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छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा नगर पंचायत में एक युवा पशुपालक ने आधुनिक तकनीक की मदद से डेयरी पालन (Dairy Farming) को नई पहचान दी है। पशुधन विकास को बढ़ावा देने के लिए अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों का असर अब ज़मीन पर भी दिखाई देने लगा है। इसका उदाहरण विष्णु प्रसाद यादव हैं, जिन्होंने वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर डेयरी पालन को लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया है।
प्रशिक्षण से मिली नई दिशा
विष्णु प्रसाद यादव ने कृषि विज्ञान केंद्र, जांजगीर द्वारा आयोजित पशुपालन प्रशिक्षण में भाग लिया। इस प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अपने डेयरी पालन (Dairy Farming) के तरीके में बदलाव किया और आधुनिक तकनीकों को अपनाना शुरू किया।
प्रशिक्षण और वैज्ञानिक जानकारी के सहारे उन्होंने डेयरी पालन को सिर्फ़ पारंपरिक काम तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे बेहतर आय का साधन बना दिया।
कृत्रिम गर्भाधान तकनीक से बढ़ा उत्पादन
विष्णु यादव ने अपनी डेयरी में कृत्रिम गर्भाधान तकनीक का उपयोग किया, जिससे पशुओं की नस्ल में सुधार हुआ। इस तकनीक के जरिए अब तक उनकी डेयरी में 11 स्वस्थ बछड़े और बछियों का जन्म हो चुका है।
इस बदलाव का सीधा असर डेयरी पालन (Dairy Farming) पर भी देखने को मिला है। बेहतर नस्ल के पशुओं के कारण दूध उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी हुई है और डेयरी पालन (Dairy Farming) का काम पहले से ज़्यादा मज़बूत हुआ है।
रोजाना 100 लीटर दूध का उत्पादन
आज विष्णु प्रसाद यादव के डेयरी पालन मॉडल से रोजाना लगभग 100 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। वे इस दूध को क़रीब 70 रुपये प्रति लीटर की दर से बेच रहे हैं, जिससे उन्हें नियमित आय मिल रही है।
डेयरी पालन (Dairy Farming) से होने वाली इस आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मज़बूत किया है और उन्हें आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया है।
उन्नत नस्ल के पशुओं से मिली मज़बूती
वर्तमान में विष्णु यादव के पास 35 से अधिक उन्नत नस्ल के पशु हैं। वैज्ञानिक पद्धतियों और आधुनिक तकनीकों की मदद से उन्होंने डेयरी पालन (Dairy Farming) को एक व्यवस्थित व्यवसाय का रूप दिया है।
उनका मानना है कि सही जानकारी और तकनीक अपनाकर डेयरी पालन में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
वैज्ञानिकों ने बताया प्रेरणादायक मॉडल
कृषि विज्ञान केंद्र, जांजगीर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. के. डी. महंत ने बताया कि विष्णु यादव की सफलता जिले के अन्य पशुपालकों के लिए प्रेरणा है।
उन्होंने कहा कि अगर वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाया जाए तो डेयरी पालन (Dairy Farming) को मज़बूत आजीविका मॉडल बनाया जा सकता है। इससे न केवल आय बढ़ेगी, बल्कि पशुधन विकास को भी गति मिलेगी।
पशुपालन से बढ़ रही आर्थिक मज़बूती
पशुधन विकास विभाग की पहल से अब किसानों और पशुपालकों का भरोसा बढ़ रहा है। आधुनिक तकनीकों के कारण डेयरी पालन (Dairy Farming) अब सिर्फ़ पारंपरिक काम नहीं रह गया, बल्कि ये आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है।
जिले में कई लोग अब डेयरी पालन की ओर रुचि दिखा रहे हैं और इसे रोज़गार के रूप में अपनाने की तैयारी कर रहे हैं।
बदलती सोच और नया अवसर
बलौदा के युवा पशुपालक की ये सफलता दिखाती है कि मेहनत, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक से डेयरी पालन (Dairy Farming) को एक सफल व्यवसाय बनाया जा सकता है।
आज ये मॉडल अन्य पशुपालकों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है और ये साबित कर रहा है कि वैज्ञानिक तरीके अपनाकर डेयरी पालन से बेहतर आय और मज़बूत भविष्य बनाया जा सकता है।
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Pic Credit: PB-SHABD

