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छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चाम्पा जिले में एक युवा किसान ने पारंपरिक खेती से हटकर मुनगा (सहजन) की उन्नत खेती अपनाकर सफ़लता की नई कहानी लिखी है। केंद्र सरकार की समेकित उद्यानिकी विकास योजना का लाभ उठाकर उन्होंने न सिर्फ अपनी आमदनी बढ़ाई, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं।
योजना से मिला सहारा, बदली खेती की तस्वीर
जांजगीर-चाम्पा जिले के नगर पंचायत बलौदा (रामपुर) निवासी युवा किसान दीपांशु कुमार सांडे ने उद्यानिकी विभाग की मदद से अपनी खेती को नई दिशा दी। उन्हें केंद्र सरकार की समेकित उद्यानिकी विकास योजना के तहत बोर खनन और खेत की फेंसिंग जैसी सुविधाएं मिलीं। पहले मवेशियों के कारण फसल को भारी नुकसान होता था, लेकिन अब सुरक्षा मिलने से उनकी फसल बेहतर तरीके से विकसित हो रही है।

मुनगा बना कमाई का मजबूत जरिया
दीपांशु ने लगभग एक एकड़ जमीन पर करीब 1500 मुनगा के पौधे लगाए हैं। इसके साथ ही उन्होंने मिश्रित खेती का मॉडल अपनाते हुए करौंदा, आंवला, नींबू, आम और अन्य सब्जियों की खेती भी शुरू की है। मुनगा की खासियत यह है कि यह कम पानी में भी अच्छी पैदावार देता है और साल में दो बार फसल मिलती है। इसी वजह से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और वे अब लाखों की कमाई कर रहे हैं।
सुपरफूड के रूप में बढ़ रही मांग
मुनगा को “सुपरफूड” के रूप में जाना जाता है। इसकी पत्तियों का पाउडर मल्टीविटामिन सप्लीमेंट की तरह उपयोग किया जाता है, जो ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है। इसके औषधीय गुणों के कारण बाज़ार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। दीपांशु अपने उत्पादों की बिक्री स्थानीय बाजारों के साथ-साथ आसपास के जिलों में भी कर रहे हैं।
वैज्ञानिकों से मिल रही तकनीकी मदद
कृषि विज्ञान केंद्र, जांजगीर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. के. डी. महंत के अनुसार, मुनगा एक ऐसी फसल है जो किसी भी प्रकार की जमीन में आसानी से उगाई जा सकती है। इसमें प्रोटीन, आयरन, मैग्नीशियम और विटामिन ए, बी, सी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों को लगातार तकनीकी मार्गदर्शन दिया जा रहा है, जिससे वे आधुनिक खेती अपनाकर बेहतर उत्पादन हासिल कर रहे हैं।

अन्य किसानों के लिए बना प्रेरणा स्रोत
दीपांशु का यह मॉडल अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है। आसपास के गांवों के किसान उनके खेत का दौरा कर रहे हैं और मुनगा की खेती का प्रशिक्षण भी ले रहे हैं। सरकारी योजनाओं का सही उपयोग और नई तकनीकों को अपनाकर किसान अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं—दीपांशु इसकी जीती-जागती मिसाल हैं। मुनगा की खेती न सिर्फ कम लागत और कम पानी में संभव है, बल्कि यह किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प भी बनकर उभर रही है। सरकारी योजनाओं और वैज्ञानिक मार्गदर्शन के साथ यदि किसान नई फसलों की ओर रुख करें, तो उनकी आय में बड़ा बदलाव संभव है।
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