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प्रकृति ने एक बार फिर किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया है। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि (Unseasonal Rain and Hailstorm) ने भले ही गर्मी से राहत दे दी हो, लेकिन गेहूं की फसल पर ऐसा कहर बरपाया कि किसानों की उम्मीदें चूर-चूर हो गईं। कई ज़िलों में हुई ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी और कटी दोनों तरह की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है।
40 फीसदी फसल ख़राब होने का अंदेशा
किसानों का कहना है कि इस वक्त ज्यादातर किसान गेहूं की कटाई में जुटे थे, लेकिन लगातार हो रही बारिश और ओलावृष्टि ने सारा काम ठप कर दिया। निगोहा क्षेत्र के किसानों के मुताबिक, बारिश और ओलों के साथ हुई बरसात से फसल को लगभग 40 फीसदी का नुकसान हुआ है। गेहूं के दाने भीग गए हैं, जिससे उनके काले पड़ने का खतरा पैदा हो गया है। अगर दाने काले हो गए, तो मंडी में अच्छे दाम मिलना मुश्किल हो जाएगा।
क्यों होती है ये बेमौसम बारिश?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय होने के कारण मार्च-अप्रैल में अक्सर यूपी समेत उत्तर भारत में अचानक मौसम बदल जाता है। इस बार भी पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में ठंडी हवाओं के चलते बारिश और ओले गिरे। लेकिन जब यह ओले गेहूं की पकती फसल पर गिरते हैं, तो वह चटक जाती है और दाने टूटकर बिखर जाते हैं।
CM योगी ने जताई चिंता, अधिकारी अलर्ट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने प्रदेश के कई जनपदों में हो रही लगातार बारिश पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मौसम विपरीत है, ऐसे में प्रशासनिक अधिकारी निरंतर किसानों के संपर्क में रहें। सीएम ने साफ कहा, “बेमौसम बारिश ने किसानों का चैन छीन लिया है, लेकिन सरकार संबल के रूप में खड़ी है। उन्हें परेशानी नहीं होने दी जाएगी।”
सीएम ने सभी जिलाधिकारियों से फसल नुकसान की रिपोर्ट मांगी है और निर्देश दिया है कि वे खुद मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन करें।
सर्वे और मुआवजे के निर्देश
मुख्यमंत्री ने राजस्व, कृषि विभाग और बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से तुरंत सर्वे करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर प्रभावित किसान और बटाईदार को त्वरित राहत दी जाए, इसमें देरी नहीं होगी।
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