शिवराज सिंह चौहान ने ICAR के जरिए विकसित भारत 2047 का कृषि रोडमैप किया पेश

शिवराज सिंह चौहान ने ICAR के 98वें स्थापना दिवस पर 386 उन्नत फ़सल क़िस्मों, नई तकनीकों और किसान केंद्रित कृषि पर ज़ोर दिया।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ICAR ने नई दिल्ली में अपना 98वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए विज्ञान आधारित, जलवायु अनुकूल और किसान केंद्रित कृषि विकास के संकल्प को दोहराया गया। इस दौरान कृषि अनुसंधान, नई तकनीकों, उन्नत फ़सल क़िस्मों और किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने पर विशेष ज़ोर दिया गया।

कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ICAR भारत के कृषि परिवर्तन का अग्रदूत रहा है। उन्होंने बताया कि संस्थान ने पिछले एक वर्ष के दौरान कृषि क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं, जिनका सीधा लाभ किसानों को मिलेगा।

एक वर्ष में 44 फ़सलों की 386 उन्नत क़िस्में विकसित

अपने संबोधन में शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान ICAR ने 44 फ़सलों की 386 उन्नत क़िस्में विकसित की हैं। इनमें 94 प्रतिशत क़िस्में जलवायु परिवर्तन के अनुकूल हैं, जबकि 29 क़िस्में बायोफोर्टिफाइड हैं, जिनमें पोषण मूल्य अधिक है।

उन्होंने कहा कि बदलते मौसम और जलवायु की चुनौतियों को देखते हुए ऐसी फ़सल क़िस्मों का विकास समय की सबसे बड़ी जरूरत है। इससे किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ जोखिम कम करने में भी मदद मिलेगी।

किसान और वैज्ञानिक मिलकर बदलेंगे कृषि का भविष्य

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसान कृषि की आत्मा हैं, जबकि वैज्ञानिक उसका मस्तिष्क हैं। जब किसानों का अनुभव, वैज्ञानिकों का शोध और सरकार की नीतियां एक साथ काम करती हैं, तभी कृषि क्षेत्र में बड़े परिवर्तन संभव होते हैं।

उन्होंने मांग आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने की जरूरत बताई ताकि किसानों और बाज़ार की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुसार नई तकनीक और फ़सल क़िस्में विकसित की जा सकें। साथ ही दलहन और तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने पर भी विशेष ज़ोर दिया।

शिवराज सिंह चौहान ने ICAR के जरिए विकसित भारत 2047 का कृषि रोडमैप किया पेश

कृषि अनुसंधान को गांव तक पहुंचाने पर ज़ोर

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केवल शोध करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका लाभ खेतों तक पहुंचना भी जरूरी है। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के नेटवर्क को और मज़बूत बनाने की बात कही ताकि नई तकनीकों और वैज्ञानिक सलाह का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंच सके।

उन्होंने कृषि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, नई तकनीकों के व्यावसायीकरण और कृषि नवाचारों के व्यापक प्रसार की आवश्यकता पर भी बल दिया।

दूसरे मंत्रियों ने भी रखे अपने विचार

कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि ICAR की तकनीकों को कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से तेजी से किसानों, पशुपालकों और मत्स्य पालकों तक पहुंचाया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि पशुपालन विभाग और ICAR के बीच हुए समझौते से अनुसंधान और तकनीक के प्रसार को नई गति मिलेगी।

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि कृषि और डेयरी क्षेत्र की प्रगति सरकार की किसान हितैषी नीतियों का परिणाम है। वहीं कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि प्राकृतिक खेती, विज्ञान आधारित अनुसंधान और किसान केंद्रित नवाचार भविष्य की जरूरत हैं। प्रो. एस. पी. सिंह बघेल ने भी आधुनिक तकनीकों के जरिए किसानों की आय बढ़ाने पर ज़ोर दिया।

सालभर की उपलब्धियां भी की गईं साझा

कार्यक्रम के दौरान ICAR के महानिदेशक एवं सचिव, DARE डॉ. एम. एल. जाट ने वर्ष 2025-26 की प्रमुख उपलब्धियां प्रस्तुत कीं। उन्होंने बताया कि फ़सल, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन क्षेत्रों में बढ़े उत्पादन से लगभग 1.70 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक मूल्य सृजित हुआ। वहीं कृषि अनुसंधान का योगदान करीब 55 हजार करोड़ रुपये आंका गया।

उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक तकनीकों का सीधा लाभ लगभग एक करोड़ किसानों तक पहुंचा, जबकि मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से पांच करोड़ से अधिक किसान जुड़े। इसके अलावा 18 अंतरराष्ट्रीय समझौतों के जरिए वैश्विक सहयोग भी मज़बूत हुआ।

शिवराज सिंह चौहान ने ICAR के जरिए विकसित भारत 2047 का कृषि रोडमैप किया पेश

नई तकनीकों और फ़सल क़िस्मों का हुआ विमोचन

कार्यक्रम में 43 नई उन्नत फ़सल क़िस्मों, 17 आधुनिक कृषि तकनीकों और 14 प्रकाशनों का विमोचन किया गया। इनमें बासमती और लवणीय तथा क्षारीय मिट्टी के लिए जलवायु अनुकूल धान की क़िस्में, निर्यात उन्मुख आम उत्पादन तकनीक, भारत का पहला स्वदेशी अफ्रीकन स्वाइन फीवर वैक्सीन, डिजिटल स्वाइन डिजीज एटलस और छोटे किसानों के लिए कम लागत वाला कसावा हार्वेस्टर शामिल हैं।

इसके साथ ही 150 अस्थायी दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित नियुक्ति पत्र भी सौंपे गए। वहीं ICAR की तकनीकों को तेजी से किसानों तक पहुंचाने के लिए 51 उद्योग साझेदारों के साथ 72 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।

विकसित भारत के लिए विज्ञान आधारित कृषि पर रहेगा फ़ोकस

अपने संबोधन के अंत में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना तभी साकार होगा, जब कृषि क्षेत्र में नवाचार, अनुसंधान और आधुनिक तकनीकों को किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए। उन्होंने विश्वास जताया कि ICAR आने वाले वर्षों में भी विज्ञान आधारित, जलवायु अनुकूल और टिकाऊ कृषि को आगे बढ़ाते हुए किसानों की आय बढ़ाने और देश को कृषि क्षेत्र में और अधिक आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार, वैज्ञानिकों और किसानों के साझा प्रयास से भारतीय कृषि नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी।

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