The coastline of Andhra Pradesh: अब Seaweed Farming से बदलेगी मछुआरों और महिलाओं की किस्मत

सरकार ने अकेले दम पर नहीं, बल्कि देश के टॉप संस्थानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने की योजना बनाई है। CSIR-CSMCRI, NIOT और ICAR-CIBA के विशेषज्ञ वैज्ञानिक तरीके और उन्नत उत्पादन मॉडल तैयार करेंगे। मुख्यमंत्री ने इन संस्थानों से पहले ही चर्चा कर ली है, ताकि खेती के साथ-साथ प्रोसेसिंग पर भी जोर दिया जा सके।

आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) की 974 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा अब सिर्फ नज़ारों के लिए नहीं, बल्कि लाखों लोगों की आमदनी का ज़रिया बनने जा रही है। मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू (Chief Minister N. Chandrababu Naidu) ने समुद्री शैवाल (Seaweed) खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की कवायद तेज़ कर दी है। उनका साफ कहना है कि इससे तटीय इलाकों (The coastline of Andhra Pradesh) के मछुआरे और Women’s Self-Help Group आर्थिक रूप से सशक्त होंगे।

क्या है Seaweed Farming और क्यों है ख़ास?

सीवीड यानी समुद्री शैवाल को आमतौर पर बेकार समझा जाता था, लेकिन अब ये फार्मास्यूटिकल और न्यूट्रास्यूटिकल (Pharmaceutical and Nutraceutical) उद्योगों का गोल्ड बन चुका है। देशी-विदेशी बाजारों में इसकी भारी मांग है। मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में कहा कि अगर सही तकनीक और आर्थिक मॉडल अपनाया जाए तो यह क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दे सकता है।

केंद्रीय संस्थानों के साथ मिलकर बनेगी मजबूत रणनीति

सरकार ने अकेले दम पर नहीं, बल्कि देश के टॉप संस्थानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने की योजना बनाई है। CSIR-CSMCRI (केंद्रीय नमक और समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान), NIOT (राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान) और ICAR-CIBA (केंद्रीय खारा जल कृषि संस्थान) के विशेषज्ञ वैज्ञानिक तरीके और उन्नत उत्पादन मॉडल तैयार करेंगे। मुख्यमंत्री ने इन संस्थानों से पहले ही चर्चा कर ली है, ताकि खेती के साथ-साथ प्रोसेसिंग पर भी जोर दिया जा सके।

महिलाओं को केंद्र में रखकर तैयार होगी योजना

सबसे अच्छी बात यह है कि इस मिशन में महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी भी होगी। अमृता विश्व विद्यापीठम के साथ मिलकर एक Detailed Report तैयार की जा रही है, जिसमें आमदनी के संभावित स्रोतों और बेहतर तकनीकों का आकलन किया जाएगा। मुख्यमंत्री का साफ संदेश है, केवल खेती से आमदनी बढ़ाना भर मकसद नहीं है, बल्कि वैल्यू एडिशन यानी प्रोसेसिंग से मुनाफा बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है।

ग्लोबल बाज़ार में उतरने की तैयारी

सरकार अब अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ साझेदारी कर इस उद्योग को व्यावसायिक स्तर तक ले जाने में जुटी है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो आंध्र प्रदेश सीवीड के वैश्विक नक्शे पर मजबूत पहचान बना लेगा। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और प्रदेश को समुद्री संसाधनों से नई आर्थिक ताकत मिलेगी।

नाबार्ड का बड़ा क्रेडिट प्लान भी जारी

इससे पहले मंगलवार को सीएम ने नाबार्ड का वित्त वर्ष 2026-27 का स्टेट फोकस क्रेडिट प्लान जारी किया, जिसका आकार 5.11 लाख करोड़ रुपये है — पिछले साल से करीब 20 फीसदी ज्यादा। इसमें कृषि के लिए 2.5 लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं, जबकि पशुपालन, मत्स्य, बागवानी और एमएसएमई के लिए भी अलग प्रावधान हैं। यानी समुद्री शैवाल खेती को बढ़ावा देने के लिए फंड की कोई कमी नहीं रहेगी।

आंध्र प्रदेश सरकार की यह पहल न सिर्फ मछुआरों और महिलाओं की आय बढ़ाएगी, बल्कि राज्य को ब्लू इकोनॉमी (समुद्री अर्थव्यवस्था) में भारत का लीडर बनाने का सपना भी संजोए है। अब देखना यह होगा कि जमीनी स्तर पर यह योजना कितनी तेजी से धरातल पर उतरती है।

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सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

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