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देसी मिट्टी में विदेशी फलों की खेती से कैसे बढ़ाएं आमदनी, वैज्ञानिक कर रहे हैं शोध

मध्य प्रदेश में ड्रैगन फ्रूट और ब्लूबेरी जैसे विदेशी फलों को लेकर कृषि वैज्ञानिकों की पहल

भारत में विदेशी फलों की बढ़ती मांग किसानों की आय दोगुनी करने का अच्छा अवसर बन सकती है। स्वास्थ्य को लेकर विशेष गुणों के कारण इन फलों को लोग देसी फलों की तुलना में ज्यादा कीमत पर खरीद रहे हैं। इसे देखते हुए भारतीय कृषि वैज्ञानिक ये शोध कर रहे हैं कि किन फलों के लिए किस तरह की मिट्टी और जलवायु ज्यादा अनुकूल हो सकती है।

भारत के किसान अब परंपरागत देसी फलों के साथ-साथ विदेशी फलों की खेती में भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। बाज़ार की मांग के मुताबिक खेती के तौर-तरीकों में बदलाव से किसानों की आमदनी बढ़ने में भी दिखेगी, इसे देखते हुए वो विदेशी फलों का उत्पादन कैसे करें, इसे लेकर लगातार जानकारी जुटा रहे हैं।

जिन विदेशी फलों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है, उनमें ड्रैगन फ्रूट, ब्लूबेरी, स्टार फ्रूट मुख्य हैं। इन फलों के स्वास्थ्य संबंधी फ़ायदे भी हैं, इस वजह से भी इनकी मांग में इज़ाफ़ा हो रहा है। अब मध्य प्रदेश के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, विदेशी फलों को प्रदेश और देश में किस तरह ज्यादा से ज्यादा उत्पादन किया जाए, इसे लेकर शोध में जुटे हैं।

कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो ये विदेशी फल प्रदेश की ज़मीन पर तैयार किए जा सकते हैं, जिससे किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ा जा सकेगा।

blueberry farming

प्रदेश में इन विदेशी फलों को किस तापमान और जलवायु में उगाया जा सकता है, इसके लिए विश्वविद्यालय के क्षेत्र में आने वाले आगर-मालवा, ग्वालियर,मंदसौर, शिवपुरी, मुरैना व अन्य जिलों में कृषि वैज्ञानिक रिसर्च में लगे हैं। प्रदेश के जलवायु में इन विदेशी फलों के पौधे विकसित किए जा रहे हैं। कटिंग बीजों के ज़रिए फलों को नर्सरी में तैयार किया जा रहा है।

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शोध के लिए ICAR से चार करोड़ की मांगी मदद

अभी विश्व विद्यालय ने विदेशी फलों को तैयार करने के लिए शोध कार्य छोटे स्तर पर ही किया है। इस शोध को बड़े पैमाने पर करने के लिए विश्व विद्यालय के वैज्ञानिकों ने ICAR से चार करोड़ रुपये की मदद मांगी है।

star fruit

भारतीय बाज़ार में कितनी है इन विदेशी फलों की कीमत

ड्रैगेन फ्रूट (कमलम) की खेती मुख्य रूप से नीदरलैंड, इजरायल, श्रीलंका, वियतमान, थाइलैण्ड में की जाती है। भारतीय बाज़ार में इसकी कीमत 300-400 रुपये प्रति किलो है। वहीं स्टार फ्रूट (कमरख) श्रीलंका, मलेशिया, इंडोनेशिया, बंगलादेश और फिलीपींस में पाया जाता है। इसकी बाज़ार कीमत 600 से 700 रुपये प्रति किलोग्राम है। उधर पोलैंड, कनाडा, जर्मनी और नीदरलैंड में ब्लूबेरी का उत्पादन उच्च मात्रा में किया जाता है।

अगर सबसे ज़्यादा उत्पादन की बात करें तो विश्व में सबसे अधिक ब्लूबेरी का उत्पादन आज भी उत्तरी अमेरिका में किया जाता है। इसकी प्रति किलोग्राम कीमत 400 से 500 रुपये है।

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