भारत का समुद्री खाद्य उद्योग (Seafood industry) इस समय जश्न के मूड में है। लंबे समय से सुस्त पड़ी झींगा (Shrimp) निर्यात की रफ्तार ने एक बार फिर पंख लगाए हैं। ताजा आंकड़ों और उद्योग रिपोर्ट्स (Crisil Report) के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का झींगा निर्यात 50,000 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर जाएगा। ये पिछले साल की तुलना में करीब 13 से 15 फीसदी की उछाल है, जो तीन साल की सुस्ती के बाद आई है।
सवाल उठता है कि आख़िर ये उछाल कैसे मुमकिन हुआ, जबकि सबसे बड़े बाजार अमेरिका ने भारतीय झींगा पर भारी टैरिफ (सीमा शुल्क) लगा रखा था? इस सफलता की कहानी में रणनीतिक बदलाव, मेहनत और सूझबूझ का शानदार मेल देखने को मिला है।
अमेरिकी झटका और दमदार पलटवार
पिछले साल अगस्त में जब क्रिसिल ने अनुमान लगाया था कि अमेरिका द्वारा 59 फीसदी से अधिक टैरिफ लगाए जाने से भारत का झींगा निर्यात 18 फीसदी तक गिर सकता है, तो पूरा उद्योग सकते में आ गया था। अमेरिका भारतीय झींगा (Indian Shrimp) की कुल खपत का करीब 40 फीसदी हिस्सा था। ये एक बड़ा झटका था, लेकिन भारतीय निर्याकर्ताओं ने इसे चुनौती की तरह लिया और अपने बाजारों का तेजी से डाइवर्सिफिकेशन शुरू कर दिया।
नतीजा ये हुआ कि चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में जहां अमेरिका को निर्यात में 15 फीसदी की गिरावट आई, वहीं कुल निर्यात मात्रा में 9.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ये कमाल हुआ नए बाजारों का रुख करके-
- वियतनाम को निर्यात में 62 फीसदी का ज़बरदस्त उछाल
- यूरोपीय संघ (EU) को 43 फीसदी की बढ़ोतरी
- चीन को भी दहाई अंकों में निर्यात बढ़ा
- इसके अलावा रूस और ब्रिटेन जैसे बाजारों में भी भारतीय झींगा की मज़बूत एंट्री हुई
अमेरिका का हिस्सा घटकर अब 32-33% रह गया है, जो पिछले साल 40 फीसदी था, लेकिन इससे Exporters को फर्क नहीं पड़ा क्योंकि उन्होंने दुनिया के नक्शे पर अपने झींगा के लिए नई जगहें बना ली थी।
मुनाफे की गारंटी: कमजोर रुपया और घटते टैरिफ
निर्यात में इस तेजी के दो और बड़े कारण रहे। पहला, भारतीय रुपये का डॉलर और यूरो के मुकाबले कमजोर होना। इससे विदेशी ख़रीदारों को भारतीय माल सस्ता पड़ा और निर्याकर्ताओं को बेहतर कीमत (Realization) मिली। दूसरा, अमेरिका में जल्द ही टैरिफ घटकर करीब 15 फीसदी रहने की उम्मीद है, जिससे अगले साल अमेरिकी बाजार में फिर से धमाल मचने की संभावना है।
क्रिसिल के वरिष्ठ निदेशक राहुल गुहा के मुताबिक, इन सबका नतीजा ये है कि झींगा प्रोसेसिंग कंपनियों का ऑपरेटिंग मार्जिन 7 से 7.5 प्रतिशत के बीच स्थिर बना रहेगा।
आंध्र प्रदेश ने एक्सपोर्ट ऑप्शनल मार्केट की ओर मोड़ा
इस पूरी कामयाबी में सबसे बड़ा हाथ आंध्र प्रदेश के झींगा किसानों और प्रोसेसरों का है, जो देश के कुल निर्यात में करीब 60 फीसदी का योगदान देते हैं। द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब अमेरिकी बाजार बंद हुआ, तो आंध्र के निर्याकर्ताओं ने झटके से 57 प्रतिशत एक्सपोर्ट ऑप्शनल मार्केट की ओर मोड़ दिया। राज्य के कृषि मंत्री के. अचन्नायडू के अनुसार, झींगा पालन से करीब 2.85 लाख परिवार और 30 लाख लोग जुड़े हुए हैं, और इस उद्योग की बदौलत ही तटीय जिलों की अर्थव्यवस्था चरमराने से बच गई।

