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उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के किसानों के लिए एक ऐतिहासिक सौगात लेकर योगी सरकार (Yogi government) आई है। अब वो किसान भी बिना किसी चिंता के अपनी फसल को सींच पाएंगे, जो कभी पानी के नाम पर तरस जाते थे। प्रदेश के पूर्वांचल के तीन जनपदों – सिद्धार्थनगर, महाराजगंज और गोरखपुर – में सिंचाई क्रांति लाने के लिए सरकार ने ‘प्रेशर सिंचाई प्रणाली’ (Pressure Irrigation System) जैसी मॉडर्न टेक्नोलॉजी को अपनाया है। ये केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि हजारों किसानों की तकदीर बदलने वाली स्कीम है।
कम पानी, ज्यादा सिंचाई: कैसे काम करेगी ये तकनीक?
सबसे बड़ी समस्या ये थी कि पारंपरिक नहरों में पानी या तो आता ही नहीं था, या आता भी था तो रिसाव और वाष्पीकरण (evaporation) के कारण आधा पानी बर्बाद हो जाता था। लेकिन प्रेशर सिंचाई प्रणाली इसका शानदार समाधान है। इसमें पाइपों के ज़रिए दबाव (प्रेशर) से सीधे खेतों तक पानी पहुंचाया जाता है। इससे जहां पानी की बर्बादी ज़ीरो हो जाती है, वहीं वे क्षेत्र भी हरे-भरे हो जाते हैं जो कभी सिंचाई की सुविधा से वंचित थे।
111 करोड़ का निवेश
Irrigation and Water Resources Department ने इन तीनों ज़िलों में लगभग 111.62 करोड़ रुपये की लागत से 7 प्रमुख प्रेशर सिंचाई परियोजनाओं पर काम शुरू किया है। इस विशाल अभियान का सीधा फायदा तीनों ज़िलों के 57 गांवों को मिलेगा। करीब 4405 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई क्षमता में जबरदस्त इजाफा होगा। यानी हजारों एकड़ बंजर या कम उपजाऊ जमीन अब हरी-भरी फसलों से लहलहा उठेगी।
किस गांव को क्या मिला?
- सिद्धार्थनगर: यहां पड़रिया में 3.6 किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली बनकर तैयार हो चुकी है, जिससे 454 हेक्टेयर जमीन को सीधा फायदा होगा. वहीं, कैम्पियरगंज शाखा पर 95 फीसदी काम पूरा हो चुका है। इससे 9 गांवों के किसानों को फायदा होगा और 600 हेक्टेयर में सिंचाई होगी।
- महाराजगंज: मैहनवा, बृजमनगंज और फरेंदा रजवाहा पर परियोजनाएं तेजी से पूरी हो रही हैं।
- गोरखपुर: बैकुंठपुर रजवाहा पर 4.6 किलोमीटर लंबी प्रेशर सिंचाई प्रणाली डेवलप की जा रही है। ये परियोजना 10 गांवों के लिए वरदान साबित होगी, जहां 690 हेक्टेयर में सिंचाई की सुविधा का विस्तार होगा।
किसानों की आमदनी होगी दोगुनी
इस स्कीम का सबसे बड़ा फायदा ये है कि ये सिस्टम रबी और खरीफ दोनों मौसम में पानी की उपलब्धता करेगा। पानी के बेहतर मैनजमेंट से फसलों का प्रोडक्शन बढ़ेगा, लागत घटेगी और किसानों की आमदनी में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होगी।

