बेबी कॉर्न की खेती से बदली किसानों की तकदीर, युवाओं के लिए बना मुनाफे़ का नया मॉडल

पूर्णिया जिले के रानीपतरा के युवा किसान शशि भूषण ने खेती के क्षेत्र में एक नया उदाहरण पेश किया है। जहां अधिकांश किसान अभी भी पारंपरिक फसलों पर निर्भर हैं, वहीं शशि भूषण ने बेबी कॉर्न की खेती अपनाकर यह दिखाया है कि कम समय और कम लागत में भी बेहतर मुनाफ़ा  कमाया जा सकता है।

बदलते दौर में खेती अब सिर्फ़ पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि किसान नई फसलों और तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने के रास्ते तलाश रहे हैं। बिहार के पूर्णिया जिले के रानीपतरा गांव से सामने आई एक ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी, जहां एक युवा किसान ने बेबी कॉर्न की खेती के जरिए न सिर्फ़ अपनी तकदीर बदली, बल्कि पूरे इलाके के किसानों के लिए मुनाफे़ का नया रास्ता खोल दिया।

पारंपरिक खेती से अलग नई राह

पूर्णिया जिले के रानीपतरा के युवा किसान शशि भूषण ने खेती के क्षेत्र में एक नया उदाहरण पेश किया है। जहां अधिकांश किसान अभी भी पारंपरिक फसलों पर निर्भर हैं, वहीं शशि भूषण ने बेबी कॉर्न की खेती अपनाकर यह दिखाया है कि कम समय और कम लागत में भी बेहतर मुनाफ़ा  कमाया जा सकता है। उनकी इस पहल ने आसपास के किसानों को भी नई दिशा दी है।

60–70 दिनों में तैयार, तेज आमदनी का जरिया

शशि भूषण के अनुसार, बेबी कॉर्न की फसल महज 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है। यही वजह है कि किसान साल में कई बार इसकी खेती कर सकते हैं। कम समय में तैयार होने के कारण यह फसल किसानों के लिए तेज आमदनी का एक प्रभावी विकल्प बनकर उभरी है। शशि बताते हैं कि इस खेती से कई युवा किसान लाखों रुपये तक की कमाई कर रहे हैं।

 बाजार में आसान बिक्री, अतिरिक्त फायदे भी

बेबी कॉर्न की सबसे बड़ी खासियत इसकी बाजार में आसान खपत है। शशि भूषण बताते हैं कि यह फसल जल्दी बिक जाती है और इसकी मांग लगातार बनी रहती है। इसके अलावा, इसके पौधे पशुओं के लिए भी बेहतरीन चारा साबित होते हैं। इन्हें खाने से मवेशियों का दूध उत्पादन बढ़ता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलता है।

 अन्य किसान भी हुए प्रेरित

रानीपतरा के ही किसान शरद कुमार साह कहते हैं कि शशि भूषण की पहल से प्रेरित होकर अब कई किसान बेबी कॉर्न की खेती अपना रहे हैं। उनके अनुसार, यह खेती कम जोखिम वाली और अधिक लाभ देने वाली है। गांव में धीरे-धीरे यह एक लोकप्रिय विकल्प बनती जा रही है, जिससे किसानों की आय में सुधार देखने को मिल रहा है।

सरकार का भी मिल रहा समर्थन

बिहार सरकार भी किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर आधुनिक फसलों की ओर प्रेरित कर रही है। राज्य में स्वीट कॉर्न और बेबी कॉर्न की खेती को बढ़ावा देने के लिए बीज पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। कृषि विभाग के सहायक निदेशक जय किशन कुमार के अनुसार, यह फसल कम समय में अधिक लाभ देती है और इसके लिए बाजार भी आसानी से उपलब्ध है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलती है।

किसानों के लिए नई उम्मीद

पूर्णिया से स्मित कुमार की रिपोर्ट बताती है कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में अब खेती के तौर-तरीके बदल रहे हैं। शशि भूषण जैसे युवा किसान नई तकनीकों और फसलों को अपनाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं, बल्कि दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं।

बेबी कॉर्न की खेती आज किसानों के लिए एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है, जो कम लागत, कम समय और अधिक मुनाफे़ का संतुलित मॉडल पेश करती है।

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