ICAR की दो नई आलू की किस्में: किसानों की आमदनी बढ़ाने वाला बड़ा कदम

ICAR की आलू की ये दोनों किस्में वैज्ञानिकों की मेहनत और अनुसंधान का नतीजा हैं। इन्हें अपनाकर किसान न केवल अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं बल्कि देश को आत्मनिर्भर बनाने में भी योगदान दे सकते हैं।

भारतीय किसानों के लिए एक बड़ी ख़बर आ गई है। ICAR की डेवलप की कई केंद्र सरकार ने 8 जुलाई 2026 को आलू की दो नई किस्मों – ‘कुफरी अभेद्य’ और ‘कुफरी रूबी’ को ऑफिशियल तौर पर मंजूरी दे दी है। ये ख़बर देश के लाखों आलू किसानों के लिए संजीवनी से कम नहीं है। 

 ‘कुफरी अभेद्य’ – पहाड़ों की ताकत

हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और नॉर्थ ईस्ट के पहाड़ी किसानों (Hill farmers of Himachal, Uttarakhand, Jammu & Kashmir, Ladakh, and the North East )के लिए ये किस्म वरदान साबित होगी। ये 110-120 दिनों में तैयार होने वाली मीडियम टर्म की फसल है, जो 25-30 टन प्रति हेक्टेयर उपज देती है।

वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता

इस किस्म की सबसे बड़ी ख़ासियत ये है कि ये ‘Late blight’ (एक घातक बीमारी) और ‘Potato cyst nematode’ (PCN) नामक कीट से बचाती है। वैज्ञानिक डॉ. सलेज सूद के अनुसार, ये भारत की पहली ऐसी किस्म है जो PCN की दोनों प्रजातियों से लड़ सकती है। 

 ‘कुफरी रूबी’ – नए बाज़ार की चाभी

शहरी इलाकों में ‘Baby potato’ की बढ़ती मांग को देखते हुए ये किस्म विकसित की गई है। इसकी 60 फीसदी उपज मात्र 90 दिनों में बेबी पोटैटो के रूप में तैयार हो जाती है। उत्पादन क्षमता 23-25 टन प्रति हेक्टेयर है।

ये किस्म खासतौर पर फूड प्रोसेसिंग, होटल-रेस्तरां और प्रीमियम बाजार के लिए एकदम उपयुक्त है। हरियाणा, पंजाब, यूपी, बिहार, वेस्ट बंगाल सहित 14 राज्यों में इसकी खेती की सिफारिश की गई है।

 किसानों को क्या-क्या फायदे होंगे?

  1. फसल नुकसान से बचाव

Disease Resistant होने के कारण कीटनाशकों पर कम खर्च और फसल बर्बादी से बचाव

 2. कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा

कैमिकल दवाओं पर खर्च घटेगा, प्रोडक्शन बढ़ेगा

  3. हाई-क्वालिटी बीज की उपलब्धता

अब अधिसूचना के बाद प्रमाणित बीज आसानी से मिल सकेंगे

  4. नए बाजार के दरवाज़े खुले

‘कुफरी रूबी’ जैसी किस्म किसानों को बेबी पोटैटो के महंगे बाजार से जोड़ेगी

  5. बदलते जलवायु का सामना

वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखकर इन्हें विकसित किया है

किसानों से अपील

आलू की ये दोनों किस्में वैज्ञानिकों की मेहनत और अनुसंधान का नतीजा हैं। इन्हें अपनाकर किसान न केवल अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं बल्कि देश को आत्मनिर्भर बनाने में भी योगदान दे सकते हैं।

 

सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या [email protected] पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

ये भी पढ़ें: India-New Zealand Agriculture Partnership: कृषि, बागवानी, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में सहयोग,किसानों की आमदनी बढ़ाने की नई पहल

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top