‘खेत बचाओ अभियान’ में शिवराज सिंह चौहान की अपील,ज़रूरत से ज्यादा खाद-कीटनाशक खेत को कर रहे बर्बाद

कृषि मंत्री ने साफ कहा कि सरकार खाद का इस्तेमाल बंद करने के लिए नहीं कह रही, बल्कि उतनी ही मात्रा में खाद डालने की सलाह दे रही है, जितनी खेत को सच में ज़रूरत हो।

आपने अक्सर देखा होगा कि जब फसल अच्छी नहीं होती, तो किसान और ज्यादा खाद डाल देते हैं। कीटनाशकों (Pesticides) का भी मनमाना इस्तेमाल करते हैं। सोचते हैं कि जितना ज्यादा डालेंगे, उतना अच्छा होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं? यही आदत आने वाले समय में खेती के लिए सबसे बड़ा संकट बन सकती है। 

केंद्रीय कृषि मंत्री ने दी चेतावनी

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Union Minister of Agriculture and Farmers Welfare Shivraj Singh Chouhan) ने हरियाणा के रेवाड़ी में ‘खेत बचाओ अभियान’ के दौरान किसानों से अपील की है-

‘भाइयों, मिट्टी की सेहत बचाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। अगर अभी से सावधानी नहीं बरती, तो आने वाले समय में जमीन की उपजाऊ क्षमता पर गंभीर असर पड़ सकता है।’ 

कृषि मंत्री  ने साफ कहा कि सरकार खाद का इस्तेमाल बंद करने के लिए नहीं कह रही, बल्कि उतनी ही मात्रा में खाद (fertilizers and pesticides) डालने की सलाह दे रही है, जितनी खेत को सच में ज़रूरत हो। 

ज़रूरत से ज्यादा खाद-कीटनाशक से क्या होता है?

सोचिए, अगर आपको बीमारी है तो आप डॉक्टर से कम सलाह लेते हैं और ज्यादा दवाई खा लेते हैं? क्या होगा? सेहत ख़राब हो जाएगी ना?

बिल्कुल ऐसा ही होता है जब हम जरूरत से ज्यादा खाद डालते हैं –

1.मिट्टी की उर्वरा शक्ति घट जाती है: ज्यादा रासायनिक खाद मिट्टी के अंदर मौजूद प्राकृतिक सूक्ष्म जीवों को मार देता है। ये जीव ही मिट्टी को उपजाऊ बनाए रखते हैं।

2.फसलों में ज़हरीले अवशेष रह जाते हैं : कीटनाशक और रासायनिक खाद के अवशेष सब्जियों, अनाजों में बने रहते हैं। यही फसलें हमारी थाली तक पहुंचती हैं और हमारी सेहत को बीमार बनाती हैं।

3.ज़मीन बंजर होने लगती है : लगातार ज्यादा खाद डालने से जमीन की प्राकृतिक क्षमता खत्म हो जाती है। एक समय ऐसा आएगा जब वह जमीन पहले जैसी फसल नहीं दे पाएगी।

4.खेती की लागत बढ़ जाती है : ज्यादा खाद = ज्यादा पैसा खर्च। आज तो ठीक है, लेकिन जब जमीन बंजर होगी तो और भी ज्यादा खर्च करना पड़ेगा और उत्पादन भी कम होगा।

क्या है सही तरीका? मिट्टी जांच के बाद ही खाद डालें 

मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने बताया कि किसान भाई मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) के अनुसार ही खाद का इस्तेमाल करें।

मतलब क्या?
जैसे हम डॉक्टर से जांच कराके दवाई लेते हैं, वैसे ही पहले मिट्टी की जांच कराएं कि उसमें कौन-से पोषक तत्व कम हैं और कौन-से ज्यादा। फिर उसी के हिसाब से खाद डालें।

अब मोबाइल ऐप बताएगा मिट्टी की सेहत!

सरकार किसानों के लिए एक नया मोबाइल ऐप ला रही है!

इमेजिन कीजिए  कि अब आपको मिट्टी जांच के लिए कहीं भागने की जरूरत नहीं-

  • ऐप डाउनलोड करें
  • खेत में खड़े होकर मोबाइल से स्कैन करें
  • ऐप बताएगा कि मिट्टी में क्या कमी है और कितनी खाद डालनी चाहिए!

कितना आसान है ना? अब वैज्ञानिक सलाह आपकी हथेली पर होगी। 

प्राकृतिक खेती-आने वाले कल की ज़रूरत

शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की भी अपील की है।

कई भाइयों को लगता है कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन कम होगा, लेकिन ऐसा नहीं है!

सच तो यह है:

  • प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है
  • लागत कम आती है (क्योंकि महंगी रासायनिक खाद नहीं खरीदनी पड़ती)
  • फसल लंबे समय तक टिकाऊ रहती है
  • हमारी सेहत भी सुरक्षित रहती है (क्योंकि फसलों में जहरीले अवशेष नहीं रहते)

हर सप्ताह चलेगा ‘खेत बचाओ अभियान’

अब हर राज्य में हर सप्ताह किसी न किसी दिन ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जाएगा।

इस अभियान के तहत:

  • किसानों को मिट्टी की जांच के फायदे बताए जाएंगे
  • संतुलित खाद के इस्तेमाल का तरीका समझाया जाएगा
  • प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा

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सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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