क्या सचमुच ज़हर है Processed Food? मंत्री चिराग पासवान ने शुरू की Counter Action Committee

केंद्रीय मंत्री, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (Union Minister, Ministry of Food Processing Industries) चिराग पासवान ने डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में 'प्रोसेस्ड फूड्स के बारे में गुमराह करने वाले प्रचार का मुकाबला करने वाली कमेटी' (Counter Action Committee) की दूसरी बैठक की अध्यक्षता की।

‘Processed food’ यानी तैयार खाद्य पदार्थ। आजकल इन दो शब्दों के आसपास एक डर का माहौल बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वीडियो, खबरें और पोस्ट्स की बाढ़ आई हुई है, जो बिना पुख़्ता सबूत के प्रोसेस्ड फूड को ‘ज़हर’ और ‘बीमारियों की जड़’ घोषित कर रही हैं। लेकिन क्या सचमुच ऐसा है? क्या हमारी रसोई में रखा आटा, दाल, तेल, दूध पाउडर, जैम, बिस्कुट सब ख़तरनाक हैं? इसी भ्रम को तोड़ने और जनता तक Scientific facts पहुंचाने के लिए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान (Union Minister Chirag Paswan) ने एक महत्वपूर्ण पहल की है।

गुमराह करने वाले प्रचार से कैसे निपटें?

केंद्रीय मंत्री, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (Union Minister, Ministry of Food Processing Industries) चिराग पासवान ने डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में ‘प्रोसेस्ड फूड्स के बारे में गुमराह करने वाले प्रचार का मुकाबला करने वाली कमेटी’ (Counter Action Committee) की दूसरी बैठक की अध्यक्षता की। ये कमेटी एक क्लियर मिशन लेकर चल रही है-झूठे प्रचार को वैज्ञानिक सच्चाई से खत्म करना।

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 सवाल है कि अगर प्रोसेस्ड फूड इतना ही ख़तरनाक है, तो क्या दुनिया भर की सरकारें इसे बनने देंगी? क्या FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) जैसी संस्थाएं मौजूद हैं? सच्चाई ये है कि ‘प्रोसेस्ड’ का मतलब ‘हानिकारक’ नहीं है। दूध को उबालना, अनाज को पीसकर आटा बनाना, फलों को डिब्बाबंद करना भी तो प्रोसेसिंग ही है। ये प्रोसेस भोजन को लंबे समय तक सुरक्षित रखने, पोषक तत्वों को बरकरार रखने और उसे सुलभ बनाने का काम करती है।

गलत जानकारी का ज़हर और उसका असर

आज का सबसे बड़ा ख़तरा खाद्य पदार्थों (Processed Food) से नहीं, बल्कि उनके बारे में फैलाए जा रहे ‘Digital poison’ से है। कुछ Self-appointed ‘Health Guru’ और अवैज्ञानिक स्रोत सनसनीखेज हेडलाइन बनाकर लोगों में डर बो रहे हैं। इसका सीधा नुकसान ये होता है कि:

  1. आम जनता भ्रमित होती है: लोग पौष्टिक और सुरक्षित पैकेज्ड फूड से भी दूर भागने लगते हैं।
  2. उद्योग पर आघात: देश का खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, जो लाखों लोगों को रोजगार देता है और किसानों की आय बढ़ाता है, उसे नुकसान होता है।
  3. वैज्ञानिक सोंच कमजोर होती है: लोग वैज्ञानिक शोध के बजाय अफवाहों पर भरोसा करने लगते हैं।

मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि- 

  • खाना प्रोसेस करना यानी उसे लंबे समय तक सुरक्षित और पौष्टिक रखने के लिए तैयार करना बहुत ज़रूरी है।
  • इससे खाना सुरक्षित रहता है, पोषण मिलता है, खाने की बर्बादी कम होती है और किसानों को अच्छा दाम मिलता है।
  • लोगों में प्रोसेस्ड फूड को लेकर जो गलतफहमियां हैं, उन्हें वैज्ञानिक तरीके से, साफ-साफ और जिम्मेदारी से दूर करना होगा।
  • सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और दूसरे ज़रीये की मदद से हर नागरिक तक सही और भरोसेमंद जानकारी पहुंचानी है।

बैठक में और क्या हुआ?

  • मंत्रालय के सचिव अविनाश जोशी ने बताया कि पिछली बैठक के बाद क्या-क्या काम हुए। जैसे- एक्सपर्ट से सलाह, सवाल-जवाब तैयार करना और उन्हें देशभर में फैलाना।
  • उन्होंने कहा कि सही जानकारी फैलाने के लिए सबको मिलकर काम करना होगा।

क्या है समाधान?

कमेटी इस गलत सूचना के विषय को कई स्तरों पर काटने की तैयारी कर रही है:

1.जन जागरूकता अभियान: सरल भाषा में लोगों को समझाना कि प्रोसेस्ड फूड क्या है, इसके क्या मानक हैं और FSSAI की मंजूरी का मतलब क्या होता है।

2.सोशल मीडिया निगरानी: झूठी और भ्रम फैलाने वाली सामग्री की पहचान करना और उसके खिलाफ कार्रवाई करना।

3.वैज्ञानिकों की आवाज बुलंद करना: पोषण विशेषज्ञों, डायटीशियन और वैज्ञानिकों को सीधे जनता से जोड़ना, ताकि सही Information source से मिले।

4.शिक्षा को शामिल करना: स्कूल और कॉलेज स्तर पर Food Science And Processing की बुनियादी शिक्षा देना।

इस बैठक में सिर्फ सरकार के अधिकारी ही नहीं थे, बल्कि इन सबके प्रतिनिधि भी शामिल हुए:

  • नियामक संस्थान: भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (FSSAI)
  • तकनीकी संस्थान: राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी संस्थान (NIFTEM)
  • उद्योग संघ: CII, ASSOCHAM, AIFPA आदि
  • बड़ी खाद्य कंपनियां

 सच्चाई और विकास के बीच पुल

चिराग पासवान की ये पहल केवल उद्योग को बचाने के लिए नहीं, बल्कि आम भारतीय की थाली को सुरक्षित और समृद्ध बनाने के लिए है। हमें ये समझने की ज़रूरत है कि आधुनिक जीवनशैली में प्रोसेस्ड फूड एक जरूरत है, बशर्ते वो नियमों के तहत बना हो। डर से नहीं, जागरूकता से फैसला लेना होगा। अगला बिस्कुट खाते या डबल रोटी का सैंडविच बनाते समय याद रखें – जरूरी नहीं कि जो पैक्ड है, वह खराब ही हो। जरूरी यह है कि हम “समझदार उपभोक्ता” बनें, न कि अफवाहों के शिकार।

यह लड़ाई केवल खाद्य पदार्थों की नहीं, बल्कि हमारी सोच को वैज्ञानिक बनाने की लड़ाई है। और यह तभी जीती जा सकेगी, जब हर नागरिक तथ्यों को जांचने और सही स्रोत से जानने की आदत डालेगा।

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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