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क्या आपको पता है कि जिस पनीर को आप रोज़ाना खा रहे हैं, वो असली दूध से बना है या फिर पाम ऑयल और पाउडर का मिक्सचर? ये सवाल बेहद गंभीर है, क्योंकि छत्तीसगढ़ सरकार (Government of Chhattisgarh) ने हाल ही में पूरे राज्य में ‘एनालॉग पनीर’(Analogue Cheese) और इसी तरह के नकली डेयरी उत्पादों (Fake dairy products) की बिक्री, स्टोरेज और मैन्युफैक्चरिंग पर तुरंत रोक लगा दी है। ये कदम लोगों की सेहत और फूड सिक्योरिटी को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
सरकार को क्या मिली गड़बड़ी?
दरअसल, Food and Drug Administration Department की जांच और लैब टेस्ट में ये बात सामने आई कि बाजार में कुछ ऐसे प्रोडक्ट बेचे जा रहे थे, जो असली दूध से नहीं बने थे। इनमें दूध की जगह वनस्पति वसा, पाम ऑयल या स्किम्ड मिल्क पाउडर (Vegetable fat, palm oil, or skimmed milk powder) का इस्तेमाल किया जा रहा था। फिर भी, इन्हें पनीर, क्रीम और मक्खन जैसे असली डेयरी प्रोडक्ट्स के रूप में पेश किया जा रहा था, जिससे लोग Confused हो रहे थे और उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ रहा था।
क्या है ‘एनालॉग पनीर’ और ये क्यों है ख़तरनाक?
एनालॉग पनीर को दूध से नहीं, बल्कि वेजिटेबल ऑयल, स्टार्च और इमल्सीफायर (एक तरह का केमिकल) मिलाकर बनाया जाता है। ये देखने में असली पनीर की तरह लगता है, लेकिन इसमें प्रोटीन और कैल्शियम जैसे जरूरी पोषक तत्व ना के बराबर होते हैं ।
1.सेहत पर जोखिम: असली पनीर की जगह इसे खाने से आपको भरपूर प्रोटीन नहीं मिलता। इसमें मौजूद रिफाइंड वसा (Refined Fat) लंबे वक्त में कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने, दिल की बीमारियों और मोटापे का कारण बन सकता है।
2.आर्थिक धोखा: असली पनीर 400-600 रुपये प्रति किलो बिकता है, जबकि नकली पनीर सिर्फ 200-300 रुपये में मिलता है। होटल और ढाबे इसे खरीदकर कस्टमर को उसी कीमत पर बेचते हैं, जो सीधा धोखा है।
क्या है सरकार का आदेश और कितनी देर तक रहेगा बैन?
- तुरंत प्रभाव: राज्य सरकार ने इस तरह के सभी गैर-मानक डेयरी एनालॉग प्रोडक्ट्स के निर्माण, प्रोसेसिंग, स्टोरेज और बिक्री पर रोक लगा दी है।
- अवधि: ये बैन राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने की तारीख से एक साल तक लागू रहेगा, या जब तक FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) इस पर लास्ट रूल नहीं बना देता।
- किस पर बैन नहीं?: ध्यान रहे, फ्रोजन डेजर्ट (Ice Cream), प्रोसेस्ड चीज़ और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे तय मानकों के प्रोडक्ट्स इस बैन में शामिल नहीं हैं।
कैसे पहचानें असली और नकली पनीर?
अगर आप भी चिंतित हैं कि कहीं आपको नकली पनीर तो नहीं खिला दिया जा रहा, तो इन बातों का ध्यान रखें:
1.पैकेट देखें: अगर पनीर पैक्ड है, तो लेबल पर ज़रूर पढ़ें। अगर ‘एनालॉग पनीर’ लिखा है तो समझ जाइए ये दूध से नहीं बना है।
2.दुकानदार से पूछें: खुला पनीर खरीदते समय पूछें कि ये डेयरी पनीर है या एनालॉग ।
3.रेस्टोरेंट में शिकायत: होटल-रेस्टोरेंट में अब मेनू कार्ड पर ये बताना Mandatory है। अगर वे ‘पनीर’ शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उन्हें असली दूध वाला पनीर ही इस्तेमाल करना होगा। अगर नहीं, तो आप सवाल कर सकते हैं।
4.बनावट और स्वाद: असली पनीर मुलायम होता है और आसानी से टूट जाता है, जबकि एनालॉग सख्त और रबड़ जैसा लगता है। हालांकि, ये हमेशा सटीक तरीका नहीं है, इसलिए भरोसेमंद ब्रांड से ही खरीदारी करें।
छत्तीसगढ़ सरकार का ये फैसला उपभोक्ताओं के हित में एक बड़ा और ज़रूरी कदम है। अगर कहीं आपको भी नकली पनीर बिकता दिखे, तो खाद्य सुरक्षा विभाग को इसकी सूचना दें।
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