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देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले कृषि क्षेत्र को लेकर Reserve Bank of India (RBI) ने बड़ा आकलन पेश किया है। सेंट्रल बैंक ने साफ कहा है कि आने वाला वित्त वर्ष 2026-27 (Financial Year 2026-27) किसानों के लिए चुनौतियों और उम्मीदों दोनों वाला होगा। सबसे बड़ी बात ये कि अब खेती पहले जैसी पूरी तरह बारिश पर निर्भर नहीं रही, लेकिन मौसम का ख़तरा अभी टला नहीं है।
मानसून की दो धार: अल नीनो बनाम IOD
RBI की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के मुताबिक, इस बार किसानों की फसल की किस्मत दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon) की रफ्तार और फैलाव पर टिका होगा। केंद्रीय बैंक ने अल नीनो (El Niño) को लेकर चिंता जताई है, यानी गर्म समुद्री धाराएं जो बारिश को सुखा देती हैं। लेकिन राहत की बात ये है कि Indian Ocean Dipole (IOD) पॉजिटिव बन रहा है, जो बारिश को बढ़ावा देता है। यानी प्रकृति का मुकाबला प्रकृति से ही हो सकता है।
अब बारिश नहीं, तकनीक है सहारा
RBI ने माना कि पिछले सालों में कृषि की तस्वीर बदली है। सिंचाई के विस्तार, नई तकनीकों और सरकारी योजनाओं से खेती की बारिश पर निर्भरता घटी है। अब बारिश में उतार-चढ़ाव उतना नुकसान नहीं पहुंचाता जितना पहले पहुंचाता था। लेकिन फिर भी, मानसून की अनियमितता और अल नीनो का जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
उर्वरक से लेकर भू-राजनीति तक
बैंक ने एक और गंभीर चेतावनी दी है। अंतरराष्ट्रीय तनावों का असर उर्वरकों और कृषि इनपुट की कीमतों और उपलब्धता पर पड़ सकता है। यानी अगर दुनिया में कहीं युद्ध या संकट हुआ, तो भारत के किसानों को महंगे खाद और बीज झेलने पड़ सकते हैं। हालांकि सरकार ने ऑप्शनल सोर्स और बफर स्टॉक की तैयारी कर ली है।
बजट का तोहफा: नई फसलें, नई उम्मीदें
RBI ने केंद्रीय बजट 2026-27 के कृषि प्रावधानों को सराहा है। Crop Diversification, यानी एक ही फसल की बजाय दालें, तिलहन, सब्जियां, मछली पालन, एक्वाकल्चर को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और मिट्टी की सेहत भी सुधरेगी।
भारत-विस्तार: AI से लैस होगा खेत
सबसे दिलचस्प बात – भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR) प्लेटफॉर्म का उल्लेख। यह एक बहुभाषी AI आधारित डिजिटल सिस्टम होगा, जो किसानों को सलाह, मौसम पूर्वानुमान, बीज, खाद, बाजार की जानकारी एक क्लिक पर देगा। यानी अब किसान “कब बोएं, कब काटें, कहां बेचें” का फैसला AI से ले सकेंगे।
जोखिम है, लेकिन तैयारी भी
RBI ने कहा – मौसम की चुनौतियां बरकरार हैं, लेकिन भारतीय कृषि पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और तैयार है। सिंचाई, तकनीक, सरकारी योजनाएं और डिजिटल पहल – सब मिलकर किसानों की ढाल बन रहे हैं। हालांकि, अगले कुछ महीने अहम होंगे। अल नीनो डराएगा या IOD बचाएगा – यह तो आने वाला मानसून ही बताएगा।
सीधी बात: RBI ने कहा, ‘चिंता मत करो, लेकिन आंखें खुली रखो।” किसानों के लिए यह उम्मीद की किरण है, लेकिन सतर्कता भी ज़रूरी।
डीप रिसर्च फैक्ट: पिछले 10 सालों में सिंचाई वाले रकबे में 22 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, फिर भी 52 प्रतिशत खेती अब भी बारिश पर निर्भर है। यानी अल नीनो का हर झटका सीधा किसान की जेब पर पड़ता है।

