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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath) ने मौसम संबंधी पूर्व चेतावनी प्रणाली (Meteorological Early Warning System) को और ज़्यादा परफेक्ट, क्विक बनाने के निर्देश दिए हैं। राहत एवं आपदा प्रबंधन विभाग की समीक्षा बैठक (Review meeting of Relief and Disaster Management Department) में उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान समय पर दी गई सही सूचना अनेक लोगों का जीवन बचा सकती है।
Last Mile Connectivity पर जोर
सीएम योगी ने साफ कहा कि मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी तंत्र को केवल तकनीकी व्यवस्था तक सीमित न रखते हुए लास्ट पर्सन तक प्रभावी रूप से पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने गांवों और संवेदनशील क्षेत्रों में ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ मज़बूत करने पर जोर दिया।
इसके लिए आईवीआरएस, पंचायत स्तर के लाउडस्पीकर, लोकल एफएम रेडियो, मोबाइल अलर्ट और सोशल मीडिया का ज़्यादा यूज़ करने के निर्देश दिए गए।
13 मई के आंधी-तूफान की समीक्षा
बैठक में 13 मई 2026 को आए भीषण आंधी-तूफान की Detailed Review किया गया। अधिकारियों ने बताया कि आईएमडी के मल्टी-हैजार्ड अर्ली वार्निंग सिस्टम (एमएचईडब्ल्यूएस) की ओर से इस घटना की सात दिन पहले से निगरानी की जा रही थी।
पहले Yellow Warning जारी की गई, जिसे बाद में Orange और कई जिलों में Red Alert में अपग्रेड किया गया। चेतावनियों में तेज आंधी, बिजली गिरने, ओलावृष्टि और 60 किलोमीटर प्रति घंटा से ज़्यादा रफ्तार वाली हवाओं की आशंका जताई गई थी। कई स्थानों पर हवा की गति 80 से 130 किलोमीटर प्रति घंटा तक दर्ज की गई।
एसएमएस से लेकर सोशल मीडिया तक अलर्ट
अधिकारियों ने बताया कि भदोही, प्रयागराज, फतेहपुर, लखनऊ, मिर्जापुर, रायबरेली, कानपुर नगर और उन्नाव सहित कई जिलों में 70-80 किलोमीटर प्रति घंटा की हवा चलने के नाउकास्ट अलर्ट जारी किए गए थे।
‘सचेत’ प्लेटफॉर्म से कलर-कोडेड अलर्ट जिला प्रशासन, डीडीएमए, आपदा मित्रों तक पहुंचाए गए। प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय मोबाइल फोनों पर एसएमएस चेतावनियां भेजी गईं। स्थानीय टीवी चैनलों, एफएम रेडियो, व्हाट्सएप समूहों, ग्राम प्रधानों, लेखपालों, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के ज़रीये से भी व्यापक स्तर पर सूचना प्रसारित की गई।
जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश
योगी ने कहा कि चेतावनी के साथ-साथ लोगों में सुरक्षित व्यवहार को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। उन्होंने स्कूलों, पंचायतों और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।
साथ ही पेड़ों, बिजली के खंभों, होर्डिंग्स और कमजोर अस्थायी संरचनाओं की संवेदनशीलता का स्थानीय स्तर पर आकलन कर एसओपी तैयार करने को कहा।
प्रदेश में तैनात हैं अत्याधुनिक उपकरण
प्रदेश में 450 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और 2000 ऑटोमैटिक रेन गेज स्थापित किए जा चुके हैं। अलीगढ़, झांसी, लखनऊ, वाराणसी और आजमगढ़ में डॉप्लर वेदर रडार लगाए जा रहे हैं। बरेली, देवरिया और प्रयागराज में अतिरिक्त रडार लगाने की प्रक्रिया जारी है। लखनऊ और प्रयागराज में Wind Profiler Radar भी स्थापित किए जा रहे हैं।
आपदा प्रबंधन की तैयारी
यूएनडीपी के सहयोग से प्रदेश के 15 विभागों, सभी 75 जिलों और 20 प्रमुख नगरों के लिए डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान तैयार किए जा रहे हैं। 2025 में 44 जिलों की 118 तहसीलों में 1800 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया। इनके ज़रीये से 2361 गांवों और 4824 मजरों में जनजागरूकता अभियान चलाया गया। नाव दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए 38 जिलों में 66,077 लाइफ जैकेट वितरित किए गए हैं।

