एसिटामिप्रिड (Acetamiprid) के लिए 20 ppm की सीमा क्यों चुनी। इसको तुलनात्मक रूप से देखें तो जापान में ये सीमा 30 ppm और अमेरिका में 50 ppm है। यानी भारत का मानक इन दोनों देशों से कहीं अधिक सख़्त है। इमिडाक्लोप्रिड के मामले में भारत ने International Codex standards को आधार बनाया है, जिससे ये सुनिश्चित होता है कि हमारे नियम ग्लोबल लेवल पर एक्सेप्ट और वैज्ञानिक रूप से तार्किक हों।
क्या ये नियम अभी लागू हैं?
नहीं। ये बहुत जरूरी बात है। ये केवल प्रस्तावित सीमाएं हैं। मसौदा 16 अक्टूबर 2026 को राजपत्र में जारी किया गया है और FSSAI ने हितधारकों से 60 दिनों के अंदर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। फाइनल रूल बनने और अधिसूचित होने के बाद ही इन्हें कानूनी रूप से लागू किया जाएगा। तब तक ये सिर्फ चर्चा और विचार के लिए हैं।
कीटनाशक सीमा तय करना क्यों जरूरी है?
चाय की फसल को कई तरह के कीटों से बचाने के लिए कीटनाशकों का इस्तेमाल आम है। सही तरीके से और सही मात्रा में इस्तेमाल किए गए कीटनाशक फसल को बचाते हैं और उत्पादकता बनाए रखते हैं। लेकिन इनके अवशेष फसल पर रह सकते हैं, इसलिए एक वैज्ञानिक सीमा तय करना जरूरी है। FSSAI के मुताबिक, सीमा तय करते समय कीटनाशक के अवशेष संबंधी डेटा, भोजन के ज़रिए शरीर में पहुंचने की संभावित मात्रा और सुरक्षा पहलुओं का आकलन किया जाता है।
भारत में कीटनाशकों का इस्तेमाल कितना है?
एक राहत देने वाली बात यह है कि भारत में प्रति हेक्टेयर कीटनाशकों का औसत इस्तेमाल 0.5 किलोग्राम से भी कम है, जबकि Global Average 2.38 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। ये आंकड़ा बताता है कि भारतीय कृषि पद्धतियां पहले से ही कई अन्य देशों की तुलना में कम कीटनाशकों पर निर्भर हैं।
उद्योग के लिए क्या मायने रखता है?
चाय उत्पादकों, प्रोसेसर्स, परीक्षण प्रयोगशालाओं और निगरानी अधिकारियों (Tea producers, processors, testing laboratories, and regulatory officials) को अब Clear standards मिलेंगे। इससे अनुपालन और निगरानी आसान होगी। FSSAI पहले भी High toxicity वाले 13 कीटनाशकों को लिस्ट से हटा चुका है, जो लगातार सख़्त होती Regulatory direction को दिखाता है। अब गेंद हितधारकों के पाले में है। 60 दिनों के अंदर सुझाव देकर वे इस प्रोसेस का हिस्सा बन सकते हैं।
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