100 एकड़ में जीरो टिलेज का धमाल, किसानों को बड़ा फ़ायदा

कृषि विज्ञान केंद्र के प्रचार-प्रसार पदाधिकारी रविकांत चौबे ने बताया कि जीरो टिलेज तकनीक किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है।

बिहार राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी “जल जीवन हरियाली मिशन” के तहत किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। रोह प्रखंड के बजवारा गांव में कृषि विज्ञान केंद्र, शेखेदेवरा की देखरेख में लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में जीरो टिलेज विधि से गेहूं की खेती की गई।

क्रॉप कटिंग से हुआ मूल्यांकन

इस परियोजना के तहत तैयार फसल की क्रॉप कटिंग कृषि विज्ञान केंद्र के इंचार्ज एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक जयवंत की निगरानी में संपन्न हुई। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम मिशन के दूसरे चरण के तहत नवादा जिले के पांच प्रखंडों में कुल 970 एकड़ भूमि पर रबी फसल के रूप में लागू किया गया है और अब इसका मूल्यांकन किया जा रहा है।

जीरो टिलेज तकनीक के फ़ायदे

कृषि विज्ञान केंद्र के प्रचार-प्रसार पदाधिकारी रविकांत चौबे ने बताया कि जीरो टिलेज तकनीक किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है। इस विधि में बार-बार जुताई की जरूरत नहीं होती, जिससे समय, डीज़ल और पानी की बचत होती है। साथ ही मजदूरी की लागत भी कम हो जाती है।

किसानों का अनुभव: लागत कम, मुनाफ़ा ज्यादा

स्थानीय किसान सुनील प्रसाद और अन्य किसानों ने बताया कि पारंपरिक खेती में तीन बार जुताई करनी पड़ती थी, जबकि इस तकनीक में सीधे बुआई संभव है। इससे लागत में कमी आई है और फसल उत्पादन बेहतर हुआ है। किसानों के अनुसार, यह तकनीक उनकी आय बढ़ाने में सहायक साबित हो रही है।

सोच में बदलाव, बढ़ रही दिलचस्पी

किसानों ने यह भी साझा किया कि शुरुआत में इस तकनीक को लेकर लोगों ने संदेह जताया और मजाक उड़ाया, लेकिन अब जब खेतों में अच्छे परिणाम दिख रहे हैं, तो अन्य किसान भी इसे अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र का सहयोग जारी

रविकांत चौबे ने बताया कि किसानों की जरूरतों के अनुसार उर्वरक और कीटनाशक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि खेती में किसी प्रकार की बाधा न आए।

भविष्य के लिए प्रेरणादायक मॉडल

जीरो टिलेज तकनीक न केवल लागत और श्रम में कमी ला रही है, बल्कि अधिक उत्पादन और बेहतर आय का रास्ता भी खोल रही है। यह पहल आने वाले समय में राज्य के अन्य किसानों के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकती है।

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