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अपने घर की छत को बगिया बनाने का चलन कोरोना काल से बहुत बढ़ गया, मगर उसके पहले भी कुछ लोग टेरेस गार्निंग करते थे और कुछ शहरी लोगों के लिए इसे आसान करने की तरकीब निकालने का काम कर रहे थे। ऐसी ही एक कंपनी है राजस्थान के जयपुर की Green life Pvt. Ltd., जो साल 2013 से शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए Portable Farming System पर काम कर रही है, ताकि सीमित जगह और बढ़ते शहरीरकरण के बीच लोग अपनी छत पर आसानी से जैविक खेती कर सकें।
कंपनी से जुड़े हरदयाल शेषमा ने किसान ऑफ इंडिया के संवाददाता सर्वेश बुंदेली से बातचीत के दौरान Portable Farming System और आज के समय में ऑर्गेनिक सब्ज़ियों की अहमियत पर विस्तार से चर्चा की।
सालों पहले छत पर खेती का कॉन्सेप्ट लाने वाली कंपनी
कोविड के दौरान तो लोगों ने अपनी छतों और गार्डन में खूब सब्ज़ियां उगाई और ये ट्रेंड बहुत लोकप्रिय भी हुआ, मगर छत पर केती का कॉन्सेप्ट इससे कई साल पहले जयपुर की एक कंपनी लेकर आई थी, जिसका नाम है Green life Pvt. Ltd. 2013 में इस कंपनी की शुरुआत हुई और इसने छत पर ऑर्गेनिक फ़ार्मिंग को प्रमोट करने के लिए काम शुरू किया और आज ये कंपनी कई शहरों में अपना विस्तार कर चुकी है। ये कंपनी न सिर्फ़ लोगों को ऑर्गेनिक फ़ार्मिंग से जुड़ी जानकारी देती है, उन्हें सभी तरह के रॉ मटीरियल भी उपलब्ध कराती है।
कंपनी से जुड़े हरदयाल शेषमा का कहना है कि लोग अपने घर की छत पर शुद्ध ऑर्गेनिक सब्ज़ियां उगाकर खा सकते हैं, इसलिए कंपनी ने कई सेटअप बनाए हैं। लोगों की ज़रूरतों और बजट के हिसाब से कंपनी ने 5 हजार से लेकर 50 हजार तक का पैकेज तैयार किया है। इस पैकेज के साथ कोई भी अपनी ऑर्गेनिक फ़ार्मिंग के सफर की शुरुआत कर सकता है।
कंपनी पूरी तरह से उनका मार्गदर्शन करती है कि क्या, कैसे करना है। किन बातों का ध्यान रखना है, कौन से कीट व बीमारी से कैसे बचाव करना है। लोगों को ञ, ये भी बताते हैं और उन्हें सारी सामग्री उपलब्ध कराते हैं और उन्हें सिखाते हैं कि अपनी छत पर व कैसे ऑर्गेनिक फ़ार्मिंग करके अपने परिवार के लिए शुद्ध ऑर्गेनिक सब्ज़ियां उगा सकते हैं।
ऑर्गेनिक फ़ार्मिंग के लिए Portable Farming System
हरदयाल शेषमा बताते हैं कि उनकी कंपनी ऑर्गेनिक फ़ार्मिंग को प्रमोट करने के साथ ही होटल, हॉस्पिटल आदि के लिए नेचुरल ग्रीन बोर्ड भी बनाती है यानी असली पौधों से बिल बोर्ड आदि बनाए जाते हैं। आगे वो बताते हैं कि शहरों में सीमित जगह में लोग ऑर्गेनिक फ़ार्मिंग कर सके इसके लिए उनकी कंपनी ने Portable Farming System बनाया है जो अलग-अलग साइज़ में उपलब्ध है। सबसे छोटा साइज़ है 2X5, इससे बड़ा साइज़ है 10 X2 और सबसे बड़ा साइज़ है 10 X4 का। अपनी छत पर मौजूद जगह के हिसाब से आप इनमें से कोई भी साइज़ का चुनाव कर सकते हैं और इसमें मौसम के हिसाब से सब्ज़ियां लगा सकते हैं।
फेरोमोन ट्रैप लगाना है ज़रूरी
जिस तरह से खेत में लगाई गई सब्ज़ियों में कीट और बीमारियों का खतरा रहता है, वैसे ही छत पर लगाई सब्ज़ियों को भी इनसे बचाना ज़रूरी होता है। हरदयाल कहते हैं कि लौकी, तुरई, कद्दू, खीरा जैसी सब्ज़ियों को फ्रूट फ्लाई (मक्खी) के हमले से बचाने के लिए फेरोमोन ट्रैप लगाया जाता है। फ्रूट फ्लाई फल में डंक मार देती है जिससे फल खऱाब हो जाता है और इसका असर उत्पादन पर होता है।
