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उत्तराखंड स्थित ढकरानी कृषि विज्ञान केंद्र एक बार फिर किसानों के लिए नई पहल लेकर आया है। यहां समय-समय पर किसानों के लिए उन्नत और बेहतर उत्पादन देने वाली नई फ़सल किस्में तैयार की जाती हैं। इन दिनों ढकरानी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने सब्ज़ियों की कई नई पौध तैयार की हैं, जिसे लेकर किसानों में काफ़ी उत्साह देखा जा रहा है।
सब्ज़ियों की नई पौध से किसानों को मिलेगा फ़ायदा
ढकरानी कृषि विज्ञान केंद्र में इस समय कद्दू वर्ग की कई उन्नत किस्मों पर काम किया जा रहा है। वैज्ञानिकों ने हाईब्रिड धारी वाली और काली तोरई, लम्बी और गोलाकार लौकी, करेला और खीरा जैसी नई फ़सल किस्में तैयार की हैं। इन पौधों को किसानों के लिए सुलभ बनाने के लिए केंद्र पर मात्र 10 रुपये प्रति पौधा उपलब्ध कराया जा रहा है।
किसानों के लिए यह एक अच्छा मौका है, क्योंकि ढकरानी कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा तैयार की गई ये नई फ़सल किस्में बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं। इससे किसानों को कम लागत में अच्छी पैदावार मिलने की उम्मीद है।
टमाटर की उन्नत किस्म बनी आकर्षण का केंद्र
सब्ज़ियों के साथ-साथ ढकरानी कृषि विज्ञान केंद्र में टमाटर की एक ख़ास किस्म इंडम 1313 भी तैयार की गई है। यह भी एक प्रमुख नई फ़सल किस्में में शामिल है, जिसकी गुणवत्ता और साइज दोनों बेहतर बताए जा रहे हैं।
इस टमाटर की ख़ास बात यह है कि इसका छिलका थोड़ा मोटा होता है, जिससे यह जल्दी ख़राब नहीं होता। किसान इसे लंबी दूरी तक आसानी से भेज सकते हैं। यही कारण है कि ढकरानी कृषि विज्ञान केंद्र की यह पहल बाजार की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर की गई है।
रंगीन फूलगोभी ने खींचा किसानों का ध्यान
इस बार ढकरानी कृषि विज्ञान केंद्र में फूलगोभी की प्रदर्शनी भी लगाई गई है, जो किसानों के लिए एक नई जानकारी लेकर आई है। अब तक किसान सफेद फूलगोभी उगाते थे, लेकिन अब यहां पर्पल और पीले रंग की नई फ़सल किस्में भी दिखाई गई हैं।
इन रंगीन फूलगोभी में विटामिन ए भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए फ़ायदेमंद है। ढकरानी कृषि विज्ञान केंद्र की यह पहल किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है।
वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन और प्रदर्शनी का आयोजन
ढकरानी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार शर्मा के अनुसार, केंद्र में इस समय 4 से 5 तरह की अलग-अलग सब्ज़ियों की प्रदर्शनी लगाई गई है। इन प्रदर्शनों के जरिए किसानों को नई फ़सल किस्में के बारे में जानकारी दी जा रही है।
उन्होंने बताया कि टमाटर की बेल वाली फ़सलें विशेष रूप से प्रदर्शित की गई हैं, क्योंकि पर्वतीय क्षेत्रों में किसान बड़े स्तर पर टमाटर की खेती करते हैं। ढकरानी कृषि विज्ञान केंद्र लगातार ऐसी नई फ़सल किस्में विकसित कर रहा है, जो किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकें।
पहाड़ी किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखकर काम
डॉ. शर्मा ने यह भी बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में टमाटर की खेती के दौरान कई चुनौतियां सामने आती हैं। ख़ासकर मानसून के समय फ़सल को सुरक्षित रखना और उसे पहाड़ से मैदान तक सही स्थिति में पहुंचाना एक बड़ी समस्या होती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए ढकरानी कृषि विज्ञान केंद्र ऐसी नई फ़सल किस्में तैयार कर रहा है, जो ज़्यादा टिकाऊ हों और ट्रांसपोर्टेशन में ख़राब न हों। इससे किसानों को बाजार में बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
किसानों के लिए नई दिशा बन रहा केंद्र
ढकरानी कृषि विज्ञान केंद्र किसानों के लिए एक भरोसेमंद मार्गदर्शक के रूप में उभर रहा है। यहां तैयार की जा रही नई फ़सल किस्में न केवल उत्पादन बढ़ाने में मदद कर रही हैं, बल्कि किसानों को नई तकनीक और बेहतर विकल्प भी दे रही हैं।
इस तरह की पहल से किसानों को खेती में नई दिशा मिल रही है और वे बदलते समय के अनुसार खुद को तैयार कर पा रहे हैं।
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Pic Credit: PB-SHABD

