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भारतीय किसानों के लिए एक सुनहरा अवसर आ रहा है। देश की पहली जीन एडिटेड धान किस्म ‘पूसा DST राइस-1’ (Gene-edited rice variety ‘Pusa DST Rice-1’)इस साल रबी सीजन में बीज उत्पादन के लिए तैयार है। ये वैज्ञानिक क्रांति उन किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है, जो सूखा, खारा पानी और बंज़र ज़मीन जैसी मुश्किलों से जूझते हैं।
क्या है ये नई किस्म?
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली ने ये किस्म ‘MTU-1010’ धान से विकसित की है, जो दक्षिण भारत के रबी सीजन के लिए बेस्ट है। वैज्ञानिकों ने CRISPR-Cas9 तकनीक का इस्तेमाल कर इस धान में एक ख़ास जीन (DST) को एडिट किया है, जो पौधे की तनाव सहनशीलता को दबाता है। इस बदलाव से ये धान सूखा, खारापन और क्षारीय मिट्टी को बेहतर ढंग से सहन कर सकता है।
उपज में कमाल!
टेस्टिंग के नतीजे चौंकाने वाले हैं। खारी मिट्टी में जहां MTU-1010 की पैदावार 1912 किलो प्रति हेक्टेयर थी, वहीं पूसा DST राइस-1 ने 2493 किलो प्रति हेक्टेयर उपज दी। यानी किसानों को प्रतिकूल परिस्थितियों में भी 20-30 फीसदी ज़्यादा पैदावार मिल सकती है। ख़ास बात ये है कि इसमें किसी विदेशी जीन का इस्तेमाल नहीं किया गया, बल्कि पौधे के अपने डीएनए में ही बदलाव किया गया है।
अमेरिकी कंपनी से समझौता
इस नई किस्म को किसानों तक पहुंचाने के लिए ICAR अमेरिकी कंपनी Corteva के साथ समझौता करने जा रहा है, जिसके पास CRISPR-Cas9 तकनीक का लाइसेंस है। ख़बर के मुताबिक, इस समझौते के लिए ज़रूरी तीन में से दो मंजूरियां मिल चुकी हैं, जिनमें विदेश मंत्रालय की मंजूरी भी शामिल है। तीसरी मंजू़री मिलते ही MoU पर हस्ताक्षर हो जाएंगे।
13 राज्यों में होगी खेती
ICAR ने इस किस्म को आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में खेती के लिए सिफारिश की गई है। ये उन राज्यों के लिए बड़ी राहत है, जहां किसान अक्सर सूखा और बाढ़ जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं।
क्या है जीन एडिटिंग?
जीन एडिटिंग (Gene Editing) को समझना बहुत आसान है। इसे किताब की किसी गलती को सुधारने की तरह समझें। पारंपरिक जीएम फसलों में बाहरी जीन डाले जाते हैं, लेकिन जीन एडिटिंग में पौधे के अपने डीएनए में ही सुधार किया जाता है । इसे SDN-1 (Site-Directed Nuclease-1) तकनीक कहते हैं, जो बिना कोई बाहरी डीएनए डाले पौधे की मौजूदा ख़ासियतों को बेहतर बनाती है।
CRISPR-Cas12a तकनीक का पेटेंट
Corteva के साथ समझौते के बाद MIT/Broad Institute के साथ भी अलग समझौता किया जाएगा, जिसके पास CRISPR-Cas12a तकनीक का पेटेंट है। इसी टेक्नोलॉजी से हैदराबाद स्थित भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान (IIRR) ने ‘DRR धान-100 (कमला)’ विकसित किया है।
ये पहल भारत को ग्लोबल लेवल पर जीन एडिटिंग तकनीक में सबसे आगे लेकर जाएगा। और ‘हरित क्रांति’ का एक नया चैप्टर लिखेगी।
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