इस ट्रैप में एक खास तरह की गोली डाली जाती है जिसकी गंध की वजह से कीट नीचे से अंदर आते हैं और जाकर पानी में जाकर खत्म हो जाते हैं और इसका फ़सल पर कोई हानिकारक असर नहीं होता है। एक छत के लिए एक फेरोमोन ट्रैप काफी होता है, क्योंकि ये एक किलोमीटर के दायरे में काम करता है। फेरोमोन ट्रैप के अलावा उड़ने वाले छोटे कीट जैसे एफिड, मिलीबग, व्हाइटफ़्लाई से बचाव के लिए यलो स्टिक लगाया जाता है, ये सब कीट इस पर आकर चिपक जाते हैं। ये छोटे कीट पौधों से रस चूसकर उसे नुकसान न पहुंचाते हैं।
ग्राहक को देते हैं पूरी जानकारी
हरदयाल बताते हैं कि उनकी कंपनी का अलग-अलग शहरों में टेरेस गार्डनिंग के लिए एक CLM सिस्टम है। यहां ग्राहकों के लिए सारी जानकारी होती है कि किस दिन कौन सा स्प्रे करना है, कितना करना है। इतना ही नहीं इसमें वीडियो लिंक भी दिया होता है जिसे देखकर ग्राहक आसानी से काम कर सकते हैं। ग्राहक जैसे ही किसी कीट या बीमारी से प्रभावित पौधे की फोटो भेजता है तो हेडऑफिस में बैठा एग्री एक्सपर्ट उसे देखकर बताता है कि इसके समाधान के लिए कौन सा स्प्रे करना है।
ग्राहकों को सभी स्प्रे पैकेज के साथ ही दिए जाते हैं और उसमें दिन के हिसाब से स्प्रे की जानकारी होती है कि सोमवार को क्या डालना है और मंगलवार को कौन सा स्प्रे छिड़कना है। खास बात ये है कि सारे स्प्रे पूरी तरह से ऑर्गेनिक हैं। पौधों की अलग-अलग समस्याओं के हिसाब से अलग-अलग स्प्रे बनाए गए हैं। इसके अलावा बायो फर्टिलाइज़र भी दिया जाता है, जो पौधों के लिए पोषक तत्व का काम करता है। इ का इस्तेमाल बुवाई के समय किया जाता है। ये पौधों के लिए 17 पोषक तत्वों की ज़रूरत को पूरा करता है, जिससे अच्छा उत्पादन मिलता है।
आसान लगने लगती है खेती
हरदयाल का कहना है कि उनकी कंपनी ग्राहकों को सारी जानकारी और सामग्री उपलब्ध कराने के साथ ही बाद में होने वाली समस्याओं को हल करने में भी मदद करता है जिससे उन्हें खुद पर विश्वास होता है कि वो भी ऑर्गेनिक फ़ार्मिंग करके अपने घर के लिए सब्ज़ियां उगा सकते हैं। कंपनी ग्राहकों से लंबे समय तक जुड़ी रहती है और उन्हें बताती है कि कौन-सी सब्ज़ी वो लगा सकते हैं या सीजन के हिसाब से कौन-सी पौध तैयार कर सकते हैं।
बारिश, गर्मी या सर्दियों के मौसम में किन बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है इसकी भी जानकारी देते है। साथ ही हर शहर के मौसम के हिसाब से सही जानकारी देते हैं कि पौधों के सही विकास के लिए किन बातों का ध्यान रखना है। यदि ग्राहकों को कुछ समझ नहीं आता है, तो उन्हें वीडियो भेजकर समझाया जाता है। वीडियो देखकर काम इतना आसान हो जाता है कि कोई बुज़ुर्ग चाहे तो माली को वो दिखाकर भी काम करवा सकता है।
ऑर्गेनिक सब्ज़ियां, बीमारियों से छुटकारा पाएं
ऑर्गेनिक सब्ज़ियां न सिर्फ़ स्वाद में बेहतरीन होती है, बल्कि सेहत के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है। हरदयाल का कहना है कि अगर कोई एक बार इन सब्ज़ियां का स्वाद चख ले तो वो बाज़ार से सब्ज़ियां नहीं खरीदेगा और खुद ही उगाने कि लिए प्रेरित होगा। यही नहीं ऑर्गेनिक सब्ज़ियां पाचन संबंधी बीमारियों से लेकर कैंसर जैसी घातक बीमारी से बचाव में भी मददगार है, तो अगर आप खुद और अपने परिवार को स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो आज से ही छत पर ऑर्गेनिक फ़ार्मिंग की शुरुआत कर दीजिए।
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