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देश में भीषण गर्मी पड़ रही है और इसके साथ ही देश के बड़े जलाशयों का पानी तेजी से सूख रहा (The water in large reservoirs is drying up rapidly.) है। Central Water Commission (CWC) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 166 प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर घटकर महज 30.67 प्रतिशत ()The water level in the country’s 166 major reservoirs has dropped to a mere 30.67 percent.रह गया है। यानी कुल 183.565 अरब घन मीटर (BCM) की क्षमता के मुकाबले अब सिर्फ 56.3 BCM पानी बचा है।
चौंकाने वाली बात ये है कि इनमें से तीन चौथाई जलाशय आधे से भी कम भरे हैं। यानी 4 में से 3 जलाशय सूखने की कगार पर (Reservoir on the verge of drying up) हैं। हालांकि, रिपोर्ट ये भी कहती है कि पिछले साल और औसत के मुकाबले यह स्तर थोड़ा बेहतर है, लेकिन चिंता कम नहीं हुई है।
दक्षिण भारत में सबसे बुरा हाल
अगर क्षेत्रों की बात करें तो दक्षिण भारत की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है। यहां 47 जलाशयों में पानी का स्तर गिरकर मात्र 22.5 प्रतिशत रह गया है। 55.288 BCM की क्षमता वाले इन जलाशयों में अब सिर्फ 12.459 BCM पानी बचा है।
राज्यों पर नजर डालें तो:
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तेलंगाना में हालात सबसे खराब हैं : सिर्फ 16 फीसदी पानी बचा
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कर्नाटक भी पीछे नहीं : 16.77 प्रतिशत बचा पानी
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केरल में करीब 20 फीसदी जल स्तर
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आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु थोड़े बेहतर, क्रमशः 35 और 33 फीसदी
पूर्वी क्षेत्र में भी पानी की किल्लत
पूर्वी क्षेत्र के 27 जलाशयों में कुल क्षमता का सिर्फ 24 प्रतिशत पानी बचा है। यहां:
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पश्चिम बंगाल के 2 जलाशयों में महज 12.5 फीसदी पानी
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ओडिशा में हालात 21.5 फीसदी पर
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हालिया बारिश से असम में थोड़ी राहत : 37 फीसदी जल स्तर
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त्रिपुरा के एक जलाशय में 60 प्रतिश से अधिक पानी
उत्तर और पश्चिम में थोड़ी राहत
उत्तर भारत अन्य क्षेत्रों से बेहतर है। यहां 11 जलाशयों में लगभग 39 प्रतिशत पानी भरा है। पंजाब में 59 फीसदी, राजस्थान में 44 फीसदी और हिमाचल में 33 प्रतिशत जल स्तर है।
पश्चिमी क्षेत्र के 53 जलाशयों में करीब 36 प्रतिशत भंडारण है। गुजरात में 45 फीसदी और महाराष्ट्र में 28 फीसदी पानी बचा है।
मध्य क्षेत्र में छत्तीसगढ़ सबसे आगे
मध्य क्षेत्र के 28 जलाशयों में औसतन 35 फीसदी पानी है। छत्तीसगढ़ में 54 फीसदी (सबसे अच्छा), मध्य प्रदेश में 36 फीसदी, जबकि उत्तराखंड में सिर्फ 19 प्रतिशत पानी बचा है।
बारिश न होने से बढ़ी मुश्किल
मौसम विभाग (IMD) के आंकड़े बताते हैं कि 1 मार्च से 28 मई के बीच देश के 725 जिलों में से 29 प्रतिशत जिलों में कम या बिल्कुल बारिश नहीं हुई। जनवरी-फरवरी में भी 70 फीसदी देश में बारिश की कमी रही थी।
आगे जलाशयों पर और दबाव बढ़ सकता है
विशेषज्ञों के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून में देरी से जलाशयों पर और दबाव बढ़ सकता है। लेकिन राहत की बात यह है कि अगले सप्ताह तक मॉनसून के सक्रिय होने की उम्मीद है, जिससे जल स्तर में सुधार हो सकता है।
क्या ये चेतावनी है? बिल्कुल। बढ़ती गर्मी और घटते जलाशय आने वाले दिनों में पेयजल और सिंचाई के गंभीर संकट की तरफ इशारा कर रहे हैं। जरूरत है पानी के स्मार्ट इस्तेमाल और बचत की।
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