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दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी अमेज़न (Amazon, the world’s largest e-commerce company) ने भारतीय धान किसानों के साथ 3 करोड़ डॉलर (लगभग 250 करोड़ रुपये) का ऐतिहासिक सौदा किया है। अमेज़न किसानों से कार्बन क्रेडिट (Carbon Credits) खरीदेगी। यानी, किसान अब सिर्फ अनाज ही नहीं, बल्कि प्रदूषण कम करके भी कमाई कर सकेंगे।
क्या है पूरा मामला?
धान की खेती में परंपरागत रूप से खेतों में लगातार पानी भरा रखा जाता है। इससे ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और खेतों से मीथेन गैस निकलती है। मीथेन (Methane), कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon dioxide) से 25 गुना ज्यादा हानिकारक होती है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक है, इसलिए यहाँ से निकलने वाली मीथेन की मात्रा चिंताजनक है।
अमेज़न ने एक नई तकनीक AWD (Alternate Wetting and Drying) अपनाने का फैसला किया है। इसमें खेतों को पूरी तरह पानी में डुबो कर नहीं रखा जाता, बल्कि थोड़ी-थोड़ी देर सूखने दिया जाता है। इससे तीन बड़े फायदे होते हैं:
1.मीथेन उत्सर्जन 50 फीसदी तक घट जाता है
2.पानी की 30% बचत होती है
3.फसल की पैदावार पर कोई असर नहीं पड़ता
13,000 किसान हुए शामिल, कितना बड़ा है प्रोजेक्ट?
यह कोई छोटा प्रयोग नहीं है। फिलहाल 13,000 से ज्यादा छोटे किसान इसमें जुड़ चुके हैं। करीब 35,000 हेक्टेयर में यह तकनीक लागू की जा रही है। लक्ष्य है – 6.85 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को रोकना। यानी, लगभग 1.5 लाख कारों को एक साल के लिए सड़क से हटाने जितनी बड़ी बचत।
अकेले अमेज़न नहीं, ये है बड़ा गठबंधन
यह सौदा अकेले अमेज़न ने नहीं किया है। इसे Good Rice Alliance नाम के मंच के जरिए लागू किया जा रहा है। इसमें जर्मनी की दिग्गज कंपनी Bayer, सिंगापुर की Temasek, Shell और GenZero जैसे बड़े नाम शामिल हैं। मतलब, दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियां अब भारत के गांवों में जाकर किसानों से सीधे कार्बन क्रेडिट खरीद रही हैं।
किसानों को कितना फायदा?
अभी तक कार्बन क्रेडिट सिर्फ बड़े उद्योगों और जंगलों तक सीमित था। पहली बार इतने बड़े पैमाने पर छोटे किसानों को इससे जोड़ा गया है। किसान जब AWD तकनीक अपनाएगा, तो जितनी मीथेन नहीं निकलेगी, उसके बदले उसे कार्बन क्रेडिट मिलेगा। ये क्रेडिट अमेज़न जैसी कंपनियां खरीद लेंगी। इससे किसान को सिर्फ धान की आमदनी नहीं, बल्कि अतिरिक्त आय भी होगी।
एक अनुमान के मुताबिक, प्रति हेक्टेयर किसान को 3-4 हजार रुपये अतिरिक्त मिल सकते हैं। छोटे किसान के लिए यह बड़ी रकम है।
भारत के लिए क्यों है खास?
भारत में चावल की खेती से निकलने वाली मीथेन कुल ग्रीनहाउस गैसों का करीब 18% हिस्सा है। अगर यह मॉडल सफल रहता है और पूरे देश में फैलता है, तो:
- जलवायु लक्ष्यों को पाना आसान होगा
- बिजली और डीजल पर निर्भरता घटेगी
- भूजल स्तर गिरने से बचेगा
- किसानों की आय दोगुनी होने का रास्ता साफ होगा
क्या है चुनौती?
हर नई तकनीक के साथ चुनौतियां भी होती हैं। AWD तकनीक के लिए किसानों को प्रशिक्षण चाहिए। पानी के आने-जाने का सही समय समझना होता है। कई बार किसान डरते हैं कि अगर पानी कम दिया तो फसल खराब हो जाएगी। इसलिए जागरूकता और ट्रेनिंग पर जोर देना होगा।
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