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ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मज़बूत बनाने में स्वयं सहायता समूह (SHGs) अहम भूमिका निभा रहे हैं। इनके ज़रिए महिलाएं अपनी बचत, हुनर और सामूहिक प्रयासों को कमाई के अवसरों में बदल रही हैं। कोई पारंपरिक हस्तशिल्प बना रही है, तो कोई स्थानीय उत्पादों को बाज़ार तक पहुंचा रही है। Self-Help Group women की यह भागीदारी अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला उद्यमिता को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण जरिया बन रही है।
सरकार के दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आजीविका और उद्यम के अवसर देने पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में लखपति दीदी पहल शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की आमदनी बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद करना है।
10 करोड़ से ज़्यादा महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं
सरकार की ओर से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जून 2025 तक देश में क़रीब 10.05 करोड़ ग्रामीण महिलाएं लगभग 92 लाख स्वयं सहायता समूहों से जुड़ चुकी थीं। यह आंकड़ा बताता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं बड़े स्तर पर सामूहिक रूप से आर्थिक गतिविधियों में हिस्सा ले रही हैं।
Self-Help Group women अपने समूहों के माध्यम से बचत करने, छोटे कारोबार चलाने और परिवार की आमदनी बढ़ाने के अवसर तलाश रही हैं। समूह से जुड़ने पर महिलाओं को एक साथ काम करने, अपने अनुभव साझा करने और सामूहिक उद्यम के ज़रिए आगे बढ़ने का मौका मिलता है।
15 अक्टूबर 2026 को विजयवाड़ा में राष्ट्रीय सरस मेले में शामिल हुईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी ग्रामीण महिलाओं की इस भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक, तकनीकी और सामाजिक रूप से आगे बढ़ने के अवसर मिले हैं। परिवार के आर्थिक फैसलों में उनकी भागीदारी भी बढ़ी है।
लखपति दीदी योजना में 3 करोड़+ का लक्ष्य हासिल
ग्रामीण महिलाओं को अपनी कमाई बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने में लखपति दीदी पहल अहम है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सरकार ने 3 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है। अब मार्च 2029 तक इस संख्या को 6 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
लखपति दीदी पहल का उद्देश्य महिलाओं को ऐसी आजीविका और उद्यम से जोड़ना है, जिससे वे नियमित रूप से बेहतर आमदनी हासिल कर सकें। इसके लिए उनके कौशल को कारोबार से जोड़ने और उत्पादों को बाज़ार तक पहुंचाने के अवसर महत्वपूर्ण हैं।
Self-Help Group women के लिए केवल कारोबार शुरू करना ही काफ़ी नहीं है। अपने उत्पादों की सही कीमत पाना, ग्राहकों तक पहुंच बनाना और कारोबार को लंबे समय तक चलाना भी ज़रूरी है। इसलिए बाज़ार से जुड़ाव और व्यवसाय से संबंधित जानकारी उनकी आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
राष्ट्रीय सरस मेले में महिलाओं को मिल रहा बाज़ार
विजयवाड़ा में 13 से 31 अक्टूबर 2026 तक आयोजित राष्ट्रीय सरस मेला ग्रामीण महिला उद्यमियों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और सीधे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर दे रहा है। इस आयोजन में 30 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 1,500 से ज़्यादा महिला उद्यमियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।
मेले में हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पादों और क्षेत्रीय व्यंजनों के साथ ग्रामीण उद्यमों को भी जगह मिली है। यहां महिलाएं सीधे ग्राहकों को उत्पाद बेच सकती हैं और अपने कारोबार के लिए नए खरीदारों से संपर्क बना सकती हैं।
इससे जुड़ा एक और माध्यम eSARAS डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके ज़रिए महिला उद्यमियों के उत्पादों को व्यापक बाज़ार तक पहुंचाने का अवसर मिलता है। Self-Help Group women के लिए ऑनलाइन और प्रत्यक्ष बिक्री के ऐसे माध्यम ग्राहकों से जुड़ने के नए रास्ते खोल सकते हैं।
मेले में लखपति दीदी पवेलियन भी बनाया गया है, जहां महिलाएं अपने उद्यम और आर्थिक बदलाव की यात्रा साझा कर सकती हैं। वहीं, नॉलेज पवेलियन में ब्रांडिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग और कारोबार बढ़ाने जैसे विषयों पर जानकारी और संवाद की व्यवस्था है।
आर्थिक सशक्तीकरण के साथ महिलाओं के अधिकार भी ज़रूरी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने महिला सशक्तीकरण की दिशा में आगे बढ़ने के साथ कुछ ज़रूरी पहलुओं पर भी ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि महिलाओं की प्रगति को केवल उनकी भागीदारी से नहीं, बल्कि इस आधार पर भी देखना चाहिए कि अपनी आय और संपत्ति पर उनका कितना अधिकार है।
घरेलू देखभाल की जिम्मेदारियों में सामुदायिक सहयोग और जलवायु के अनुकूल कारोबार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना भी ज़रूरी है। इससे महिलाओं को अपने काम और उद्यम को आगे बढ़ाने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
Self-Help Group women की बढ़ती भागीदारी, लखपति दीदी पहल और राष्ट्रीय सरस मेले जैसे मंच ग्रामीण महिलाओं को अपने हुनर से कमाई करने के अवसर दे रहे हैं। आने वाले समय में कौशल, बाज़ार तक पहुंच और अपने संसाधनों पर महिलाओं का अधिकार मज़बूत करना इस प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए अहम रहेगा।
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