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किसानों की लंबी लड़ाई को आख़िरकार सफलता मिल गई है। महाराष्ट्र सरकार (Government of Maharashtra) ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए प्रदेश के 56 लाख किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा (Announcement of a loan waiver for 5.6 million farmers in the state) की है। ये फैसला उन लाखों किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जो ब्याज दरों के बोझ तले दब रहे थे और कर्ज के चलते अपनी जान तक गंवा बैठे थे।
कर्ज़माफी का फॉर्मूला : 2 लाख तक का कर्ज़ होगा माफ़
महाराष्ट्र कैबिनेट ने मंगलवार 2 जून 2026 को देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) की अध्यक्षता में हुई बैठक में किसानों को बड़ी सौगात दी। सरकार ने तय किया कि 2 लाख रुपये तक का कृषि कर्ज़ पूरी तरह माफ कर दिया जाएगा। इस योजना का लाभ लगभग 56 लाख किसानों को मिलेगा, और इसमें उनके 65 लाख से अधिक बैंक खाते कवर होंगे। सरकार इसके लिए कुल 36,585 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
क्यों ज़रूरी था ये फैसला?
राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में लगभग 57.3 फीसदी कृषि परिवार कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। राज्य में करीब 40.7 लाख परिवारों पर कर्ज है, और देशभर में यह आंकड़ा 50 प्रतिशत से ज़्यादा है। लेकिन महाराष्ट्र की स्थिति अधिक चिंताजनक है, क्योंकि यहां कर्ज के कारण किसानों की आत्महत्याओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। किसानों ने लंबे समय से महंगी ब्याज दरों की शिकायत की थी, जिससे उनकी मूल राशि कई गुना बढ़ चुकी थी। यह कर्जमाफी उन्हें आर्थिक सदमे से उबारने की कोशिश है।
सिर्फ कर्ज़माफी ही नहीं, ईमानदार किसानों को भी मिलेगा इनाम
सरकार ने एक अलग हटकर फैसला भी लिया है। जिन किसानों ने नियमित रूप से अपने फसली ऋण चुकाए हैं और कभी चूक नहीं की, उन्हें 50,000 रुपये तक का प्रोत्साहन देने की भी मंजूरी दी गई है। इससे न सिर्फ कर्जमाफी पाने वालों को राहत मिलेगी, बल्कि ईमानदार कर्ज चुकाने वालों का भी सम्मान होगा।
किसानों पर क्या होगा असर?
राहत : लाखों किसान अब नए सिरे से खेती की शुरुआत कर सकेंगे, क्योंकि उन पर कोई पुराना ब्याज या कर्ज का दबाव नहीं होगा।
नया ऋण : कर्ज मुक्त होने के बाद वे बैंकों से नया कृषि ऋण लेकर बेहतर बीज, खाद और तकनीक का यूज़ कर सकेंगे।
मानसिक राहत : आत्महत्या की कगार पर खड़े कई किसानों को जीने की नई उम्मीद मिलेगी।
एक सराहनीय लेकिन चुनौतीपूर्ण कदम
यह फैसला किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा, लेकिन जब तक कृषि की लागत कम नहीं होती, ब्याज दरों पर कंट्रोल नहीं होता और फसलों का सही दाम नहीं मिलता, तब तक यह एक अस्थायी राहत ही है। फिर भी, मौजूदा संकट के समय में महाराष्ट्र सरकार का यह कदम देश की सबसे बड़ी कर्जमाफी योजनाओं में से एक है, जो 56 लाख किसान परिवारों की जिंदगी बदल सकता है।

