Crop Residue Management: Mulcher खरीद पर सरकार दे रही बड़ी राहत, पर्यावरण के लिए बड़ा कदम

Mulcher एक आधुनिक कृषि उपकरण है, जिसका उपयोग फसल कटाई के बाद खेत में बचे अवशेष—जैसे धान की पराली, गेहूं के डंठल या गन्ने की पत्तियों—को काटकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बदलने के लिए किया जाता है।

खेती की बढ़ती लागत, मजदूरों की कमी और हर साल पराली जलाने से बढ़ते प्रदूषण के बीच अब सरकार Mulcher जैसी आधुनिक कृषि मशीनों पर भारी सब्सिडी दे रही है। इससे किसानों को आर्थिक मदद मिल रही है और साथ ही पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया जा रहा है।

क्या है Mulcher और कैसे करता है काम?

Mulcher एक आधुनिक कृषि उपकरण है, जिसका उपयोग फसल कटाई के बाद खेत में बचे अवशेष—जैसे धान की पराली, गेहूं के डंठल या गन्ने की पत्तियों—को काटकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बदलने के लिए किया जाता है। यह मशीन इन अवशेषों को खेत में ही फैला देती है, जिससे वे धीरे-धीरे सड़कर जैविक खाद में बदल जाते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और अगली फसल के लिए खेत बेहतर तरीके से तैयार हो जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इससे पराली जलाने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे वायु प्रदूषण में कमी आती है।

सब्सिडी का आधार: सरकारी योजना

केंद्र सरकार की Sub-Mission on Agricultural Mechanization (SMAM) योजना के तहत मल्चर जैसी मशीनों पर किसानों को 40 से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। छोटे और सीमांत किसानों को इस योजना के तहत विशेष लाभ मिलता है, जबकि महिला किसानों को 50 प्रतिशत तक की सहायता दी जाती है। इसके अलावा किसान समूहों, एफपीओ और स्वयं सहायता समूहों को भी इस योजना में शामिल किया गया है, जिससे सामूहिक रूप से मशीनों का उपयोग बढ़ सके।

दिल्ली-एनसीआर में विशेष फ़ोकस

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पराली जलाने की समस्या को देखते हुए सरकार ने विशेष योजनाएं लागू की हैं। हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में मल्चर और अन्य क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट मशीनों पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। वहीं, किसान समूहों और सहकारी समितियों को यह सहायता 80 प्रतिशत तक भी मिल सकती है। सरकार का मानना है कि यदि किसान इन मशीनों का अधिक उपयोग करेंगे, तो पराली जलाने की घटनाओं में कमी आएगी और प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी।

कीमत और सब्सिडी का गणित

मल्चर मशीन की कीमत भारत में आमतौर पर 80 हज़ार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक होती है, जो उसके आकार और ब्रांड पर निर्भर करती है। सब्सिडी मिलने के बाद यह लागत काफी कम हो जाती है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई किसान डेढ़ लाख रुपये का मल्चर खरीदता है, तो उसे 40 से 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिलने पर केवल 75 से 90 हज़ार रुपये तक ही खर्च करना पड़ता है। इस तरह यह मशीन अब किसानों के लिए पहले की तुलना में ज्यादा सुलभ हो गई है।

छोटे किसानों के लिए बेहतर विकल्प

छोटे और सीमांत किसानों के लिए सरकार ने एक और महत्वपूर्ण विकल्प उपलब्ध कराया है, जिसे Custom Hiring Centre (CHC) कहा जाता है। इसके तहत किसान बिना मशीन खरीदे ही किराये पर मल्चर का उपयोग कर सकते हैं। आमतौर पर इसका किराया 500 से 1500 रुपये प्रति एकड़ तक होता है। सरकार इन केंद्रों को स्थापित करने के लिए भी सब्सिडी देती है, जिससे गांव स्तर पर मशीनों की उपलब्धता बढ़े और ज्यादा से ज्यादा किसान इसका लाभ उठा सकें।

पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका

मल्चर मशीन का उपयोग केवल खेती को आसान बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा रही है। पराली जलाने से होने वाले धुएं और प्रदूषण को कम करने में यह मशीन काफी प्रभावी साबित हो रही है। साथ ही, यह मिट्टी की नमी को बनाए रखने, कार्बन उत्सर्जन को कम करने और भूमि की गुणवत्ता सुधारने में भी मदद करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़े पैमाने पर मल्चर का उपयोग किया जाए, तो दिल्ली-एनसीआर में हर साल बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज

सब्सिडी प्राप्त करने के लिए किसानों को राज्य कृषि विभाग की वेबसाइट, कॉमन सर्विस सेंटर या ब्लॉक स्तर के कृषि कार्यालय के माध्यम से आवेदन करना होता है। इसके लिए आधार कार्ड, जमीन के कागजात, बैंक खाता विवरण और पासपोर्ट साइज फोटो जैसे दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कई राज्यों ने ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किए हैं, जिससे किसानों को आवेदन करने में आसानी हो रही है।

किसानों का अनुभव और बढ़ती मांग

एनसीआर के कई किसानों ने बताया है कि सब्सिडी मिलने के बाद मल्चर मशीन का उपयोग उनके लिए काफी फ़ायदेमंद साबित हो रहा है। पहले जहां पराली हटाने में अधिक खर्च और समय लगता था, वहीं अब यह काम आसानी से और कम लागत में हो जाता है। इसके अलावा, खेत की मिट्टी की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला है, जिससे उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।

टिकाऊ खेती की ओर बढ़ता कदम

कुल मिलाकर, Mulcher मशीन पर मिल रही सब्सिडी किसानों के लिए एक बड़ा अवसर साबित हो रही है। यह न केवल उनकी खेती को आधुनिक और लाभकारी बना रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। सरकार की इस पहल और किसानों की भागीदारी से आने वाले समय में टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिलेगा और पराली जलाने जैसी समस्याओं पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।

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