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बिहार के नवादा ज़िले के रोह प्रखंड के बजवारा गांव में खेती का तरीका तेजी से बदल रहा है। यहां किसान अब पारंपरिक जुताई पर निर्भर रहने के बजाय जीरो टिलेज मशीन की मदद से खेती कर रहे हैं। इस नई तकनीक से न केवल समय और मेहनत की बचत हो रही है, बल्कि किसानों को बेहतर उत्पादन भी मिल रहा है। यह पहल राज्य सरकार की जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत शुरू की गई है, जिससे गांव के किसानों में नई ऊर्जा देखने को मिल रही है।
कृषि विज्ञान केंद्र के मार्गदर्शन में शुरू हुई पहल
इस बदलाव के पीछे कृषि विज्ञान केंद्र की अहम भूमिका रही है। केंद्र से जुड़े तकनीकी सहायक भोला कुमार किसानों के बीच लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में किसानों को इस नई तकनीक पर भरोसा दिलाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन धीरे-धीरे किसानों ने इसे अपनाना शुरू कर दिया।
भोला कुमार के अनुसार, पहले गेहूं की फ़सल में जीरो टिलेज मशीन का प्रयोग कराया गया। जब किसानों ने इसके अच्छे परिणाम देखे, तो उनका विश्वास बढ़ा और अब वे अन्य फ़सलों में भी इस तकनीक को अपना रहे हैं।
सीधी बुवाई से मूंग की खेती में मिला नया रास्ता
गेहूं की कटाई के बाद खाली खेतों में अब सीधी बुवाई तकनीक के जरिए मूंग की खेती की जा रही है। इस प्रक्रिया में खेत की ज़्यादा जुताई की ज़रूरत नहीं होती और जीरो टिलेज मशीन के माध्यम से सीधे बीज बो दिए जाते हैं।
सीधी बुवाई से खेती आसान हो गई है और किसानों को कम समय में बेहतर काम करने का मौका मिल रहा है। यही कारण है कि अब गांव के अधिक किसान इस तकनीक को अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं।
कम लागत और ज़्यादा उपज से किसानों में उत्साह
गांव के किसान सुनील प्रसाद और पंकज कुमार, जिन्होंने पहले गेहूं की खेती में इस तकनीक का उपयोग किया था, बताते हैं कि जीरो टिलेज मशीन से उनकी लागत काफी कम हो गई और उत्पादन उम्मीद से ज़्यादा मिला। इससे उन्हें अच्छा मुनाफ़ा हुआ और वे इस पहल से काफी संतुष्ट हैं।
किसानों का कहना है कि सीधी बुवाई के कारण जुताई, मजदूरी और समय की बचत होती है, जिससे खेती का ख़र्च घट जाता है। साथ ही फ़सल समय पर तैयार होती है और उसकी गुणवत्ता भी बेहतर रहती है।
अन्य किसान भी दिखा रहे रुचि
गांव के किसान किशोर प्रसाद, जिन्होंने अभी तक इस तकनीक को नहीं अपनाया था, अब इसे लेकर काफी उत्साहित हैं। वे कहते हैं कि जब उन्होंने दूसरों के खेतों में जीरो टिलेज मशीन से अच्छी फ़सल देखी, तो उन्हें भी यह तरीका अपनाने की प्रेरणा मिली।
अब वे भी आने वाले समय में सीधी बुवाई और जीरो टिलेज मशीन का उपयोग करने की योजना बना रहे हैं। यह बदलाव दिखाता है कि एक किसान की सफलता दूसरे किसान के लिए प्रेरणा बन रही है।
तकनीकी सहायता से आसान हो रही खेती
कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से किसानों को लगातार तकनीकी सहायता दी जा रही है। भोला कुमार और उनकी टीम किसानों को जीरो टिलेज मशीन, बीज और दवाओं से जुड़ी जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। साथ ही खेतों का समय-समय पर निरीक्षण भी किया जाता है ताकि फ़सल अच्छी तरह विकसित हो सके।
इस सहयोग से किसान नई तकनीक को बेहतर तरीके से समझ पा रहे हैं और सीधी बुवाई को अपने खेतों में सफलतापूर्वक लागू कर रहे हैं। इससे खेती अब पहले से ज़्यादा सरल और प्रभावी बन रही है।
खेती के लिए बन रही नई दिशा
बजवारा गांव में अपनाई जा रही यह तकनीक खेती के भविष्य की एक नई दिशा दिखा रही है। जीरो टिलेज मशीन और सीधी बुवाई के जरिए किसान कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल कर रहे हैं, जिससे उनकी आय में सुधार हो रहा है।
यह मॉडल अब आसपास के गांवों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। किसान समझ रहे हैं कि यदि सही तकनीक और मार्गदर्शन मिले, तो खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। आने वाले समय में इस तरह की तकनीकें खेती को और मजबूत बनाएंगी और किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएंगी।
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Pic Credit: PB-SHABD

